सहकारिता उपायुक्त और नगर निगम के बीच अटकी हाउसिंग सोसाइटी की अवैध रजिस्ट्री शून्य कराने की कार्रवाई
News in Short
- बाहरी लोगों को नियम विरुद्ध प्लॉट बेंचने पर हाईकोर्ट सख्त
- गौरव हाउसिंग सोसाइटी के 48 प्लॉट की रजिस्ट्री शून्य करने का आदेश
- हाईकोर्ट के आदेश के बाद सहकारिता और नगर निगम आमने- सामने
- जिनकी रजिस्ट्री शून्य की जानी है निगम ने उन पर दे दी निर्माण अनुमति
- सहकारिता उपायुक्त ने पत्र लिखा तो सिटी प्लानर से मांग ली जानकारी
News in Detail
BHOPAL. मध्य प्रदेश में हाउसिंग सोसाइटियों की हेराफेरी थमने का नाम नहीं ले रही है। इन गड़बड़ियों पर कार्रवाई को लेकर जिम्मेदार अधिकारियों का रवैया भी उदासीनता भरा है। स्थिति यह है कि कोर्ट के आदेशों पर भी अधिकारी कार्रवाई में टालमटोल करने से बाज नहीं आ रहे हैं। ताजा मामला भोपाल की गौरव गृह निर्माण सोसायटी की 48 फर्जी रजिस्ट्रियों को शून्य करने का है।
बाहरी लोगों के नाम पर की गई इन रजिस्ट्रियों को शून्य करने का आदेश होने के बाद भी अधिकारी कार्रवाई नहीं कर रहे हैं। रजिस्ट्री शून्य करने के मामले में सहकारिता उपायुक्त और भोपाल नगर निगम के चीफ टाउन प्लानर आमने- सामने आ गए हैं। दोनों ओर से पत्राचार का खेल चल रहा है लेकिन कार्रवाई आगे नहीं बढ़ रही है। ऐसे में अवैध रजिस्ट्री वाले प्लॉट पर निर्माण की कोशिशें शुरू हो गई हैं।
जिम्मेदारों के बीच अटकी कार्रवाई
हाईकोर्ट के आदेश के बाद सहकारिता विभाग द्वारा 48 रजिस्ट्रियां शून्य करने की कार्रवाई शुरू की जानी थी। इससे पहले ही नगर निगम द्वारा निर्माण की अनुमति जारी कर दी गई। यह जानकारी सामने आते ही उपायुक्त कार्यालय ने चीफ सिटी प्लानर को अनुमति निरस्त करने के लिए पत्र लिख दिया।
इस पर कार्रवाई की जगह चीफ सिटी प्लानर ने सहकारिता उपायुक्त से रजिस्ट्रियों की जानकारी मांग ली जिन्हें शून्य किया जाना है। जिम्मेदार अधिकारियों में इस पत्राचार के चलते रजिस्ट्री शून्य करने की कार्रवाई उलझी हुई है।
खींचतान की आड़ में हो रहा निर्माण
रजिस्ट्री शून्य कराने के आदेश के बाद नियम विरुद्ध प्लॉट खरीदने वाले भी सक्रिय हो गए हैं। निगम के चीफ सिटी प्लानर और सहकारिता उपायुक्त के बीच पत्राचार का फायदा उठाने की कोशिशें शुरू हो गई हैं। अवैध रजिस्ट्री को शून्य कराने से पहले इनमें से कुछ प्लॉट पर निर्माण शुरू कर दिया गया है। इसका उद्देश्य बाद में कोर्ट से स्थगन लेने की तैयारी बताई जा रही है। वहीं दो अधिकारियों के बीच उलझी कार्रवाई को लेकर प्रशासन का रवैया भी उदासीनता भरा है।
इधर प्लॉट के लिए भटक रहे सदस्य
गौरव हाउसिंग सोसाइटी का मामला जागरुक सदस्यों की वजह से सामने आया है। दरअसल सोसाइटी के पदाधिकारियों द्वारा बाहरी लोगों और गैर सदस्यों को प्लॉट बेंच दिए गए। इस वजह से संस्था के कुछ सदस्यों को अपने हिस्से के प्लॉट ही नहीं मिले। इस मनमानी को देखते हुए सदस्य विवेक दीक्षित ने हाईकोर्ट की शरण ली थी। दीक्षित की याचिका पर हाईकोर्ट से रजिस्ट्री शून्य कराने का आदेश तो आया है लेकिन अब अधिकारियों की टालमटोल फिर से नया पेंच खड़ा कर रही है।
यह खबरें भी पढ़ें...
अब्दुल रज्जाक की याचिका खारिज, हिरासत को अवैध मानने से हाईकोर्ट का इनकार
एमपी की सबसे खूबसूरत आईपीएस सिमाला प्रसाद बनी लेडी संघम, फिल्मों में दिखाएंगी जल्वा
सीट से गायब हुए सरकारी कर्मचारी तो लगेगी ‘शॉर्ट लीव’, एमपी के ऑफिसों में ‘अटेंडेंस’ की नई व्यवस्था
एमपी में मंत्रियों से वन-टू-वन के बाद फाइल पहुंची दिल्ली, जानें कौन-कौन से मंत्री रहे विवादों में...