एमपी में सरकारी खजाने में बड़ा खेल! 66 तरह की गड़बड़ियां उजागर, स्कूटी से लेकर विवाह योजना तक में नियमों की अनदेखी
किन योजनाओं के पैसों में हुआ खेल?
जांच रिपोर्ट बताती है कि आम जनता से जुड़ी कई जरूरी योजनाओं के पैसे बांटने में गड़बड़ी की गई है। इनमें ये मुख्य योजनाएं शामिल हैं...
- मुख्यमंत्री स्कूटी योजना (Mukhyamantri Scooty Scheme): इसके तहत होने वाले भुगतानों में नियमों को अनदेखा किया गया है।
- मुख्यमंत्री कल्याणी विवाह सहायता स्कीम (Kalyani Vivah Sahayata Scheme): इस योजना के फंड ट्रांसफर में भी भारी लापरवाही सामने आई है।
- मुख्यमंत्री कन्या विवाह/निकाह योजना (Kanya Vivah/Nikah Scheme): गरीब बेटियों के विवाह के लिए मिलने वाली सहायता राशि के वितरण में भी खामियां मिलीं है।
इसके अलावा, अखिल भारतीय सेवा के बड़े अफसरों को मिलने वाले अवकाश यात्रा रियायत यानी एलटीसी (LTC) में तय सीमा से अधिक पैसे दे दिए गए। रिजर्व बैंक का साफ नियम है कि अधिकारी-कर्मचारी की दो पासबुक होनी चाहिए। कई जगहों पर इस नियम को भी नजरअंदाज कर दिया गया।
मुआवजे और बैंक खातों में हेरफेर
ट्रेजरी से पैसे निकालने के तरीकों में सीधे तौर पर नियमों की धज्जियां उड़ाई गईं।
- एक खाते में कई नाम: जांच में पता चला कि एक ही बैंक खाते में अलग-अलग नामों से पैसे भेजे गए। वहीं कई मामलों में एक ही व्यक्ति के अलग-अलग बैंक खातों में भी पैसे ट्रांसफर किए गए।
- सिक्योरिटी डिपॉजिट और फंड ट्रांसफर: एक कंस्ट्रक्शन एजेंसी को 8.35 करोड़ रुपए की सुरक्षा निधि लौटाने में नियमों का उल्लंघन हुआ। पुराने अटके मामलों का 1.45 करोड़ रुपया ट्रेजरी से धार जिला पंचायत की ग्रामीण विकास निधि के खाते में डाल दिया गया।
- आपदा का मुआवजा: कई जिलों में बाढ़, प्राकृतिक आपदा और सांप काटने से हुई मौतों के मामलों में मिलने वाले मुआवजे के वितरण में भी भारी गड़बड़ी की गई।
पेंशन, टैक्स और बिलों के भुगतान में भारी लापरवाही
जांच दल को सिर्फ योजनाओं में ही नहीं, बल्कि दफ्तरों के अंदरूनी खर्चों और टैक्स में भी कई कमियां मिली हैं।
- पेंशन और बीमा में चूक: नेशनल पेंशन स्कीम (NPS) के तहत सरकार का 14% अंशदान कटना था, लेकिन उसे कम काटा गया। 1 जनवरी 2005 और उसके बाद भर्ती हुए कर्मचारियों की पेंशन व्यवस्था में भी नियम तोड़े गए। समूह बीमा का पैसा एनपीएस फंड से निकाल कर दे दिया गया।
- टैक्स और जीएसटी का अंतर: जीएसटी (GST) से मिली रकम और आरबीआई (RBI) में जमा कराई गई रकम के आंकड़ों में फर्क मिला है। ठेकेदारों को बिल देते समय इनकम टैक्स और जीएसटी की जरूरी कटौती नहीं की गई।
- बिना इजाजत खाते और खरीदारी: वित्त विभाग की मंजूरी लिए बिना एक से ज्यादा पर्सनल डिपॉजिट खाते खोले गए। तय सीमा से ज्यादा स्टांप जमा करके रखे गए। विभागाध्यक्ष (HOD) को बताए बिना मनमर्जी से सामान खरीदा गया और टेंडर में घालमेल करके गाड़ियां किराए पर ली गईं।
- दोहरा भुगतान: एक ही बिजली बिल का दो-दो बार भुगतान कर दिया गया। साथ ही सामान्य भविष्य निधि और विभागीय भविष्य निधि के एक ही लेटर पर दो बार पैसे निकाल लिए गए।
सॉफ्टवेयर की खामियां और कैग को रिपोर्ट
जानकारी के अनुसार ट्रेजरी डायरेक्टर राजीव सक्सेना ने सभी जिलों की ट्रेजरी को इन सभी गड़बड़ियों की जानकारी भेज दी है। इसके साथ ही पूरी रिपोर्ट नियंत्रक एवं महालेखापरीक्षक यानी कैग (CAG) को भी सौंप दी गई है। जांच में यह बात भी सामने आई है कि ट्रेजरी के कंप्यूटर सॉफ्टवेयर में कई तकनीकी कमियां थीं। इनका फायदा उठाकर या लापरवाही के कारण ये गड़बड़ियां हुईं। अब इन कमियों को ठीक किया जा रहा है।