अतिथि विद्वानों ने मंत्री के बंगले पर डाला डेरा, फॉलन आउट नियम का विरोध
समझें क्या है पूरा मामला
- अतिथि विद्वान मंत्री इंदर सिंह परमार के बंगले पर धरने पर बैठे हैं।
- वे फॉलन आउट प्रक्रिया तुरंत बंद करने की मांग कर रहे हैं।
- इस नियम से नियमित नियुक्ति पर अतिथि विद्वान हटाए जाते हैं।
- प्रदेश के 4500 अतिथि विद्वानों ने स्थायी नीति मांगी है।
- मांगें नहीं मानी गईं तो संवैधानिक आंदोलन जारी रहेगा।
भोपाल में उच्च शिक्षा मंत्री इंदर सिंह परमार का सरकारी बंगला है। और इस सरकारी बंगले के बाहर, 15 सितंबर से अतिथि विद्वानों ने डेरा डाल दिया है। डेरा जानते हैं क्यों डाला गया है ? डेरा डालने की वजह है फॉलन आउट का नियम, जिसका विरोध हो रहा है।
मामला क्या है ?
दरअसल मध्य प्रदेश के शासकीय महाविद्यालयों में फॉलन आउट का नियम चलता है। नियम कहता है, जब किसी कॉलेज में, किसी विषय के नियमित सहायक प्राध्यापक की नियुक्ति हो, या उसका ट्रांसफर हो, तो वहां काम कर रहे अतिथि विद्वान को सेवा से बाहर कर दिया जाएगा।
इसी को फॉलन आउट कहा जाता है। इसी का विरोध ये अतिथि शिक्षक कर रहे हैं, और भोपाल में उच्च शिक्षा मंत्री इंदर सिंह परमार के बंगले के बाहर धरना दे रहे हैं।
फॉलन आउट रोकने मंत्री से मुलाकात
मध्यप्रदेश के 4500 अतिथि विद्वानों ने इसी प्रक्रिया को रोकने की मांग की है। अतिथि विद्वानों ने कहा है कि 10 जुलाई 2026 को रविंद्र भवन, भोपाल में हुए सम्मेलन में अतिथि विद्वानों की समस्याओं को गंभीरता से स्वीकार करते हुए, मंत्री ने नियमितीकरण, स्थायित्व के संबंध में नीति बनाने का आश्वासन दिया था।
इस दौरान हरियाणा मॉडल से बेहतर नीति बनाने की बात भी कही गई थी। अतिथि विद्वानों ने 11 सितंबर 2023 को, तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की महापंचायत का भी जिक्र ज्ञापन में किया था। उस वक्त भी फॉलन आउट प्रक्रिया बंद करने का भरोसा इन्हें दिया गया था।
मुख्यमंत्री मोहन यादव भी दे चुके आश्वासन
28 अगस्त 2026 को रक्षाबंधन के मौके पर उज्जैन में सीएम मोहन यादव ने भी इन्हें भरोसा दिया था। मुख्यमंत्री ने फॉलन आउट प्रक्रिया रोकने का आश्वासन दिया था। लेकिन अतिथि विद्वानों का आरोप है कि उनकी मांग नहीं मानी जा रही है।
अतिथि विद्वान संघ का कहना है कि अगर उनकी मांग नहीं मानी जाती, तो संवैधानिक तरीके से प्रदर्शन किया जाएगा। अतिथि विद्वानों का आरोप है कि मंत्री ने पहले आश्वासन दिया, और अब उनसे मुलाकात तक नहीं कर रहे हैं। अतिथि विद्वानों का कहना है कि जब तक नियमितीकरण के लिए निश्चित समय सीमा तय नहीं होती। तब तक फॉलन आउट प्रक्रिया बंद की जाएगी।
अतिथि विद्वानों के सामने चुनौती
अतिथि विद्वानों के सामने इस वक्त सबसे बड़ी चुनौती रोजगार की सुरक्षा है। क्योंकि नियमित फैकल्टी के आते ही वो बेरोजगार हो जाते हैं। हालांकि नियम कहता है कि जो अतिथि विद्वान सेवा या राहत का दावा तभी कर सकते हैं जब वो यूजीसी की तरफ से तय योग्यता रखते हों।
इसमें मास्टर्स डिग्री के साथ नेट, सेट या पीएचडी होना अनिवार्य है। अब ये लोग मंत्री इंदर सिंह परमार से मिलना चाहते हैं, लेकिन मंत्री जी अभी तक इनसे मिल नहीं सके हैं। ऐसे में इन अतिथि विद्वानों का आंदोलन भी क्या लंबा चलने वाला है, ये बड़ा सवाल है।
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