मैं बोलूंगी तो मुंह नहीं दिखा पाओगे, रीवा में भाजपा विधायक पर बरसी महिला नपाध्यक्ष
रीवा जिले के गुढ़ नगर परिषद में अध्यक्ष के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव आया है। अध्यक्ष डॉ. अर्चना सिंह ने इसके पीछे भाजपा विधायक नागेंद्र सिंह का हाथ बताया है। उन्होंने कहा कि विधायक ने पार्षदों को बुलाकर पूरी योजना बनाई। विधायक नागेंद्र सिंह ने आरोपों को सिरे से नकारा है। उन्होंने कहा कि बिना सबूत कुछ नहीं कहा जा सकता।
विवाद की शुरुआत
गुढ़ नगर परिषद में अविश्वास प्रस्ताव को लेकर विवाद गहरा गया है। अध्यक्ष अर्चना सिंह ने मीडिया के सामने खुलकर बात रखी। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव राजनीतिक साजिश का हिस्सा है। उनके मुताबिक इसके पीछे विधायक नागेंद्र सिंह की सीधी भूमिका है।
अर्चना सिंह ने दावा किया कि विधायक ने पार्षदों को अपने घर बुलाया था। वहीं अविश्वास प्रस्ताव की पूरी रणनीति तैयार हुई। उन्होंने यह भी कहा कि अब उन्हें लगातार धमकियां मिल रही हैं। डॉ.अर्चना सिंह ने चेतावनी दी कि अगर विधायक ने सीमा पार की तो वे सच सामने ला देंगी।
यह मामला इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि दोनों एक ही पार्टी से हैं। भाजपा की एक नेता ने अपनी ही पार्टी के विधायक पर सार्वजनिक रूप से आरोप लगाए हैं। स्थानीय राजनीति में यह बड़ी घटना मानी जा रही है।
चार बार अविश्वास, अब स्थगन
अर्चना सिंह के मुताबिक पिछले चार वर्षों में उनके खिलाफ यह चौथा अविश्वास प्रस्ताव है। हर बार यह प्रस्ताव सफल नहीं हो पाया। इस बार भी उन्हें राहत मिली है।
हाईकोर्ट की डबल बेंच से उन्हें स्थगन आदेश मिला है। इससे फिलहाल प्रस्ताव पर रोक लग गई है। डॉ. अर्चना सिंह का आरोप है कि कुछ पार्षद निजी स्वार्थ के चलते उनके खिलाफ लामबंद हैं। उनके अनुसार इन पार्षदों के काम पूरे न होने पर यह रवैया अपनाया गया।
बजट अटका, विकास प्रभावित
अध्यक्ष ने पार्षदों पर भी गंभीर आरोप लगाए। उनका कहना है कि 13 पार्षदों ने लगातार दो वित्तीय वर्षों तक बजट पास नहीं होने दिया। इससे नगर परिषद के विकास कार्य रुक गए।
नामांतरण जैसे जनहित से जुड़े कई प्रस्ताव भी लंबित पड़े हैं। डॉ. अर्चना सिंह का कहना है कि यह सब जानबूझकर किया जा रहा है। दिलचस्प बात यह है कि अर्चना को अध्यक्ष बनाने में खुद विधायक की बड़ी भूमिका रही थी। नाराज पार्षदों को मनाकर उन्हें ही अध्यक्ष बनवाया गया था।
विधायक निधि तक नहीं मिली
अर्चना सिंह ने बताया कि नगर परिषद को विधायक निधि से एक भी रुपया नहीं मिला। डीएमएफ (DMF – District Mineral Foundation) सहित अन्य योजनाओं की राशि भी रोक दी गई। उन्होंने कहा कि क्षेत्रीय अधिकारी भी उनका फोन नहीं उठाते।
नपाध्यक्ष ने यह भी स्वीकार किया कि चुनाव के दौरान जनता से कई वादे किए गए थे। वे पूरे नहीं हो सके। इसके लिए उन्होंने जनता से माफी भी मांगी।
परिवार को प्रताड़ित करने का आरोप
अध्यक्ष ने कहा कि विधायक के करीबी लोगों ने उन्हें और उनके परिवार को परेशान करने की कोशिश की है। उनका कहना है कि भविष्य में कोई नुकसान हुआ तो इसके जिम्मेदार विधायक और उनके करीबी होंगे।
उन्होंने चेतावनी दी कि उत्पीड़न जारी रहा तो वे अपने पास मौजूद तथ्य और सबूत सार्वजनिक कर देंगी।
विधायक का पलटवार
भाजपा विधायक नागेंद्र सिंह ने इन आरोपों पर सधी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि कहने भर से कुछ साबित नहीं होता, सबूत जरूरी है। उनके मुताबिक राजनीति में इस तरह के आरोप आम बात है।
विधायक ने कहा कि अगर कोई दस्तावेजी सबूत सामने आता है तो वे जवाब देंगे। उन्होंने पूरे विवाद को राजनीतिक स्टंट करार दिया।
पति का लोकायुक्त मामला भी जुड़ा
अर्चना सिंह ने अपने पति डॉ. कल्याण सिंह के खिलाफ हुई लोकायुक्त कार्रवाई का जिक्र भी किया। उन्होंने इसे भी राजनीतिक साजिश बताया।
उनका दावा है कि शिकायतकर्ता का कोई काम लंबित नहीं था। धन मांगे जाने का भी कोई स्पष्ट सबूत नहीं है। इस मामले में उन्होंने न्यायालय का रुख किया है। अर्चना के मुताबिक इसके पीछे विधायक के करीबी बाबूलाल यादव और कुछ अन्य भाजपा नेताओं का हाथ है।
उन्होंने तहसीलदार के ट्रैप मामले का उदाहरण भी दिया। अर्चना ने सवाल उठाया कि जब उस मामले में बचाव हो सकता है तो उनके पति के मामले में यह सुविधा क्यों नहीं मिली।
गुढ़ नगर परिषद का यह विवाद अब सिर्फ स्थानीय राजनीति तक सीमित नहीं रहा। जिले की भाजपा इकाई पर भी इसका असर पड़ सकता है। आने वाले दिनों में हाईकोर्ट के फैसले पर सबकी नजर रहेगी।
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