अब 400 साल पुराना जगदीशपुर गोंड महल बनेगा हेरिटेज होटल, यहां रुक सकेंगे पर्यटक
मध्य प्रदेश अपनी समृद्ध विरासत (Heritage) और गौरवशाली इतिहास के लिए पूरी दुनिया में मशहूर है। अब इसी ऐतिहासिक कड़ी को आधुनिक पर्यटन से जोड़ने के लिए राज्य सरकार ने एक बड़ा फैसला लिया है।
भोपाल के पास स्थित ऐतिहासिक गोंड महल अब जल्द ही एक आलीशान हेरिटेज होटल के रूप में नजर आएगा। करीब 400 साल पुरानी यह इमारत न केवल अपनी चमक वापस पाएगी, बल्कि देश-दुनिया के सैलानियों के लिए ठहरने का एक शानदा र जरिया भी बनेगी।
विरासत को सहेजने का बड़ा कदम
मध्य प्रदेश पर्यटन विकास निगम इस अनमोल धरोहर को सहेजने और इसके विकास की योजना पर तेजी से काम कर रहा है। निगम फिलहाल एक ऐसे निजी साझेदार की तलाश में है, जो महल की ऐतिहासिक पहचान को बिना नुकसान पहुंचाए इसे विश्वस्तरीय होटल के रूप में संचालित कर सके। इस पहल का मुख्य उद्देश्य गोंड महल के सुंदरीकरण (Beautification) के साथ-साथ इसे पर्यटन के वैश्विक नक्शे पर लाना है।
गोंड और राजपूत कला का बेजोड़ नमूना
भोपाल से महज 15 किलोमीटर दूर बैरसिया रोड पर स्थित जगदीशपुर (पूर्व नाम इस्लाम नगर) का यह महल वास्तुकला प्रेमियों के लिए किसी खजाने से कम नहीं है। लाल बलुआ पत्थरों से बनी यह तीन मंजिला इमारत गोंड और राजपूत स्थापत्य शैली का एक अद्भुत संगम है।
महल के भीतर आज भी प्राचीन हम्माम (भाप स्नान), नक्काशीदार लकड़ी के खंभे, विशाल आंगन और फूलों की आकृतियों वाली जालीदार खिड़कियां मौजूद हैं, जो उस दौर की भव्यता की कहानी सुनाती हैं।
1715 से लेकर आज तक का ऐतिहासिक सफर
जगदीशपुर का नाता 15वीं शताब्दी से रहा है। यहां 1715 तक गोंड राजाओं का शासन था, जिसके बाद भोपाल रियासत के संस्थापक दोस्त मोहम्मद खान ने इस पर अधिकार कर इसका नाम बदलकर इस्लाम नगर कर दिया था।
सालों बाद, 2023 में राज्य सरकार ने ऐतिहासिक गौरव को सम्मान देते हुए इसका नाम वापस जगदीशपुर (इस्लाम नगर का नाम हुआ जगदीशपुर) कर दिया। अब इसी गौरवशाली अतीत को हेरिटेज होटल के रूप में नया जीवन दिया जा रहा है।
भोपाल संभाग की दूसरी बड़ी हेरिटेज परियोजना
गोंड महल, भोपाल संभाग की ऐसी दूसरी ऐतिहासिक इमारत बनने जा रही है जिसे होटल का रूप दिया जा रहा है। इससे पहले सदर मंजिल को होटल में बदला जा चुका है, जबकि मिंटो हॉल को कन्वेंशन सेंटर और मोती महल को म्यूजियम के रूप में विकसित किया गया है।
पर्यटन विशेषज्ञों का मानना है कि इस कदम से स्थानीय रोजगा के अवसर बढ़ेंगे और भोपाल के आसपास ग्रामीण पर्यटन को भी नई दिशा मिलेगी।
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