पूर्व IG महेंद्र सिकरवार से 11 लाख की रिकवरी पर रोक, CAT ने केंद्र और MP सरकार से मांगा जवाब
ऐसे में समझें क्या है पूरा मामला
- पूर्व आईजी डॉ. महेंद्र सिंह सिकरवार से 11.61 लाख रुपए की रिकवरी निकाली गई थी।
- यह राशि वर्ष 2012 में हुए वेतन निर्धारण से जुड़ी बताई गई।
- रिकवरी का आदेश उनकी सेवानिवृत्ति के करीब दो साल बाद जारी हुआ।
- पूर्व आईजी ने केंद्रीय प्रशासनिक अधिकरण में इस आदेश को चुनौती दी।
- CAT ने फिलहाल रिकवरी पर रोक लगाकर सरकार से जवाब मांगा है।
रीवा के पूर्व इंस्पेक्टर जनरल ऑफ पुलिस डॉ. महेंद्र सिंह सिकरवार को बड़ी राहत मिली है। केंद्रीय प्रशासनिक अधिकरण, जबलपुर ने उनके खिलाफ चल रही 11.61 लाख रुपए की रिकवरी पर तत्काल रोक लगा दी है। अधिकरण ने केंद्र सरकार, मध्य प्रदेश शासन और पुलिस अधीक्षक रीवा से जवाब भी तलब किया है।
रिकवरी का आदेश क्यों जारी हुआ
डॉ. महेंद्र सिंह सिकरवार वर्ष 2024 में रीवा रेंज के आईजी पद से सेवानिवृत्त हुए थे। अप्रैल 2026 में पुलिस अधीक्षक, रीवा ने उनके खिलाफ 11,61,885 रुपए की रिकवरी का आदेश जारी किया। आदेश में कहा गया कि यदि राशि जमा नहीं हुई तो आगे कार्रवाई होगी। जरूरत पड़ने पर यह रकम उनकी पेंशन से भी काटी जाएगी।
वेतन विवाद से जुड़ा है पूरा मामला
यह विवाद वर्ष 2012 के वेतन निर्धारण से जुड़ा है। उस समय डॉ. सिकरवार ने देखा कि उनसे जूनियर आईपीएस अधिकारियों को अधिक वेतन मिल रहा है। उन्होंने अपने विभाग के सामने वेतन में समानता की मांग रखी।
उनके आवेदन के बाद वेतन का दोबारा निर्धारण किया गया। इसके बाद उन्हें संशोधित वेतन और बकाया राशि भी दी गई। यह भुगतान विभागीय प्रक्रिया के बाद हुआ था।
पूर्व आईजी ने अदालत में क्या दलील दी
डॉ. सिकरवार ने केंद्रीय प्रशासनिक अधिकरण में कहा कि उन्होंने कभी गलत जानकारी नहीं दी। उन्होंने केवल वेतन विसंगति दूर करने की मांग की थी। विभाग ने जांच के बाद ही उनका वेतन तय किया था।
उन्होंने यह भी कहा कि सेवानिवृत्ति के बाद इस तरह की रिकवरी कानून के अनुरूप नहीं है। खास बात यह भी रखी गई कि वह भारतीय पुलिस सेवा के अधिकारी थे। उनके सेवा संबंधी मामलों का नियोक्ता भारत सरकार का गृह मंत्रालय और कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग है। ऐसे में पुलिस अधीक्षक द्वारा रिकवरी का आदेश जारी करना अधिकार क्षेत्र से बाहर बताया गया।
अदालत ने फिलहाल क्या आदेश दिया
मामले की सुनवाई 4 अगस्त 2026 को केंद्रीय प्रशासनिक अधिकरण, जबलपुर में हुई। अधिकरण ने पहली सुनवाई में ही रिकवरी पर तत्काल रोक लगा दी। साथ ही केंद्र सरकार, मध्य प्रदेश शासन और पुलिस अधीक्षक, रीवा को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। अब मामले की अगली सुनवाई में सरकार अपना पक्ष रखेगी। इसके बाद अधिकरण तय करेगा कि रिकवरी का आदेश वैध था या नहीं।
सेवानिवृत्त कर्मचारियों की रिकवरी पर क्या है कानूनी सवाल
यह मामला केवल एक अधिकारी तक सीमित नहीं है। कई मामलों में अदालतें कह चुकी हैं कि यदि कर्मचारी ने कोई गलत जानकारी नहीं दी और विभाग की गलती से अधिक भुगतान हुआ, तो सेवानिवृत्ति के बाद रिकवरी हर मामले में उचित नहीं मानी जा सकती।
डॉ. सिकरवार की याचिका भी इसी आधार पर रखी गई है। उनका कहना है कि भुगतान विभाग के निर्णय से हुआ था। इसलिए कई साल बाद पूरी राशि वापस मांगना उचित नहीं है।
याचिकाकर्ता की ओर से इन वकीलों ने रखा पक्ष
डॉ. महेंद्र सिंह सिकरवार की ओर से अधिवक्ता पंकज दुबे, अधिवक्ता सोनाली पांडे और अधिवक्ता प्रथमेश पगारे ने केंद्रीय प्रशासनिक अधिकरण में पक्ष रखा।
आगे क्या होगा
अब सभी संबंधित पक्ष अपना जवाब अधिकरण में दाखिल करेंगे। इसके बाद यह तय होगा कि रिकवरी का आदेश जारी रखने का कोई कानूनी आधार है या नहीं। फिलहाल डॉ. महेंद्र सिंह सिकरवार के खिलाफ 11.61 लाख रुपए की रिकवरी पर रोक लागू रहेगी।
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