गोविंद सिंह राजपूत की संपत्ति विवाद याचिका पर हाईकोर्ट का फैसला सुरक्षित
समझें क्या है पूरा मामला...
- मंत्री गोविंद सिंह राजपूत पर चुनावी शपथ पत्र में संपत्ति की जानकारी छिपाने का आरोप है।
- याचिकाकर्ता ने मंत्री और उनके परिवार के पास 100 करोड़ से ज्यादा की संपत्ति होने का दावा किया है।
- जबलपुर हाईकोर्ट की डिविजन बेंच ने इस रिट याचिका पर दोनों पक्षों की लंबी दलीलें सुनी हैं।
- अदालत ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है।
- यह हाई-प्रोफाइल मामला मध्य प्रदेश की राजनीति और प्रशासनिक गलियारों में चर्चा का विषय बना हुआ है।
मंत्री गोविंद सिंह को मिलेगी राहत या बढ़ेंगी मुश्किलें
सागर जिले की सुरखी विधानसभा सीट से विधायक और राज्य सरकार के कैबिनेट मंत्री गोविंद सिंह राजपूत इन दिनों अपने 2023 के नामांकन पत्र को लेकर चर्चा में हैं।
अभी बीते दिनों ही उन्हें हाई कोर्ट से एक मामले में राहत मिली थी। अब नामांकन पत्र में अपनी अचल संपत्ति को छुपाने के आरोपों में हाईकोर्ट में फिर सुनवाई हुई है। सुनवाई के बाद कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रख लिया है।
चुनाव शपथ पत्र में संपत्ति छिपाने का आरोप
बता दें कि यह पूरा मामला साल 2023 के विधानसभा चुनाव के दौरान दाखिल किए गए दस्तावेजों से जुड़ा हुआ है। आरोप है कि मंत्री ने अपने नामांकन के साथ जो फॉर्म 26 का शपथ पत्र दिया था, उसमें पूरी सच्चाई नहीं थी। उन्होंने अपनी और अपने परिवार की कई अहम संपत्तियों की जानकारी जानबूझकर छिपाई थी।
सौ करोड़ से ज्यादा की अचल संपत्ति का दावा
याचिकाकर्ता राजकुमार सिंह ठाकुर ने इस मामले को लेकर अदालत में बड़े खुलासे किए हैं। उनके मुताबिक मंत्री और उनकी पत्नी के पास कई बेशकीमती जमीनें और भूखंड मौजूद हैं। इन सभी छिपाई गई संपत्तियों का कुल बाजार मूल्य सौ करोड़ रुपए से भी अधिक बताया गया है।
याचिका में 45 संपत्तियों की लंबी सूची शामिल
कोर्ट के सामने पेश की गई इस याचिका में कुल पैंतालीस संपत्तियों और खसरों का पूरा ब्योरा दिया गया है। इसमें कई ग्रामीण और अर्ध-शहरी इलाकों की कृषि जमीनें शामिल हैं।
इसके अलावा ज्ञानवीर सेवा समिति के नाम पर भी भारी मात्रा में जमीन दर्ज होने की बात सामने आई है। हालांकि इसमें से 37 जमीनों पर गोविंद सिंह की ओर से यह बताया गया कि यह प्रॉपर्टी उनकी नहीं है।
हाईकोर्ट में हुई तीखी कानूनी बहस
इस मामले पर जबलपुर हाईकोर्ट की मुख्यपीठ में सुनवाई पूरी हो चुकी है। एक्टिंग चीफ जस्टिस विवेक रूसिया की डिविजनल बेंच ने इस केस की सभी तथ्यों को ध्यान से देखा है। सुनवाई के दौरान दोनों पक्षों के वकीलों ने कोर्ट के सामने अपनी अपनी मजबूत दलीलें पेश कीं।
याचिकाकर्ता ने नियमों का दिया हवाला
याचिकाकर्ता के वकील ने अदालत को बताया कि उन्होंने चुनाव आयोग के नियमों के तहत पूरी छानबीन की थी। आरटीआई से मिले पुख्ता दस्तावेजों के आधार पर ही इस कानूनी लड़ाई को आगे बढ़ाया गया है। उनका कहना है कि चुनावी हलफनामे में जानकारी छिपाना एक बड़ा अपराध है।
संपत्तियों पर दी गई कोर्ट में सफाई
मंत्री गोविंद सिंह की ओर से अधिवक्ताओं ने कोर्ट को बताया कि शिकायत में जिन प्रॉपर्टी की लिस्ट दी गई है। उसमें से क्रमांक 7 से लेकर 45 तक की जमीन समिति के नाम पर है जिसके अध्यक्ष गोविंद सिंह है।
अधिवक्ताओं ने बताया कि यह उनकी निजी जमीन नहीं है। इसके साथ ही गोविंद सिंह के भतीजे की ओर से अधिवक्ता ने बताया कि शिकायत में दी गई प्रॉपर्टी क्रमांक एक गोविंद सिंह की नहीं बल्कि उनकी है।
मंत्री के वकीलों ने याचिका को बताया गलत
दूसरी तरफ मंत्री गोविंद सिंह राजपूत के वकीलों ने इन सभी आरोपों को सिरे से खारिज किया है। उनका तर्क है कि इस तरह के मामलों में सीधे रिट याचिका दाखिल करना नियमों के खिलाफ है। चुनावी विवादों के समाधान के लिए कानून में एक अलग प्रक्रिया तय की गई है।
कोर्ट ने मामले में फैसला सुरक्षित रखा
अदालत ने दोनों पक्षों की विस्तृत और लंबी दलीलें बहुत ध्यान से सुनी हैं। सभी पक्षों को सुनने के बाद हाईकोर्ट ने इस मामले पर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है। अब प्रदेशभर की राजनीतिक और कानूनी बिरादरी की निगाहें अदालत के अगले आदेश पर टिकी हैं।
कानूनी विशेषज्ञ बता रहे राहत का आसार
इस मामले में कानूनी विशेषज्ञों का मानना है, कि जिस तरह एक और रिट पिटीशन को हाईकोर्ट ने खारिज करते हुए इलेक्शन पिटिशन का रास्ता बताया था।
इस तरह आखिरी फैसले में यह याचिका भी खारिज की जाएगी और याचिकाकर्ता के पास इलेक्शन पिटिशन दायर करने का रास्ता बचेगा।
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