14 करोड़ की ठगी करने वाला आरोपी एमपी से गिरफ्तार, हांगकांग तक फैला है नेटवर्क
समझें क्या है पूरा मामला
- अहमदाबाद पुलिस ने नीलेश पटेल को गिरफ्तार किया।
- आरोपी पर 14.5 करोड़ रुपए ठगी का आरोप है।
- वह बैतूल में पहचान बदलकर रह रहा था।
- पुलिस को 65 बैंक खातों की जानकारी मिली।
- मामले में 20 शेल कंपनियों का नेटवर्क सामने आया।
अहमदाबाद पुलिस ने गुजरात के नीलेश पटेल को गिरफ्तार किया है। उस पर 14.5 करोड़ रुपए की ठगी का आरोप है। वह मध्य प्रदेश के बैतूल में हुलिया बदलकर छिपा था। पुलिस के मुताबिक उसने 65 बैंक खाते और 20 शेल कंपनियां बनाई थीं। इस पूरे नेटवर्क का जुड़ाव हांगकांग से भी बताया जा रहा है।
10 महीने की निगरानी
अहमदाबाद जोन-7 के डीसीपी (DCP – Deputy Commissioner of Police) शिवम शर्मा के मुताबिक, पुलिस पिछले 10 महीने से नीलेश की तलाश कर रही थी। इसके लिए तकनीकी और मानवीय दोनों तरीकों का इस्तेमाल किया गया। आखिरकार गुरुवार को उसे बैतूल से पकड़ा गया। उसके साथी दीपक आहूजा को भी गिरफ्तार किया गया है।
बैतूल में बदला हुलिया
नीलेश पिछले दो साल से बैतूल में रह रहा था। यहां उसने अपनी दाढ़ी हटा ली थी। हुलिया बदलकर वह पहचान छिपाए हुए था। मध्य प्रदेश पुलिस की मदद से ही उसे आखिरकार पकड़ा जा सका।
मुंबई में शेल कंपनियां
अहमदाबाद से भागने के बाद नीलेश मुंबई चला गया था। वहां उसने 'टोशन ग्रुप' के नाम से करीब 20 कंपनियां खड़ी कीं। इनमें से एक कंपनी हांगकांग में भी रजिस्टर्ड बताई गई है। पुलिस का दावा है कि यह पूरा नेटवर्क वहीं से चलाया जा रहा था।
शेयर मार्केट एडवाइजर का स्वांग
नीलेश खुद को शेयर मार्केट एडवाइजर बताता था। वह लग्जरी कार और iPhone से लोगों को प्रभावित करता था। इसी रुतबे का इस्तेमाल कर वह निवेशकों का भरोसा जीतता था।
फर्जी लोन का पूरा खेल
पुलिस के मुताबिक नीलेश फर्जी दस्तावेजों से बैंक लोन लेता था। शक से बचने के लिए शुरुआत में दो-तीन किस्तें चुकाई जाती थीं। इसके बाद वह किस्तें देना बंद कर फरार हो जाता था। एक मामले में 'प्रियंका फैशन्स' के जरिए 90 लाख का लोन लिया गया, जबकि असली मालिक को इसकी भनक तक नहीं थी।
क्रिप्टो और सेमीकंडक्टर स्कैम
नीलेश ने सेमीकंडक्टर प्लांट के नाम पर भी निवेश जुटाया। उसने 'सेमी कॉइन' नाम की क्रिप्टोकरेंसी भी लॉन्च की थी। इसके लिए उत्तर प्रदेश में जमीन भी चिन्हित की गई थी। पुलिस का दावा है कि इस स्कीम से करीब 5 करोड़ रुपए जुटाए गए।
बैंक अफसरों की भूमिका जांच में
जांच में सामने आया कि कुछ बैंक अफसर और प्रॉपर्टी वैल्यूअर्स भी इस खेल में शामिल थे। ये लोग विवादित या फर्जी संपत्तियां चिन्हित करते थे। इसी आधार पर बैंकों से बड़े लोन पास कराए जाते थे। सिंडिकेट से जुड़े एक बैंक मैनेजर को पहले ही गिरफ्तार किया जा चुका है।
बरामद संपत्ति और दर्ज मामले
पुलिस ने दोनों आरोपियों से करीब 35 लाख रुपए की संपत्ति बरामद की है। इसमें कार, लैपटॉप और मोबाइल फोन शामिल हैं। आरोपियों से जुड़े 65 बैंक खाते फ्रीज कर दिए गए हैं। इन खातों में करीब 20 लाख रुपए जमा मिले हैं। नीलेश के खिलाफ क्राइम ब्रांच-3, चिलोड़ा, नरोला और निकोल थानों में भी मामले दर्ज हैं।
आगे की जांच जारी
वासणा पुलिस अब अन्य बैंक मैनेजरों और वैल्यूअर्स की भूमिका भी खंगाल रही है। पूछताछ में नीलेश ने कई ठिकानों की जानकारी दी है। पुलिस यह पता लगा रही है कि सात साल की फरारी में वह कहां-कहां छिपा रहा। साथ ही यह भी जांचा जा रहा है कि उसे किन लोगों ने मदद पहुंचाई।
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