रिटायरमेंट से पहले होगी एमपी के कर्मचारियों के सर्विस रिकॉर्ड की जांच
समझें क्या है पूरा मामला...
- एमपी सरकार का वित्त विभाग एक विशेष अभियान शुरू करने वाला है।
- इस अभियान के तहत लगभग 38 हजार अधिकारियों के रिकॉर्ड की जांच होगी।
- जांच में देखा जाएगा कि कर्मचारी को नियमों के खिलाफ कोई फायदा तो नहीं पहुंचाया गया।
- इस अभियान का एक मुख्य मकसद कर्मचारियों के पेंडिंग मामलों को जल्दी निपटाना है।
- वित्त विभाग ने अधिकारियों को 6 महीने के भीतर गलतियां सुधारने का अल्टीमेटम दिया है।
सरकारी नौकरी करने वाले कर्मचारियों के लिए एक बहुत जरूरी खबर आई है। राज्य सरकार के वित्त विभाग ने एक बड़ा फैसला लिया है।
विभाग ने कई सरकारी विभागों में काम कर रहे कर्मचारियों के सर्विस रिकॉर्ड और वेतन निर्धारण की जांच करने के आदेश दिए हैं।
इस जांच के दायरे में लगभग 38 हजार कार्यभारित और आकस्मिकता से सैलरी पाने वाले कर्मचारी और अधिकारी आएंगे।
यह जांच कर्मचारियों के रिटायरमेंट से पहले पूरी की जाएगी। इसका सीधा मकसद यह है कि अगर किसी को भी नियमों के खिलाफ जाकर कोई गलत फायदा पहुंचाया गया है, तो उसकी पहचान कर कार्रवाई की जा सके।
इन 5 विभागों में चलेगा विशेष अभियान
सरकार ने पाया है कि सबसे ज्यादा पेंडिंग मामले और गड़बड़ियां कुछ खास विभागों में हैं। इसलिए इस विशेष अभियान को मुख्य रूप से पांच बड़े विभागों में चलाया जाएगा।
- लोक निर्माण विभाग
- लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग
- जल संसाधन विभाग
- नर्मदा घाटी विकास विभाग
- स्कूल शिक्षा विभाग
लंबित मामलों का तुरंत निपटारा
कई बार ऐसा होता है कि कर्मचारियों को समय पर उनका सही वेतन नहीं मिल पाता है। साथ ही प्रमोशन या रिटायरमेंट का लाभ नहीं मिल पाता है।
वित्त विभाग ने माना कि वेतनमान, समयमान वेतनमान, क्रमोन्नति और रिटायरमेंट के बाद मिलने वाला पैसे से ज्यादा विवाद होता है। इन विवादों की वजह से कर्मचारियों को बहुत ज्यादा परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
इन्हीं दिक्कतों को दूर करने के लिए वित्त विभाग ने सभी संबंधित विभागों को निर्देश दिए हैं। विभाग ने कहा है कि वे कर्मचारियों के इन अटके हुए मामलों की तुरंत जांच करें और उनका जल्द से जल्द निपटारा करें।
अधिकारियों की तय होगी जिम्मेदारी
वित्त विभाग ने साफ कर दिया है कि इस काम में किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। तय समय के अंदर कार्रवाई नहीं की गई तो जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाएगी।
साथ ही उन पर एक्शन हो सकता है। विभागों को इस अभियान की प्रोग्रेस रिपोर्ट भी वित्त विभाग को भेजनी होगी।
6 महीने में ठीक करनी होंगी सर्विस बुक
वित्त विभाग ने सभी आहरण एवं संवितरण अधिकारियों और विभागाध्यक्षों को भी सख्त निर्देश दिए हैं। उन्हें साफ कहा गया है कि वे कर्मचारियों की सर्विस बुक को अच्छे से चेक करें।
उसमें कोई गलती मिलती है तो उसे तुरंत सुधारा जाए। किसी मामले में पहले से मंजूरी लेने की जरूरत हो तो वह प्रक्रिया भी पूरी की जाए। इस पूरे काम को पूरा करने के लिए सरकार ने 6 महीने का समय तय किया है।
इस विशेष अभियान में क्या-क्या काम होगा?
| क्रम संख्या | मुख्य काम | विवरण |
| 1. | वेतन निर्धारण | रिटायर्ड और अभी नौकरी कर रहे कर्मचारियों की सैलरी कैलकुलेशन की जांच। |
| 2. | समयमान और क्रमोन्नति | कर्मचारियों को मिलने वाले समयमान और क्रमोन्नति वेतनमान की समीक्षा। |
| 3. | गलतियों में सुधार | सर्विस बुक को चेक करके उसमें दिख रही गलतियों को ठीक करना। |
| 4. | वित्तीय लाभों की समीक्षा | कर्मचारियों को मिले अन्य सभी आर्थिक फायदों की नियम अनुसार जांच। |
FAQ
- एमपी सरकार किन कर्मचारियों के सर्विस रिकॉर्ड और वेतन निर्धारण की जांच करवा रही है?
एमपी सरकार मुख्य रूप से लोक निर्माण विभाग, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग, जल संसाधन विभाग, नर्मदा घाटी विकास विभाग और स्कूल शिक्षा विभाग में काम करने वाले करीब 38 हजार कार्यभारित और आकस्मिकता से वेतन पाने वाले कर्मचारियों के साथ-साथ अन्य अधिकारियों के सर्विस रिकॉर्ड और वेतन निर्धारण की जांच करवा रही है।
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