CA से 21 करोड़ की ठगी: फ्रॉड केस लड़ने वाले वकील को कैसे ठगा, जानें पूरी कहानी
समझें क्या है पूरा मामला...
- ग्वालियर में सीए से 21 करोड़ की क्रिप्टो ठगी।
- खुद ठगी पीड़ितों के केस लड़ते थे, खुद बने शिकार।
- 20 हजार फर्जी खातों से उड़ाई गई करोड़ों की रकम।
- नकली ट्रेडिंग ऐप के जाल में फंसे सीनियर सीए।
- साइबर सेल ने ट्रैक कर फ्रीज किए 1.92 करोड़ रुपए।
मध्य प्रदेश के ग्वालियर में एक बड़ा साइबर फ्रॉड सामने आया है। 70 साल के एक सीनियर चार्टर्ड अकाउंटेंट (CA – Chartered Accountant) से 21.05 करोड़ रुपए की ठगी हुई है।
ठगों ने क्रिप्टो करेंसी में निवेश का झांसा दिया था। इस पैसे को ठिकाने लगाने के लिए 20 हजार से ज्यादा फर्जी बैंक खाते इस्तेमाल हुए। मामले में एफआईआर दर्ज हो चुकी है और जांच जारी है।
कौन हैं पीड़ित सीए
पीड़ित का नाम अशोक विजयवर्गीय है। वे ग्वालियर के जाने-माने चार्टर्ड अकाउंटेंट हैं। वे ग्वालियर चेंबर ऑफ कॉमर्स के मुख्य चुनाव अधिकारी भी हैं।
सबसे हैरानी की बात यह है कि वे खुद कई साइबर फ्रॉड पीड़ितों के केस लड़ते रहे हैं। वे उस चर्चित रवि गुप्ता मामले को भी देख रहे हैं, जिसमें 2011-12 में 134 करोड़ रुपए का फर्जीवाड़ा हुआ था। यह मामला पीएमओ तक पहुंचा था।
कैसे शुरू हुआ ठगी का खेल
दिसंबर 2025 में विजयवर्गीय के पास एक वॉट्सऐप कॉल आया। कॉल करने वाली महिला ने खुद को दिव्या सिंह बताया। उसने खुद को क्रिप्टो इन्वेस्टमेंट एडवाइजर बताया।
शुरुआत में एक ऐप के जरिए फर्जी मुनाफा दिखाया गया। इससे विजयवर्गीय का भरोसा जीत लिया गया। धीरे-धीरे उन्हें और पैसा लगाने के लिए उकसाया गया।
कब हुआ ठगी का अहसास
सात महीने तक यह सिलसिला चलता रहा। इस दौरान टुकड़ों में 21.05 करोड़ रुपए जमा कराए गए। जब विजयवर्गीय ने 33.2 करोड़ रुपए निकालने की कोशिश की, तब असली खेल सामने आया।
ऐप ने इस रकम को हाई रिस्क बताकर ब्लॉक कर दिया। इसके बाद 2 लाख डॉलर अतिरिक्त सिक्योरिटी मनी की मांग की गई। तभी उन्हें समझ आया कि यह पूरा मामला ठगी का है।
जांच में क्या सामने आया
10 जुलाई को इस मामले में एफआईआर दर्ज हुई। इसके बाद स्टेट साइबर सेल ने जांच शुरू की। जांच में एक बड़ा देशव्यापी नेटवर्क सामने आया।
ठगों ने पैसा छिपाने के लिए तमिलनाडु, केरल, आंध्र प्रदेश, महाराष्ट्र और पश्चिम बंगाल में फैले 20,507 करंट और म्यूल अकाउंट्स का इस्तेमाल किया। साइबर पुलिस ने अब तक ट्रांजैक्शन की 12 लेयर ट्रैक की हैं। इस दौरान 1.92 करोड़ रुपये फ्रीज भी कराए गए हैं।
20 हजार फर्जी खाते पर सवाल
यह मामला सिर्फ एक ठगी की कहानी नहीं है। यह बैंकिंग सिस्टम की केवाईसी (KYC – Know Your Customer) प्रक्रिया पर भी बड़ा सवाल खड़ा करता है।
इतने बड़े पैमाने पर करंट अकाउंट्स कैसे खुल गए, यह जांच का विषय है। जब तक इन मूल अकाउंट्स पर सख्ती नहीं होगी, तब तक ऐसे गिरोहों को रोकना मुश्किल रहेगा।
आगे क्या
अब देखना यह है कि साइबर सेल पूरी रकम कितनी वापस दिला पाती है। साथ ही यह भी साफ होगा कि इतने बड़े नेटवर्क में कितने और लोग शामिल हैं। यह मामला यह भी दिखाता है कि पढ़े-लिखे और अनुभवी लोग भी साइबर ठगी से अछूते नहीं हैं।
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