जमीन पर सरकारी अस्पताल, झोपड़ी में रहने को मजबूर मालिक, कलेक्ट्रेट पहुंच नेत्रहीन ने सुनाई दर्दभरी दास्तां

Sanjay Dhiman | May 06, 2026, 16:58 IST
Photograph: (the sootr)
गुना में सरकारी अस्पताल जिस जमीन पर बना है, उसका असली मालिक झोपड़ी में रहने को मजबूर है। नेत्रहीन पप्पू प्रजापति ने जनसुनवाई में न्याय की गुहार लगाई।

मध्य प्रदेश के गुना जिले से एक ऐसी खबर सामने आई है, जिसे सुनकर किसी का भी दिल पसीज जाए। राजनीति में अक्सर 'गरीब कल्याण' के नारे गूंजते हैं। लेकिन जमीनी हकीकत क्या है, यह विजयपुर के रहने वाले एक नेत्रहीन दिव्यांग पप्पू प्रजापति की कहानी बताती है। यह मामला सिर्फ जमीन का नहीं है, बल्कि सिस्टम की उस लापरवाही का है जिसने एक परिवार को दाने-दाने का मोहताज कर दिया।



गुना जिले के विजयपुर से आए एक नेत्रहीन दिव्यांग पप्पू प्रजापति ने मंगलवार को कलेक्ट्रेट में आयोजित जनसुनवाई में अपनी पीड़ा साझा की। पप्पू ने बताया कि उसके पास 1984 में उसके पिता कैलाश नारायण कुम्हार को सर्वे क्रमांक 685/1 पर एक पट्टा मिला था। इस पट्टे पर उसका हक था, लेकिन सरकारी निर्माण के चलते उसकी जमीन पर अब कोई अधिकार नहीं बचा।



पानी की टंकी और सरकारी अस्पताल बना

पप्पू के अनुसार, उसकी जमीन पर अब शासकीय अस्पताल और पानी की टंकी बन चुकी हैं। हालांकि, उस समय मुआवजे की कोई बात नहीं हुई। ना ही उसे कहीं और जमीन आवंटित की गई। पप्पू ने यह आरोप भी लगाया कि जो खाली जमीन बची थी, उस पर गांव के दबंगों ने कब्जा कर लिया। अब यह जमीन उनकी मर्जी से बाड़ा बना कर पशुपालन के लिए उपयोग हो रही है।



बची जमीन पर दबंगों का कब्जा

कहानी यहीं खत्म नहीं होती। पप्पू का आरोप है कि जो थोड़ी बहुत जमीन सरकारी इमारतों से बच गई थी, उस पर गांव के ही दबंगों ने नजर गड़ा ली। दबंगों ने कथित तौर पर साजिश रचकर वह जमीन अपने नाम करवा ली। आज वहां दबंगों के पशु बंधते हैं और बाड़ा बना हुआ है। वहीं दूसरी तरफ, जमीन का असली हकदार, जो देख भी नहीं सकता, वह अपनी बूढ़ी मां के साथ एक कच्ची झोपड़ी में रहने को मजबूर है।



पीड़ित की अपील: 'साहब, न्याय दिला दो'

पप्पू ने भावुक होते हुए कहा, "मैं अंधा हूं, कलेक्ट्रेट आने के लिए मुझे दूसरों का सहारा लेना पड़ता है। पिता के जाने के बाद हम मां के साथ एक झोपड़ी में रह रहे हैं और हाथ पांव जोड़कर जीवन यापन कर रहे हैं।" पप्पू ने कलेक्टर से मांग की है कि प्रशासन उसे या तो उतनी ही जमीन दूसरी जगह आवंटित करे या फिर उस जमीन पर बने सरकारी निर्माण का उचित मुआवजा दिलवाए।



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