जहरीली शराब से गुजरात में दो और मौतें, MP से पकड़ा गया मास्टरमाइंड रईस
समझें क्या है पूरा मामला...
- गुजरात के भावनगर में जहरीली शराब से अब तक 11 लोगों की मौत हो चुकी है।
- गुरुवार को दो और मौतें हुईं, लेकिन प्रशासन ने सिर्फ एक की पुष्टि की है।
- गुजरात पुलिस ने मुख्य आरोपी रईस को मध्यप्रदेश से गिरफ्तार किया है।
- जांच में मुरैना के नरेंद्र यादव उर्फ डॉक्टर की भूमिका सामने आई है।
- जांच में यह भी पता चला कि नरेंद्र की मौत भी उसी जहरीली शराब से हुई।
मौतों का सिलसिला जारी
गुजरात के भावनगर में एमपी की जहरीली शराब पीने से मरने वालों की संख्या 11 हो गई है। गुरुवार को दो और लोगों ने दम तोड़ा। प्रशासन ने अभी इनमें से सिर्फ एक मौत की आधिकारिक पुष्टि की है।
वहीं चार नए मरीज अस्पताल में भर्ती हुए हैं। इसके अलावा 20 से ज्यादा लोगों का इलाज चल रहा है। स्थिति पर लगातार निगरानी रखी जा रही है।
मुख्य आरोपी रईस भोपाल से गिरफ्तार
गुजरात पुलिस ने इस कांड के मुख्य आरोपी रईस को मध्यप्रदेश से गिरफ्तार कर लिया है। उसकी ससुराल भोपाल के करौंद इलाके में है।
शुरुआती जांच में सामने आया कि रईस पिछले डेढ़ महीने से भावनगर और गुजरात के अलग-अलग हिस्सों में रह रहा था। वहां वह घटिया गुणवत्ता की शराब बना रहा था। अब पुलिस उससे सप्लाई चेन के बारे में पूछताछ कर रही है।
मामले में कुल 21 आरोपी बताए गए हैं। इनमें से अब तक 13 को गिरफ्तार किया जा चुका है। बाकी आरोपियों की तलाश जारी है।
कैसे शुरू हुई इस मामले की शुरुआत
बता दें कि यह पूरा मामला 16 अगस्त की रात शुरू हुआ था। घोघा के खरकड़ी गांव में एक पार्टी रखी गई थी। एक युवक के पुलिस में चयन की खुशी मनाई जा रही थी।
यह पार्टी हरपाल सिंह गोहिल की बाड़ी में हुई थी। पुलिस के अनुसार शराब घनश्याम नाम के तस्कर से ली गई थी। इसे रॉयल स्टैग की बोतलों में परोसा गया था।
पार्टी के कुछ घंटों बाद ही लोगों की तबीयत बिगड़ने लगी। इसके बाद अलग-अलग इलाकों से भी ऐसे ही मामले सामने आने लगे।
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मुरैना का डॉक्टर कैसे फंसा इस जाल में
जांच में मुरैना के नरेंद्र यादव की भूमिका भी सामने आई है। नकली शराब बनाने में उसकी कथित महारत के कारण उसे डॉक्टर कहा जाता था।
पुलिस के मुताबिक रईस ने इसी वजह से नरेंद्र को गुजरात बुलाया था। वहां दोनों भावनगर के शराब तस्कर गौतम सोलंकी के साथ काम कर रहे थे।
आरोप है कि नरेंद्र और उसके साथियों की देखरेख में 25 पेटी जहरीली शराब तैयार हुई। इसी खेप को पीने से कई लोगों की जान गई।
सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि नरेंद्र ने खुद भी यही शराब पी। इससे उसकी भी मौत हो गई। नरेंद्र मुरैना के डोंगरपुर किरार गांव का रहने वाला था।
परिजनों का दावा अलग है। उनका कहना है कि नरेंद्र मजदूरी करता था। वह 15 अगस्त को पहली बार गुजरात गया था। मौत के बाद परिजन बिना सूचना दिए उसका शव मुरैना ले आए।
गुजरात पुलिस ने शव को वापस गुजरात लाने को कहा था। लेकिन परिजनों के विरोध के बाद मुरैना में ही पोस्टमार्टम कराया गया।
पुलिसकर्मियों पर भी गिरी गाज
स्टेट मॉनिटरिंग सेल के एसपी मयूरसिंह चावड़ा के मुताबिक, दो पुलिस इंस्पेक्टर सस्पेंड किए गए हैं। इनमें वरतेज पुलिस स्टेशन के एबी पढेरिया और लोकल क्राइम ब्रांच के मयूरध्वजसिंह सरवैया शामिल हैं।
अब तक कुल 6 पुलिसकर्मियों को निलंबित किया जा चुका है। यह कार्रवाई लापरवाही के आरोपों के बाद हुई है।
एफएसएल जांच में क्या मिला
एफएसएल जांच में बड़ा खुलासा हुआ है। जब्त रॉयल स्टैग शराब के नमूने में 38.59% मेथनॉल पाया गया। जबकि एथेनॉल सिर्फ 0.94% ही मिला।
सामान्य शराब में एथेनॉल होना चाहिए। लेकिन इतनी अधिक मात्रा में मेथनॉल मिलना खतरनाक है। यही मेथनॉल जानलेवा (जहरीली शराब पीने से लोगों की मौत) साबित हुआ।
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