दिग्विजय सिंह 20 अक्टूबर से शुरू करेंगे सनातन स्वाभिमान यात्रा, महाकाल की नगरी से अयोध्या तक निकालेंगे पदयात्रा

Amresh Kushwaha | Sept 30, 2026, 10:31 IST
पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह की सनातन स्वाभिमान यात्रा
मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह एक लंबी पदयात्रा पर निकलने वाले हैं। वे 20 अक्टूबर को दशहरे के दिन उज्जैन के महाकालेश्वर मंदिर से यात्रा की शुरुआत करेंगे। इस यात्रा का नाम सनातन स्वाभिमान यात्रा रखा गया है। यह यात्रा अयोध्या के राम मंदिर पहुंचकर खत्म होगी। जानें दिग्विजय सिंह ने यात्रा को लेकर क्या कहा है...
<p>Former Chief Minister of Madhya Pradesh Digvijaya Singh will launch the Sanatan Swabhiman Yatra on October 20. This foot march will proceed from the Mahakaleshwar Temple in Ujjain to the Ram Temple in Ayodhya.</p>

पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने मंगलवार, 29 सितंबर को सनातन स्वाभिमान यात्रा के बारे में बयान जारी किया। उन्होंने कहा कि यात्रा धर्म के नाम पर कथित अधर्म के खिलाफ है। इसे उन्होंने जनजागरण यानी लोगों को जगाने वाला अभियान बताया। साथ ही राम मंदिर को लेकर कई गंभीर आरोप भी लगाए।



सनातन स्वाभिमान यात्रा कब शुरू होगी?

सनातन स्वाभिमान यात्रा की शुरुआत दशहरे के दिन होगी। तारीख 20 अक्टूबर है। दशहरे को बुराई पर अच्छाई की जीत का पर्व माना जाता है। शुरुआत उज्जैन के महाकालेश्वर मंदिर से होगी। वहां से दिग्विजय सिंह अयोध्या की ओर पैदल निकलेंगे। पदयात्रा का मतलब है पैदल चलकर की जाने वाली यात्रा। अयोध्या में राम मंदिर पहुंचकर इसका समापन होगा। सिंह के बयान में रास्ते और दिनों की संख्या नहीं बताई गई है।



पूर्व मुख्यमंत्री ​दिग्विजय सिंह

राम मंदिर के चढ़ावे पर क्या आरोप हैं?

दिग्विजय सिंह के आरोपों की शुरुआत चढ़ावे से होती है। उनका कहना है कि राम मंदिर को नकदी, विदेशी मुद्रा और सोने-चांदी के आभूषण चढ़ावे में मिले। सिंह के मुताबिक इसमें चोरी और हेराफेरी हुई है। यह आरोप उनका अपना है। इस रिपोर्ट में इसकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं दी गई है। उन्होंने इसे यात्रा का बड़ा मुद्दा बताया है।



एसआईटी जांच पर सिंह का दावा

पूर्व मुख्यमंत्री ने राज्य सरकार की एसआईटी (Special Investigation Team) की जांच का हवाला दिया। एसआईटी यानी विशेष जांच दल, जो किसी खास मामले की अलग से जांच करता है। दिग्विजय सिंह के दावे के मुताबिक आरोपियों ने 2 से 3 करोड़ रुपए नकद और आभूषणों की चोरी स्वीकार की है। उन्होंने यह भी दावा किया कि आठ महीने के सीसीटीवी (Closed Circuit Television) फुटेज डिलीट कर दिए गए। सिंह को आशंका है कि चोरी की असली रकम 200 से 300 करोड़ रुपए हो सकती है।



800 करोड़ बनाम 2200 करोड़ का सवाल

पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय ने मंदिर निर्माण के खर्च पर भी सवाल उठाए। रामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट मंदिर निर्माण की देखरेख करने वाला ट्रस्ट है। सिंह के अनुसार ट्रस्ट बनते समय निर्माण की अनुमानित लागत 800 करोड़ रुपए थी। उनका दावा है कि निर्माण 2200 करोड़ रुपए में हुआ। उन्होंने कहा कि श्रद्धालुओं ने 3264 करोड़ रुपए दान दिए। इसके बाद उन्होंने पूछा कि क्या इस पैसे का हिसाब मांगना अधर्म है?



1989 के रामशिला पूजन का जिक्र

पूर्व मुख्यमंत्री ने 1989 के रामशिला पूजन अभियान को भी याद किया। उन्होंने कहा कि विश्व हिंदू परिषद के मुताबिक तब 8.25 करोड़ रुपए जुटे थे। सिंह ने सवाल उठाया कि इस राशि का हिसाब सार्वजनिक नहीं किया गया। यही सवाल उन्होंने चांदी की ईंटों को लेकर भी उठाया। उनके अनुसार इनका ब्योरा भी सामने नहीं आया। सिंह ने इसे भी पारदर्शिता से जोड़कर देखा।



मैंने भी दान दिया, हिसाब पूछना मेरा अधिकार



सिंह ने अपना रुख भी साफ किया। उन्होंने कहा कि वे विश्व हिंदू परिषद और आरएसएस (Rashtriya Swayamsevak Sangh) की विचारधारा का समर्थन नहीं करते। लेकिन वे राम मंदिर निर्माण के पक्ष में रहे हैं। उनके मुताबिक 1989 में और बाद में भी उन्होंने अपनी श्रद्धा के अनुसार योगदान दिया। इसी आधार पर उनका कहना है कि हिसाब पूछना उनका अधिकार है। उन्होंने यह भी कहा कि धर्म उनके लिए आस्था का विषय है। सिंह के शब्दों में धर्म सत्ता के लिए इस्तेमाल की चीज नहीं है।



ठेके, जमीन और प्राण-प्रतिष्ठा पर आरोप

सिंह ने मंदिर निर्माण के ठेकों पर भी आरोप लगाए। उन्होंने दावा किया कि ठेकों में 40 प्रतिशत कमीशन लिया गया। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि दान के पैसे से कर्नाटक में जमीन खरीदी गई। सिंह का दावा है कि ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय ने होटलों और जमीनों की डील की। उनके मुताबिक मंदिर का ध्वज डिजाइन करने वाले व्यक्ति ने इसकी गवाही दी है।



पूर्व राज्यसभा सदस्य सिंह ने एक और आरोप लगाया। उनके मुताबिक भगवान श्रीराम की प्रतिमा की प्राण-प्रतिष्ठा का काम ब्लैकलिस्टेड कंपनियों को सौंपा गया। ब्लैकलिस्टेड यानी जिन कंपनियों को काली सूची में डाला गया हो। सिंह ने यह भी दावा किया कि बिना काम के करोड़ों रुपए के भुगतान कर दिए गए। उन्होंने कहा कि स्थानीय ऑडिट में ये गड़बड़ियां सामने आ चुकी हैं।



यात्रा में किसे न्योता है?

पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने साफ कहा कि यात्रा किसी एक समूह के लिए नहीं है। उनके शब्दों में, मेरी यात्रा में हर वर्ग, पंथ और विचारधारा के लोग सादर आमंत्रित हैं। उन्होंने कहा कि जो लोग आस्था और धार्मिक मूल्यों की रक्षा करना चाहते हैं, वे साथ आ सकते हैं। यानी वे इसे राजनीतिक दल की यात्रा के बजाय आस्था से जुड़ा अभियान बताना चाहते हैं।



आगे क्या होगा?

यात्रा शुरू होने में अब करीब तीन हफ्ते बाकी हैं। तब तक इस पर राजनीतिक बहस तेज होने की संभावना है। इस रिपोर्ट में राम मंदिर ट्रस्ट या किसी अन्य पक्ष का जवाब शामिल नहीं है। ऊपर लिखी सभी बातें सिंह के दावे और आरोप हैं। इनकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। ट्रस्ट या संबंधित पक्ष की ओर से कोई बयान आने पर तस्वीर और साफ होगी।

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