एमपी के सरकारी स्कूलों पर संकट? भोपाल में Gen Z, Gen Alpha हुए एकजुट
समझें क्या है पूरा मामला
- भोपाल के नीलम पार्क में बड़ा कन्वेंशन आयोजित हुआ।
- इसमें 36 जिलों से लोग शामिल हुए।
- छात्रों, शिक्षकों और अभिभावकों ने भाग लिया।
- सरकारी स्कूल बंद करने का विरोध किया गया।
- स्कूल मरम्मत और TET नियम हटाने की मांग उठी।
मध्यप्रदेश में सरकारी स्कूलों को बचाने की मांग तेज हो गई है। भोपाल के नीलम पार्क में स्कूल बचाओ संघर्ष समिति के बैनर तले बड़ा कन्वेंशन आयोजित किया गया। इसमें 36 जिलों से Gen-Z, Gen Alpha, शिक्षक और अभिभावक शामिल हुए। प्रदर्शनकारियों ने स्कूल बंद करने की नीति रोकने और शिक्षा व्यवस्था सुधारने की मांग की।
भोपाल में जुटा बड़ा जनसमूह
23 अगस्त को भोपाल के नीलम पार्क में एक विशाल जनसभा हुई। मध्यप्रदेश के 36 जिलों से छात्र, शिक्षक और अभिभावक यहां पहुंचे। यह आयोजन स्कूल बचाओ संघर्ष समिति ने कराया।
कन्वेंशन में मुख्य रूप से सरकारी स्कूलों को बंद किए जाने का विरोध हुआ। इसके साथ ही जर्जर स्कूलों की मरम्मत और जरूरी सुविधाओं की मांग भी उठी। लोगों ने TET की अनिवार्यता हटाने की भी मांग रखी।
संयोजक बोले, बजट में हो रही कटौती
स्कूल बचाओ संघर्ष समिति के प्रदेश संयोजक मुदित भटनागर ने कन्वेंशन को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि सरकार लगातार सार्वजनिक शिक्षण संस्थानों की उपेक्षा कर रही है।
उनके मुताबिक सरकारी स्कूलों के बजट में लगातार कटौती हो रही है। इस वजह से कई स्कूलों की सालों से मरम्मत नहीं हुई। बारिश में छतों से पानी टपकने और दीवारें गिरने की घटनाएं आम हो गई हैं।
उज्जैन में स्कूल बचाने का आंदोलन
संघर्ष समिति के उज्जैन प्रभारी एडवोकेट जितेन्द्र सेंगर ने अपने जिले का अनुभव साझा किया। उन्होंने बताया कि क्लोजर और मर्जर नीति के तहत उज्जैन के 11 स्कूलों को बंद करने की कोशिश हुई थी।
इसके खिलाफ उज्जैन में जोरदार आंदोलन हुआ। शहर से 15 किलोमीटर दूर दाऊदखेड़ी गांव के सांदीपनी स्कूल में कन्या विद्यालय के मर्जर का विरोध हुआ। इसके बाद प्रशासन को छात्रों की मांग के आगे झुकना पड़ा।
उन्होंने बताया कि अशोकनगर, गुना, देवास और इंदौर जैसे जिलों में भी समिति ने आंदोलन चलाकर स्कूलों को बंद होने से बचाया। उनके मुताबिक अब हर जिले में इसी तरह के आंदोलन की जरूरत है। उन्होंने साफ कहा कि किसी भी योजना की आड़ में किसी स्कूल को बंद नहीं किया जाना चाहिए।
आंकड़ों से जताई चिंता
डॉ. रामावतार शर्मा ने कन्वेंशन में UDISE (UDISE – Unified District Information System for Education) के आंकड़े रखे। उन्होंने बताया कि बीते दस साल में देशभर में 94 हजार सरकारी स्कूल बंद हुए हैं।
इनमें सबसे ज्यादा करीब 30 हजार स्कूल अकेले मध्यप्रदेश में बंद किए गए। उनके मुताबिक इससे प्रदेश के छात्र शिक्षा से दूर हो रहे हैं। पिछले कुछ सालों में 12 लाख से ज्यादा बच्चों का ड्रॉपआउट हुआ है। दूर स्कूलों के चलते कई बच्चों की पढ़ाई भी छूट रही है।
शिक्षकों की संख्या घटाने का विरोध
कन्वेंशन में TET परीक्षा को लेकर भी चिंता जताई गई। वक्ताओं ने कहा कि इसकी आड़ में सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की संख्या घटाई जा रही है।
नई भर्तियां करने के बजाय शिक्षकों की संख्या कम करने की कोशिश हो रही है। इसके साथ ही परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं की भी निंदा हुई। लोगों ने स्वच्छ और पारदर्शी परीक्षा प्रणाली लागू करने की मांग रखी।
कई संगठनों ने दिया समर्थन
कन्वेंशन को शिक्षक परमानंद डहेरिया, केंद्रीय कर्मचारी नेता यशवंत पुरोहित और समाजसेवी शशिभूषण यादव ने भी संबोधित किया। इसके अलावा शिक्षा बचाओ समिति के सुरेन्द्र रघुवंशी और समाजसेविका माया विश्वकर्मा ने भी अपनी बात रखी। कई जिलों से आए छात्रों ने भी मंच से अपने विचार रखे। सभी वक्ताओं ने स्कूल बचाओ संघर्ष समिति की मांगों का समर्थन किया।
क्या हैं प्रमुख मांगें
कन्वेंशन में तीन बड़ी मांगें रखी गईं। पहली मांग सरकारी स्कूलों को बंद करने पर तुरंत रोक लगाने की थी। दूसरी मांग जर्जर स्कूलों की मरम्मत के लिए बजट जारी करने की थी। तीसरी मांग स्कूलों में जरूरी बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराने की थी।
FAQ
- मध्यप्रदेश में कितने सरकारी स्कूल बंद हुए हैं?
डॉ. रामावतार शर्मा के मुताबिक बीते दस साल में मध्यप्रदेश में करीब 30 हजार सरकारी स्कूल बंद हुए हैं। यह देशभर में बंद हुए 94 हजार स्कूलों में सबसे बड़ी संख्या है। इससे लाखों छात्रों की पढ़ाई प्रभावित हुई है। - कन्वेंशन में मुख्य मांगें क्या थीं?
मुख्य मांग सरकारी स्कूलों को बंद करने पर रोक लगाने की थी। इसके अलावा जर्जर स्कूलों की मरम्मत के लिए बजट देने की मांग रखी गई। साथ ही TET की अनिवार्यता हटाने की भी मांग उठी।
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