ग्वालियर में सिस्टम की आंखों पर बंधी पट्टी, कागजों पर बाल विवाह बंद, हकीकत में 354 नाबालिग बनीं मां
ग्वालियर में एक पूरी पीढ़ी का बचपन अंधेरे में धकेल दिया गया। जिस उम्र में लड़कियों को स्कूल जाना था, वहां वे गोद में बच्चे लिए बैठी हैं। यह सब प्रशासन की नाक के नीचे होता रहा और किसी ने सुध नहीं ली।
दिखावे के आंकड़ों के पीछे मासूमों की चीखें दबकर रह गईं। जहां एक तरफ विभाग अपनी पीठ थपथपाने में लगा हुआ है। वहीं दूसरी और ये आंकड़े कुछ और ही कहानी बयां कर रहे हैं।
300 से ज्यादा नाबालिग मां
भास्कर में छपी खबर के अनुसार जनवरी से दिसंबर 2025 तक जिले के 300 गांवों में 354 ऐसी लड़कियां मिलीं, जो नाबालिग होते हुए मां बन चुकी हैं।
जिस उम्र में इन लड़कियों को अपने सपने पूरे करने थे, वहां उनके कानों में बच्चों के रोने की आवाजें गूंज रही हैं। हाथ में किताबों का बस्ता होना था लेकिन उनकी हथेलियों में कच्ची उम्र की जिम्मेदारियां हैं।
सिस्टम की गंभीर लापरवाही
जानकारी के अनुसार जिले के 10 गांवों की जांच में जो आंकड़े सामने आए, उन्होंने स्वास्थ्य विभाग और महिला बाल विकास विभाग की मिलीभगत को पूरी तरह बेनकाब कर दिया है।
चौंकाने वाली बात ये है कि ये नाबालिग लड़कियां प्रसव के लिए सरकारी अस्पतालों तक पहुंची। उनका नाम टीकाकरण रजिस्टर में भी दर्ज हुआ। फिर भी न तो आंगनबाड़ी वालों की नींद टूटी, न ही स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारियों ने इन्हें रोका। 354 नाबालिग माताओं का यह आंकड़ा ग्वालियर के सिस्टम की गंभीर लापरवाही को उजागर करता है।
डिलीवरी के लिए बढ़वानी पड़ी उम्र
14 साल की उम्र में शादी और 17 साल में मां बनने का अनुभव अनीता के लिए बहुत कठिन था। 5वीं के बाद उसकी पढ़ाई रुक गई, क्योंकि चार बहनों और छोटे भाई की देखभाल की जिम्मेदारी उसी पर आ गई।
नाबालिग होने के कारण अस्पताल में डिलीवरी में परेशानी आई, तो उसे अपना आधार कार्ड में उम्र बढ़वानी पड़ी।
अब चार महीने के बच्चे को संभालते हुए अनीता कहती है, मैं पढ़ाई नहीं कर पाई, लेकिन जो मेरा बच्चा बनेगा, उसके लिए मैं सब कुछ करूंगी।
16 साल की उम्र में ही बनी मां
राधिका की 14 साल की उम्र में शादी कर दी गई थी। राधिका 16 साल की उम्र में ही मां बन गईं थी। इतनी छोटी उम्र में ससुराल और जिम्मेदारियों का बोझ देखकर वह घबरा गईं। अब वह कहती हैं कि मेरी बेटी जितना पढ़ना चाहेगी, उसे जरूर पढ़ाऊंगी।
17 साल की उम्र में बनी मां
16 साल की सकीना अपनी सहेलियों के साथ गुड्डा-गुड़िया की शादी खेलती थी, लेकिन उसी उम्र में उसकी अपनी शादी तय कर दी गई थी। गरीबी के कारण पढ़ाई बीच में ही छूट गई थी।
शादी तय होने पर वह बहुत रोई। लेकिन जब गर्भवती हुई तो डर के साथ 17 साल की उम्र में वह मां बन गई। अब उसका बेटा ही उसकी दुनिया है। वह कहती है कि मैं पढ़ना चाहती थी पर नहीं पढ़ पाई। अब अपने बेटे को डॉक्टर बनाऊंगी।
ये खबरें भी पढ़िए...
एमपी न्यूज: 8 साल की मासूम बनी दुल्हन, 9 साल का दुल्हा लाया बारात
मध्यप्रदेश में बाल विवाह के मामले लगातार बढ़ रहे, 2020 से 2025 तक दोगुने हुए केस, क्या है वजह
बाल विवाह की बेड़ियों से आजादी, 9 साल बाद विवाह निरस्त, अब फिर शुरू करेगी पढ़ाई
मध्यप्रदेश न्यूज: एमपी में बाल विवाह का मामला, दमोह और राजगढ़ हॉटस्पॉट जिले