CA से 21 करोड़ की ठगी, ड्रीम गर्ल की मीठी बातों का बने शिकार

Amresh Kushwaha | Jul 12, 2026, 08:27 IST
सीनियर CA से 21 करोड़ की ठगी
ग्वालियर में सीनियर सीए अशोक विजयवर्गीय से क्रिप्टो ट्रेडिंग के नाम पर 21.06 करोड़ रुपए की ठगी हुई है। दिव्या नाम की युवती ने व्हाट्सएप पर चैट शुरू कर निवेश सलाहकार बनकर भरोसा जीता और फर्जी पोर्टल पर निवेश कराया था।

समझें क्या है पूरा मामला...

  • ग्वालियर के सीए अशोक विजयवर्गीय से 21 करोड़ रुपए की साइबर ठगी हुई है।
  • ठगों ने खुद को दिव्या नाम की निवेश सलाहकार बताकर संपर्क किया था।
  • क्रिप्टो ट्रेडिंग में मुनाफे का झांसा देकर फर्जी पोर्टल पर निवेश कराया था।
  • शुरुआत में असली मुनाफा देकर भरोसा जीता, फिर टैक्स के नाम पर पैसे मांगे गए।
  • पीड़ित ने 11 जुलाई को एफआईआर दर्ज कराई, पुलिस अब जांच में जुटी है।

हैलो... मैं पूजा बोल रही हूं। आयुष्मान खुराना की फिल्म ड्रीम गर्ल का यह डायलॉग आपको याद होगा। ग्वालियर में भी कुछ ऐसी ही शुरुआत हुई, लेकिन यह फिल्म नहीं थी।



यह 21 करोड़ छह लाख रुपए की साइबर ठगी थी। हैलो, मैं दिव्या बोल रही हूं से शुरू हुई चैटिंग ने एक सीनियर सीए (Chartered Accountant) को करोड़ों का चूना लगा दिया। पीड़ित का नाम अशोक विजयवर्गीय है। वे मध्यप्रदेश चेंबर ऑफ कॉमर्स के मुख्य निर्वाचन अधिकारी भी हैं।



दिव्या नाम से शुरू हुई ठगी

मामला 05 दिसंबर 2025 से जुलाई 2026 के बीच चला। ग्वालियर के रोशनी घर रोड निवासी 70 वर्षीय अशोक विजयवर्गीय के मोबाइल पर एक मैसेज आया था। यह मैसेज +91 8151931249 नंबर से भेजा गया था। मैसेज करने वाली महिला ने खुद को दिव्या नाम से पेश किया था।



उसने खुद को निवेश सलाहकार बताया। कुछ दिन बाद 15 दिसंबर को दूसरे व्हाट्सएप नंबर से बातचीत शुरू हुई। 20 दिसंबर को उसने एक लिंक भेजकर पीड़ित का रजिस्ट्रेशन करा दिया।



महिला ने दावा किया कि यूएसडीटी (US Dollar Tether) क्रिप्टो ट्रेडिंग में कम समय में कई गुना मुनाफा हो सकता है। शुरुआत में भारतीय मोबाइल नंबर से बातचीत हुई। बाद में एक विदेशी नंबर +1 (516) 713-7291 से भी संपर्क होता रहा।



पहले मुनाफा दिखाकर जीता भरोसा

25 दिसंबर 2025 को अशोक विजयवर्गीय ने पहला निवेश किया। यह रकम 1.01 लाख रुपए थी। चार दिन बाद 29 दिसंबर को उन्होंने दोबारा 1.01 लाख रुपए निवेश कर दिए।



7 जनवरी 2026 को ठगों ने असली भरोसा जीतने की चाल चली। उन्होंने 1.88 लाख रुपए वाकई उनके एचडीएफसी बैंक खाते में ट्रांसफर कर दिए। यह रकम मिलते ही पीड़ित को यकीन हो गया कि निवेश सुरक्षित है।



इसके बाद निवेश की रफ्तार तेज हो गई। 31 जनवरी को उन्होंने 15 लाख रुपए का बड़ा निवेश किया। धीरे-धीरे उन्होंने अलग-अलग बैंक खातों में करोड़ों रुपए भेजने शुरू कर दिए। फर्जी ट्रेडिंग पोर्टल पर उनका मुनाफा लगातार बढ़ता हुआ दिखाया जाता रहा।



33 करोड़ का दिखा मुनाफा

20 जून 2026 तक अशोक विजयवर्गीय कुल 21.06 करोड़ रुपए निवेश कर चुके थे। फर्जी पोर्टल पर उनका मुनाफा बढ़कर 33 करोड़ 25 लाख रुपए तक दिखने लगा। यह रकम देखकर वे बेहद खुश थे।



लेकिन जब उन्होंने यह पैसा निकालने की कोशिश की तो 21 जून को भुगतान रोक दिया गया। ठगों ने कहा कि रकम निकालने से पहले 10 करोड़ 84 लाख रुपए इनकम टैक्स के रूप में जमा करने होंगे। यह सुनकर पीड़ित को शक होने लगा।



और पैसे मांगते रहे ठग

पीड़ित को भरोसा दिलाने के लिए ठगों ने नई चाल चली। उन्होंने कहा कि वे अपनी ओर से पांच करोड़ 34 लाख रुपए जमा कर देंगे। बाकी रकम पीड़ित को जमा करनी होगी। इसके बावजूद कोई भुगतान नहीं हुआ।



फिर रिस्क मार्जिन के नाम पर एक करोड़ रुपए और मांगे गए। तभी अशोक विजयवर्गीय को एहसास हुआ कि वे साइबर ठगी का शिकार हो चुके हैं। उन्होंने तुरंत शिकायत की तैयारी शुरू कर दी।



7 जुलाई 2026 को उन्होंने राज्य साइबर सेल, ग्वालियर जोन में शिकायत दर्ज कराई। चार दिन बाद 11 जुलाई को पुलिस ने एफआईआर दर्ज कर ली।



20 बैंक खातों की जांच

पीड़ित ने साइबर सेल को कई अहम सबूत सौंपे हैं। इनमें व्हाट्सएप चैट के स्क्रीनशॉट शामिल हैं। बैंक ट्रांजेक्शन की जानकारी भी दी गई है।



पीड़ित ने 20 से ज्यादा बैंक खातों का पूरा विवरण भी पुलिस को दिया। इन खातों में फेडरल बैंक, आईसीआईसीआई बैंक, केनरा बैंक और यस बैंक जैसे कई बैंक शामिल हैं। अलग-अलग समय पर इन्हीं खातों में रकम ट्रांसफर कराई गई थी।



पुलिस का क्या कहना है

राज्य साइबर सेल के डीएसपी (Deputy Superintendent of Police) संजीव नयन शर्मा ने इस मामले की पुष्टि की। उन्होंने बताया कि सीनियर सीए अशोक विजयवर्गीय से क्रिप्टो ट्रेडिंग के नाम पर 21 करोड़ छह लाख रुपए की ठगी हुई है।



उनके मुताबिक मामले में विभिन्न धाराओं के तहत केस दर्ज कर लिया गया है। ठगों के इस्तेमाल किए गए तीन व्हाट्सएप नंबर की जांच चल रही है। साथ ही 20 बैंक खातों और फर्जी यूआरएल ट्रेडिंग पोर्टल की तकनीकी जांच भी हो रही है। बैंक खातों को फ्रीज कराने और आईपी एड्रेस ट्रैक करने पर टीम काम कर रही है।



एक्सपर्ट की चेतावनी

उत्तर प्रदेश पुलिस के साइबर सिक्योरिटी एडवाइजर राहुल मिश्रा के मुताबिक ऐसे स्कैम में कुछ खास बातें बार-बार दोहराई जाती हैं। ठग अक्सर कहते हैं कि जल्दी निवेश करो, वरना मौका निकल जाएगा। वे यह भी दावा करते हैं कि फेमस सेलिब्रिटीज ने भी इसमें पैसा लगाया है।



राहुल मिश्रा बताते हैं कि स्कैमर 100 प्रतिशत गारंटीड रिटर्न का वादा करते हैं। वे कहते हैं कि कुछ ही दिनों में पैसा दोगुना हो जाएगा। साथ ही यह भी कहते हैं कि किसी को बताना मत, यह सीक्रेट डील है।



उनके मुताबिक फर्जी क्रिप्टो गुरु लोगों पर तुरंत स्कीम लेने का दबाव डालते हैं। वे कानूनी जानकारी को नजरअंदाज करने के लिए उकसाते हैं। फर्जी डोमेन और अधूरी जानकारी किसी भी स्कैम का बड़ा रेड फ्लैग होती है।



निवेश से पहले ये सावधानी

एक्सपर्ट सलाह देते हैं कि क्रिप्टो में निवेश से पहले कुछ बातों का ध्यान रखना जरूरी है। सबसे पहले हमेशा आरबीआई (Reserve Bank Of India) या सेबी (Securities and Exchange Board Of India) द्वारा रेगुलेटेड एक्सचेंज का ही चयन करें। किसी भी अनजान व्यक्ति या वेबसाइट पर भरोसा न करें।



बहुत ज्यादा रिटर्न का दावा करने वालों से दूर रहना चाहिए। अज्ञात प्लेटफॉर्म या एप पर कभी भरोसा न करें। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स या अनजान कॉल्स पर भी भरोसा नहीं करना चाहिए।



किसी भी कॉइन या प्रोजेक्ट में निवेश करने से पहले उसकी टीम की जांच करें। वेबसाइट, डॉक्यूमेंट्स और पिछला रिकॉर्ड जरूर चेक करें। यही सावधानी बड़े नुकसान से बचा सकती है।



FAQ

  1. क्रिप्टो ठगी से कैसे बचा जा सकता है?
    एक्सपर्ट सलाह देते हैं कि हमेशा आरबीआई या सेबी से रेगुलेटेड प्लेटफॉर्म पर ही निवेश करें। बहुत ज्यादा रिटर्न का दावा करने वालों से दूर रहें। अनजान व्यक्ति, वेबसाइट या कॉल पर भरोसा न करें और किसी भी निवेश से पहले पूरी जांच करें।

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