एमपी के पूर्व आईएएस रमेश थेटे नागपुर से गिरफ्तार, कोर्ट ने घोषित किया था फरार, जानें क्या है पूरा मामला

Aman Vaishnav | Oct 29, 2026, 12:37 IST
कोर्ट के नोटिस की अनदेखी और आय से अधिक संपत्ति के मामले में पूर्व IAS अधिकारी रमेश थेटे को पुलिस ने नागपुर से गिरफ्तार कर लिया है।
Former IAS officer Ramesh Thete arrested in Nagpur following non-appearance and disproportionate assets case warrant from Bhopal court
मध्य प्रदेश कैडर के 1993 बैच के पूर्व IAS अधिकारी रमेश थेटे को पुलिस ने महाराष्ट्र के नागपुर से गिरफ्तार किया है। भोपाल की अदालत में जज कल्पना कोतवाल ने उनके खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी किया था। रमेश थेटे के 36 साल के सेवाकाल में 27 उन पर केस दर्ज हुए हैं।

पूर्व आईएएस रमेश थेटे गिरफ्तार

जानकारी के अनुसार कोर्ट की तरफ से उन्हें कई बार नोटिस भेजे गए थे, लेकिन वे किसी भी नोटिस का जवाब नहीं दे रहे थे। साथ ही पेशी से बच रहे थे। इसके बाद अदालत ने कड़ा रुख अपनाया और उन्हें फरार घोषित कर दिया था। आखिरकार पुलिस ने उन्हें नागपुर से गिरफ्तार कर लिया है ताकि उन्हें कोर्ट के सामने पेश किया जा सके।



क्या है आय से अधिक संपत्ति का यह पूरा मामला?

बता दें कि यह पूरा मामला आय से ज्यादा संपत्ति जुटाने का है। लोकायुक्त ने पूर्व IAS रमेश थेटे (Former IAS Ramesh Thete arrested) और उनकी पत्नी मंदा थेटे के खिलाफ केस दर्ज किया था। दोनों ने मिलकर करीब 68 लाख रुपए का बैंक लोन लिया था। जांच में सामने आया कि उन्होंने साल 2012-13 में बहुत कम समय के अंदर पूरा कर्ज चुका दिया था। इसकी शिकायत मिलने के बाद लोकायुक्त ने साल 2013 में जांच शुरू की थी। जांच के दौरान दोनों के कई बैंकों में बड़े लेनदेन का पता चला था। साथ ही, उनके पास तय आमदनी से कहीं ज्यादा संपत्ति मिली थी। रमेश थेटे के 36 साल के सेवाकाल में 27 केस दर्ज हुए हैं, जबकि उन पर कुल 37 केस दर्ज होने की बात भी सामने आई है।



विवादों भरा रहा रमेश थेटे का करियर

रमेश थेटे (IAS Ramesh Thete arrested) 1993 बैच के आईएएस अफसर थे। वे दलित वर्ग से आते हैं और उन्होंने अपने सेवाकाल के दौरान कई बार यह आरोप लगाया कि उनके साथ भेदभाव किया जा रहा है। हालांकि उनका पूरा करियर विवादों से घिरा रहा।



2002 का रिश्वत कांड और बर्खास्तगी

जानकारी के अनुसार साल 2002 में लोकायुक्त की टीम ने थेटे को बैतूल आईटीआई के प्रिंसिपल से 1 लाख रुपए की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों पकड़ा था। इस घटना के बाद साल 2005 में मध्य प्रदेश सरकार ने उन्हें निलंबित कर दिया था। इसके बाद डीओपीटी (DoPT) ने उन्हें सेवा से बर्खास्त कर दिया था। हालांकि थेटे इस फैसले के खिलाफ मध्य प्रदेश हाई कोर्ट चले गए, जहां अदालत ने सरकार के इस आदेश को रद्द कर दिया था।



सीलिंग जमीन का मामला और कैबिनेट की मंजूरी

विवाद यहीं खत्म नहीं हुए। उज्जैन में अपर आयुक्त के पद पर रहते हुए उन्होंने साल 2013 में सीलिंग की सरकारी जमीन को निजी लोगों के नाम कर दिया था। उनके खिलाफ लगे कई गंभीर आरोपों को देखते हुए साल 2015 में राज्य कैबिनेट ने उनके खिलाफ कानूनी मुकदमा चलाने की आधिकारिक मंजूरी दे दी थी।



आईएएस रमेश थेटे के करियर की शुरुआत

बता दें कि रिटायर्ड आईएएस रमेश थेटे के करियर की शुरुआत 1994 में छिंदवाड़ा से हुई थी, जहां उन्हें पहली पोस्टिंग मिली थी। इसके बाद 1996 में वे बड़वानी के एसडीएम बने और फिर 1998 में डेपुटेशन पर महाराष्ट्र चले गए।



इसके बाद साल 1999 में जब रमेश थेटे वापस लौटे, तो उन्हें जबलपुर का नगर निगम कमिश्नर बनाया गया। आगे चलकर 2002 में वे भोपाल में डिप्टी सेक्रेटरी बने और 2011 तक अलग-अलग विभागों में इसी पद पर काम करते रहे।



इसी साल यानी 2011 में आईएएस रमेश थेटे को उज्जैन में एडमिशन कमिश्नर की जिम्मेदारी दी गई। इसके बाद 2013 से वे भोपाल में ही विभिन्न पदों पर सेवाएं देते रहे। हालांकि अपनी पूरी सर्विस के दौरान उन्हें कभी भी किसी जिले का कलेक्टर बनने का मौका नहीं मिला।



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