एमपी में डायबिटीज से पीड़ित बच्ची को स्कूल से निकाला, पिता ने लगाए गंभीर आरोप, जांच शुरू
गुना के एक निजी स्कूल पर टाइप-1 डायबिटीज (Type-1 Diabetes) से पीड़ित 6 साल की बच्ची को स्कूल से निकालने का आरोप है। बच्ची की बहन को भी साथ में स्कूल से बाहर किया गया है। पिता का आरोप है कि बीमारी की जानकारी देने के बाद स्कूल ने यह कदम उठाया है।
विवाद बढ़ने पर बाल कल्याण समिति (Child Welfare Committee) के अध्यक्ष डॉ. नीरव शर्मा ने जिला शिक्षा अधिकारी को जांच के निर्देश दिए हैं, लेकिन स्कूल प्रबंधन ने सभी आरोपों को बेबुनियाद बताया है।
फूड डिलीवरी बॉय पिता की पीड़ा
गुना में फूड डिलीवरी का काम करने वाले दलीप धार अपनी 6 साल की बेटी की बीमारी से पहले से ही जूझ रहे हैं। बच्ची को टाइप-1 डायबिटीज है। इसके लिए उसे नियमित इंसुलिन (Insulin) और शुगर की जांच की जरूरत होती है। इतनी मुश्किल के बावजूद बच्ची अपनी कक्षा में फर्स्ट आती थी।
पिता दलीप का कहना है कि जब उन्होंने स्कूल प्रबंधन को बच्ची की बीमारी की जानकारी दी, तो पहले सहयोग का आश्वासन मिला। लेकिन उसके बाद स्कूल ने अचानक दोनों बहनों को टीसी (Transfer Certificate) देकर बाहर कर दिया। पेपर खत्म होते ही रिजल्ट वाले दिन यह कदम उठाया गया।
कक्षा में प्रथम थी, फिर भी निकाला
यह मामला इसलिए भी गंभीर है क्योंकि बच्ची पढ़ाई में कमजोर नहीं थी। वह अपनी कक्षा में पहले नंबर पर थी। इसके बावजूद स्कूल ने उसे और उसकी बहन को संस्था से बाहर कर दिया। पिता का आरोप है कि यह सब बीमारी की जानकारी देने के बाद हुआ है।
बाल कल्याण समिति ने लिया संज्ञान
मामले की गंभीरता को देखते हुए बाल कल्याण समिति के अध्यक्ष डॉ. नीरव शर्मा ने स्वयं इस मामले में दखल दिया। उन्होंने जिला शिक्षा अधिकारी को स्कूल के निरीक्षण और जांच के निर्देश दिए हैं। शिक्षा विभाग की जांच में यह देखा जाएगा कि स्कूल की ओर से कोई गलती हुई है या नहीं।
स्कूल प्रबंधन का पक्ष
स्कूल संचालक जॉय वर्गीस ने सभी आरोपों को सिरे से खारिज किया है। उनका कहना है कि बच्ची के पिता लंच टाइम बढ़ाने और सभी विषयों को एक ही टीचर से पढ़ाने की मांग कर रहे थे। उन्हें नोटिस देकर कहा गया था कि, असुविधा होने पर आप टीसी लेकर बच्चियों का एडमिशन कहीं और करा सकते हैं।
जॉय वर्गीस का कहना है कि बच्ची को स्कूल में उपलब्ध सभी सुविधाएं दी गई थीं। उनके मुताबिक शिक्षा विभाग की जांच में स्कूल की कोई गलती सामने नहीं आएगी। स्कूल प्रबंधन का दावा है कि पिता लगातार झूठी शिकायतें कर रहे हैं।
बच्चों के अधिकारों का सवाल
यह मामला सिर्फ एक परिवार की पीड़ा नहीं है। यह उन सभी बच्चों के अधिकारों का सवाल है जो किसी बीमारी या विशेष जरूरत के साथ जी रहे हैं। भारत में शिक्षा का अधिकार अधिनियम (Right to Education Act) किसी भी बच्चे को शिक्षा से वंचित करने की इजाजत नहीं देता। फिलहाल जांच जारी है और उसके नतीजे का इंतजार है।
यह खबर क्यों जरूरी है?
यह खबर बच्चों के मौलिक अधिकारों से सीधे जुड़ी है। भारतीय संविधान के अनुच्छेद 21-A के तहत 6 से 14 साल के हर बच्चे को मुफ्त और अनिवार्य शिक्षा का अधिकार है। किसी बच्चे को बीमारी के आधार पर स्कूल से निकालना न केवल अनैतिक है, बल्कि कानूनन भी गलत हो सकता है।
टाइप-1 डायबिटीज एक गंभीर लेकिन प्रबंधनीय बीमारी है और इससे पीड़ित बच्चे सामान्य जीवन जी सकते हैं। यह खबर समाज को जागरूक करती है कि बीमार बच्चों के साथ भेदभाव बर्दाश्त नहीं किया जाना चाहिए। डिजिटल मीडिया की जिम्मेदारी है कि ऐसे मामलों को सामने लाए ताकि जवाबदेही सुनिश्चित हो सके।
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