गर्भकाल : गंगा नर्मदा क्षिप्रा का जल हो या असर नजरों पर निर्भर

The Sootr | Sept 10, 2024, 10:00 IST
आलोक मेहता
मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने 13 दिसंबर 2023 को मुख्यमंत्री पद की शपथ ली थी। 13 सितंबर 2024 को सरकार के कार्यकाल के 9 माह पूरे हो जाएंगे। कैसा रहा सरकार का गर्भकाल, 9 महीने में कितने कदम चली सरकार, द सूत्र लेकर आया है पूरा एनालिसिस... पढ़िए पद्मश्री पुरस्कार से सम्मानित वरिष्ठ पत्रकार आलोक मेहता का विशेष आलेख

आलोक मेहता @ नई दिल्ली



पौराणिक कथा में भी यह सन्देश रहा है कि जैसी दृष्टि वैसी सृष्टि। इसलिए मध्य प्रदेश में लम्बे अर्से के बाद आए नए नेतृत्व मुख्यमंत्री मोहन यादव के नौ महीने के कार्यकलाप को उदारता और सकारात्मक ढंग से देखना उचित लगता है। फिर केंद्र और प्रदेश के अनुभवी नेताओं के साथ बेहतर संबंधों, सलाह और दो तीन पीढ़ी की जनता की जमीनी समस्याओं को जानने वाले मोहन यादव ने एक नया उत्साह और विश्वास तो पैदा किया है।



https://thesootr.com/state/madhya-pradesh/cm-mohan-yadav-garbhkal-the-sootr-survey-6952867



संभव है एक हद तक दूर बैठे और कुछ सुने पढ़े जाने के कारण मेरी राय से कुछ लोग सहमत न हों, जो लोकतंत्र में सबका अधिकार है। लेकिन मैंने लगभग पांच दशकों में कांग्रेस, जनता पार्टी, फिर भाजपा के कई मुख्यमंत्रियों के कामकाज और राजनीति, प्रशासन, सामाजिक आर्थिक बदलाव को देखा और समझा है। इसलिए यह कह सकता हूं कि कम समय और सीमाओं के बावजूद मुख्यमंत्री मोहन यादव के नेतृत्व में विकास का रथ तेजी से दौड़ता दिख रहा है। गर्भ काल न कहकर यदि नवजात बालक के बहुत जल्दी खिलखिलाने, पाँव चलने और दांत निकलने की प्रक्रिया जैसी तुलना सही होगी।



उन वर्षों में सड़कों की हालत इतनी खराब थी कि भोपाल से उज्जैन कार से जाने पर छह सात घंटे लग जाते थे। इसलिए कुछ वर्षों तक मैंने प्रदेश जाना ही बंद कर दिया था। स्थिति में बदलाव होने पर मैंने आउटलुक के अपने कॉलम में भी इस स्थिति और बदलाव पर लिखा था। इसी तरह सरकारी स्कूलों के शिक्षकों को नाकारा मानकर मात्र 1800 रुपए की मासिक तनख्वाह पर ग्रामीण क्षेत्रों में अस्थाई शिक्षक रखे जाने की प्रवृत्ति का नुकसान हुआ है। इसलिए हर जिले में अच्छे स्कूल, एक आदर्श कॉलेज, शिक्षा संस्थाओं में पुस्तकालयों को महत्व देने की पहल के दूरगामी लाभ समूर्ण समाज को होगा। इसी तरह अस्पतालों का सुधार, बड़ी संख्या में स्वास्थ्यकर्मियों की भर्ती, एयर एम्बुलेंस का प्रावधान लाखों लोगों को लाभान्वित करेगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा शुरू की गई नई शिक्षा नीति, आयुष्मान भारत और कौशल विकास की योजनाओं के क्रियान्वयन में मध्य प्रदेश पहले से कुछ आगे है और मोहन यादव की सरकार, पुराने नए अनुभवी मंत्री, अधिकारी तथा सामाजिक संस्थाएं उन कार्यक्रमों को अधिक सफल बनाकर प्रदेश को सशक्त कर सकती है।



केंद्र में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह की पसंदगी के साथ प्रदेश के नेता भी उनकी सरकार के काम को सफल बनाने में सहयोग देते दिख रहे हैं। चुनौती संसाधनों को जुटाने और अधिकाधिक लोगों को संतुष्ट करने की है और रहेगी। शायद इसीलिए मुख्यमंत्रियों को कम समय में भी प्रशासन में जल्दी-जल्दी बदलाव करने पड़े। वैसे मेरी याददाश्त के हिसाब से शुक्ल, सिंह, कमलनाथ राज के दौरान भी अफसरों के तबादलों या निर्णयों को पलटने के दौर थे। वहीं भ्रष्टाचार पर अंकुश के लिए राष्ट्रीय स्तर से मध्य प्रदेश तक निरंतर निगरानी, कड़ी कार्रवाई, अदालतों से कम समय में सजा के लिए अभियान जरूरी होगा। आंकड़ों के जाल में फंसने के बजाय नेक कल्याणकारी इरादों और सपनों को साकार करने की अपेक्षा के साथ उज्जवल भविष्य के लिए शुभकामनाएं दी जानी चाहिए।



(लेखक देश के वरिष्ठ पत्रकार एवं पद्मश्री से सम्मानित हैं। इस लेख में उनके निजी विचार हैं।)



thesootr links

द सूत्र की खबरें आपको कैसी लगती हैं? Google my Business पर हमें कमेंट के साथ रिव्यू दें। कमेंट करने के लिए इसी लिंक पर क्लिक करें



Tags:
  • सीएम मोहन यादव
  • पूर्व सीएम शिवराज सिंह चौहान
  • दिग्विजय सिंह
  • Madhya Pradesh government
  • मध्य प्रदेश
  • मध्य प्रदेश सरकार
  • Journalist Alok Mehta
  • पत्रकार आलोक मेहता
  • गर्भकाल
  • सीएम मोहन यादव का गर्भकाल
  • द सूत्र गर्भकाल