गांधीसागर अभयारण्य में सीएम मोहन यादव ने छोड़ी मादा चीता, नाम दिया राधा
समझें क्या है पूरा मामला
- गांधीसागर अभयारण्य में नई मादा चीता छोड़ी गई।
- मुख्यमंत्री मोहन यादव ने चीता को बाड़े में छोड़ा।
- राधाष्टमी पर मादा चीता का नाम राधा रखा।
- गांधीसागर में अब कुल चार चीते मौजूद हैं।
- वन विभाग अब चीतों का प्रजनन बढ़ाने का प्रयास करेगा।
मध्य प्रदेश के गांधीसागर अभयारण्य में रविवार को नई मादा चीता छोड़ी गई। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने बोत्सवाना से आई चीता को बाड़े में छोड़ा। राधाष्टमी के मौके पर चीता का नाम राधा रखा गया। अब गांधीसागर में कुल चार चीते हो गए हैं। वन विभाग अब चीतों में प्रजनन बढ़ाने की कोशिश करेगा।
गांधीसागर अभयारण्य में रविवार का दिन खास रहा। सीएम मोहन यादव खुद बाड़े तक पहुंचे। उन्होंने ढाई साल की मादा चीता को आजाद किया। यह चीता बोत्सवाना से लाई गई थी। इसका नाम सीसीबी-2 था। राधाष्टमी के दिन इसे नया नाम राधा दिया गया।
राधा के आने से गांधीसागर में अब दो नर और दो मादा चीते हो गए हैं। यह जगह अब कूनो के बाद देश का दूसरा बड़ा चीता आवास बन रहा है।
पहले कब आए थे चीते
गांधीसागर में चीतों की शुरुआत अप्रैल 2025 में हुई थी। 20 अप्रैल को दो नर चीते प्रभास और पावक छोड़े गए थे। इसके बाद 17 सितंबर 2025 को मादा चीता धीरा को लाया गया। अब राधा के आने से यहां चीतों की कुल संख्या चार हो गई है। फिलहाल सभी चीते अलग-अलग बाड़ों में रखे गए हैं।
प्रजनन की नई कोशिश
धीरा को प्रभास और पावक के साथ मिलाने के कई प्रयास हुए थे। लेकिन अब तक सफलता नहीं मिली। वन विभाग ने कई बार तीनों चीतों को एक साथ छोड़ा।
फिर भी धीरा की तरफ से प्रजनन को लेकर सकारात्मक प्रतिक्रिया नहीं आई। इसी वजह से कूनो से एक और मादा चीता लाने की योजना बनी। राधा को फिलहाल अलग बाड़े में रखा जाएगा। इसके बाद उसे प्रभास और पावक के साथ मिलाने की कोशिश होगी।
64 वर्ग किमी का सुरक्षित घर
गांधीसागर में चीतों के लिए बड़ा और सुरक्षित इलाका तैयार किया गया है। यह करीब 64 वर्ग किलोमीटर में फैला है। यहां सोलर इलेक्ट्रिक फेंसिंग लगाई गई है।
आठ क्वारंटीन बाड़े और दो उपचार बाड़े बनाए गए हैं। हर क्वारंटीन बाड़े का क्षेत्रफल करीब 1500 वर्गमीटर है। फिलहाल प्रभास और पावक 16.5 वर्ग किमी के बाड़े में हैं। धीरा और राधा को 15-15 वर्ग किमी के अलग बाड़ों में रखा गया है।
वन विभाग के कर्मचारियों और वन्यजीव गाइडों को खास प्रशिक्षण दिया गया है। इनका काम चीतों की निगरानी और सुरक्षित प्रबंधन करना है।
अब आगे क्या होगा
मुख्यमंत्री ने कहा कि यह प्रयास वन्यजीव संरक्षण के प्रति मध्य प्रदेश की गंभीरता दिखाता है। उनके मुताबिक प्रदेश में अब 56 से ज्यादा चीते हो चुके हैं।
आने वाले हफ्ते में असम से लाए गए जंगली भैंसे भी गांधीसागर के जंगल में छोड़े जाएंगे। इससे यहां शिकार की उपलब्धता बढ़ेगी। इसका सीधा फायदा चीतों के प्राकृतिक बर्ताव और सेहत को मिलेगा।
FAQ
- गांधीसागर में अब कितने चीते हैं?
गांधीसागर में अब कुल चार चीते हैं। इनमें दो नर और दो मादा शामिल हैं। नई मादा चीता राधा हाल ही में जोड़ी गई है। - चीता राधा कहां से लाई गई है?
चीता राधा को बोत्सवाना से लाया गया है। उसकी उम्र करीब ढाई वर्ष है। मुख्यमंत्री ने राधाष्टमी पर उसका नाम रखा। - गांधीसागर में चीतों के लिए कितना इलाका तैयार है?
चीतों के लिए करीब 64 वर्ग किलोमीटर इलाका तैयार किया गया है। यहां सोलर फेंसिंग और अलग-अलग बाड़े बनाए गए हैं। कुल आठ क्वारंटीन बाड़े मौजूद हैं।
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राधा चीता