फॉरेस्ट रेंजर की ग्रामीणों को धमकी, दो मिनट में यहीं कब्र खोद दूंगा
News in Short
- खंडवा के नर्लाय गांव में वन विभाग की कार्रवाई को लेकर आदिवासी परिवारों का विरोध किया।
- फॉरेस्ट रेंजर पर धमकी देने का आरोप, सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल।
- ग्रामीणों का दावा है कि वे चार पीढ़ियों से इस जमीन पर खेती कर रहे हैं।
- वन विभाग और ग्रामीणों के बीच जमीन के अधिकार को लेकर विरोधाभास।
- अगर जमीन छीनी गई तो ग्रामीणों ने आंदोलन तेज करने की चेतावनी दी है।
News in Detail
मध्यप्रदेश के खंडवा जिले के नर्लाय गांव में वन विभाग की कार्रवाई के दौरान एक बड़ा विवाद सामने आया। वन भूमि पर कथित अवैध कब्जा हटाने पहुंचे प्रशासन और वन विभाग (forest department ) की टीम को ग्रामीणों का विरोध झेलना पड़ा। जैसे ही टीम मौके पर पहुंची, आदिवासी परिवारों ने अपने घर और खेत उजड़ने के डर से प्रदर्शन शुरू कर दिया, जिससे माहौल तनावपूर्ण हो गया।
फॉरेस्ट रेंजर पर गंभीर आरोप
विवाद उस समय और बढ़ गया जब फॉरेस्ट रेंजर शंकर सिंह चौहान पर आदिवासियों को धमकी देने का आरोप लगा। सोशल मीडिया पर उनका एक वीडियो वायरल हो रहा है। वीडियो में वह कहते हैं, ज्यादा फालतू बात मत करो, नहीं तो यहीं तुम्हारी कब्र खोद दी जाएगी। यह बयान वायरल होने के बाद प्रशासन और वन विभाग की कार्यशैली पर सवाल उठने लगे हैं।
आदिवासी परिवारों का दावा
ग्रामीणों का कहना है कि वे पिछले चार पीढ़ियों से इस जमीन पर खेती कर रहे हैं और यह उनका पुश्तैनी अधिकार है। करीब 15-20 आदिवासी भील परिवार इस जमीन पर निर्भर हैं। उनका आरोप है कि इस अचानक हुई कार्रवाई ने उनके जीवन को संकट में डाल दिया है। वे बेघर होने की कगार पर पहुंच गए हैं।
रेंजर ने दी सफाई
रेंजर शंकर सिंह चौहान कहा कि कुछ युवक हंगामा कर रहे थे और स्टाफ से अपशब्द कह रहे थे। एक युवक पत्थर लेकर दौड़ा था, जिससे स्थिति तनावपूर्ण हो गई। रेंजर ने कहा कि उनकी आवेश में कही गई बात को गलत तरीके से लिया जा रहा है।
जमीन के अधिकार को लेकर विरोधाभास
मामला तब और जटिल हुआ जब जमीन को लेकर अलग-अलग दावे सामने आए। वन विभाग का कहना है कि 23 एकड़ जमीन चार साल पहले विभाग को सौंपी गई थी। ग्रामीणों का दावा है कि वे 85 एकड़ जमीन पर वर्षों से खेती कर रहे हैं और यह उनकी पारंपरिक आजीविका का हिस्सा है।
आंदोलन की चेतावनी
कार्रवाई के दौरान गांव में भारी हंगामा हुआ और स्थिति नियंत्रण से बाहर हो गई। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि अगर उनकी जमीन छीनी गई तो वे आंदोलन तेज करेंगे। सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो के बाद वन विभाग और प्रशासन की कार्यशैली पर सवाल खड़े हो गए हैं। इस मामले की उच्च स्तर पर जांच की मांग तेज हो गई है।
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