ग्वालियर की बदहाल सड़कों पर हाईकोर्ट सख्त, मिनी ट्रक भरकर लाए गए दस्तावेज

Ratan Kumar Mishra | Aug 14, 2026, 08:11 IST
ग्वालियर सड़क विवाद
ग्वालियर में खराब सड़कों पर हाईकोर्ट सख्त हो गया है। कोर्ट ने जब नगर निगम से पांच साल की सड़कों का रिकॉर्ड मांगा तो अधिकारी भारी मात्रा में मिनी ट्रक में 5 साल के रिकॉर्ड के दस्तावेज लेकर कोर्ट पहुंच गए।

समझें क्या है पूरा मामला…

  • ग्वालियर की खराब सड़कों को लेकर हाईकोर्ट में सुनवाई चल रही है।
  • कोर्ट ने नगर निगम से पांच साल की सड़कों का रिकॉर्ड मांगा है।
  • निगम अधिकारी भारी मात्रा में मिनी ट्रक में दस्तावेज लेकर कोर्ट पहुंचे।
  • कोर्ट अब सड़कों की गुणवत्ता और निर्माण की जांच कराएगा।
  • खामी मिली तो जिम्मेदार ठेकेदारों और इंजीनियरों पर कार्रवाई होगी।

ग्वालियर की सड़कों पर हाईकोर्ट का रुख सख्त होता जा रहा है। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने नगर निगम से कई रिकॉर्ड मांगे। इनमें पिछले पांच साल में बनी सड़कों की जानकारी शामिल थी।



रिकॉर्ड की मात्रा इतनी ज्यादा थी कि अधिकारी मिनी ट्रक लेकर पहुंच गए। दस्तावेजों में सड़कों से जुड़े कई जरूरी रिकॉर्ड शामिल बताए गए हैं। इस तस्वीर ने सुनवाई के मामले को और खास बना दिया है। अब सवाल सड़कों की संख्या से ज्यादा उनकी गुणवत्ता पर है।



सड़क निर्माण की गुणवत्ता पर सवाल

हाईकोर्ट (ग्वालियर हाईकोर्ट) ने सड़कों की हालत को गंभीरता से लिया है। अदालत ने केवल कागजों की जांच तक मामला सीमित नहीं रखा। अब सड़कों की जमीन पर भी जांच होगी।



इस जांच में सड़क की मोटाई भी देखी जाएगी। डामर और कंक्रीट की गुणवत्ता भी जांची जाएगी। सड़क कितनी समतल है, इसकी भी जांच होगी। मानकों में कमी मिली तो जिम्मेदारी तय हो सकती है।



आठ प्रमुख मार्गों पर होगी जांच

बता दें कि कोर्ट के सामने आठ प्रमुख मार्गों की जानकारी रखी गई है। इन मार्गों में शहर के कई बड़े रास्ते शामिल हैं। चेतकपुरी से झांसी रोड वाला मार्ग भी जांच में है। एजी ऑफिस ओवरब्रिज मार्ग भी जांच के दायरे में है।



वहीं विवेकानंद तिराहे से विक्की फैक्ट्री तक भी जांच होगी। दौलतगंज से सराफा मार्ग की स्थिति भी देखी जाएगी। गोले का मंदिर से हजीरा मार्ग भी सूची में है।



सूर्य मंदिर से टंकी तिराहा मार्ग भी शामिल है। सिरोल से हुरावली मार्ग की भी जांच होनी है। मेहरा टोल से मालवा कॉलेज मार्ग भी सूची में है।



अधूरे रास्तों को लेकर भी कोर्ट नाराज

शहर में कुछ सड़क काम अब तक पूरे नहीं हुए हैं। सड़क निर्माण के बीच दूसरी एजेंसियों ने खुदाई की है। कहीं सीवर लाइन के कारण सड़क अधूरी रह गई। कहीं पाइपलाइन के काम ने सड़क को प्रभावित किया।



इससे हाल में बनी सड़कें भी दोबारा खोदी गईं। कोर्ट ने इस स्थिति पर नाराजगी जताई है। कुछ काम 70 से 80 प्रतिशत तक ही पूरे हुए। इसके बाद भी लोगों को पूरी सड़क नहीं मिल सकी।



विभागों के बीच तालमेल की कमी

बता दें कि ग्वालियर में सड़क काम कई एजेंसियां संभालती हैं। इनमें नगर निगम और स्मार्ट सिटी प्रमुख हैं। पीडब्ल्यूडी और एमपीआरडीसी भी कई काम देखते हैं।



राष्ट्रीय सड़क एजेंसी से जुड़े काम भी होते हैं। अलग-अलग कामों के कारण तालमेल की समस्या सामने आई। एक विभाग सड़क बनाता है तो दूसरा विभाग बाद में उसी सड़क को खोद देता है। इससे सरकारी पैसा और लोगों का समय दोनों खर्च होते हैं।



कोर्ट ने जिम्मेदारी तय करने के दिए संकेत

अदालत ने सड़क निर्माण की गुणवत्ता को अहम माना है। सड़क खराब मिलने पर जिम्मेदारी तय हो सकती है। ठेकेदारों की भूमिका भी जांची जा सकती है। संबंधित इंजीनियरों की भूमिका भी देखी जा सकती है।



यह जांच केवल कागजों के आधार पर नहीं होगी। सड़क की असली स्थिति भी सामने रखी जाएगी। इससे खराब निर्माण करने वालों पर दबाव बढ़ सकता है।



सड़क सुरक्षा को लेकर पुलिस को भी निर्देश

सड़कों की खराब हालत से सुरक्षा का सवाल भी जुड़ा है। गड्ढों और अधूरे रास्तों से यातायात प्रभावित होता है। ऐसे स्थानों पर हादसे का खतरा भी बढ़ सकता है।



इसी वजह से पुलिस की भूमिका भी सामने आई है। ग्वालियर एसपी को जरूरी दिशा-निर्देश दिए गए हैं। सड़क सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने पर जोर है।



क्यों अहम है पांच साल का रिकॉर्ड

पांच साल का रिकॉर्ड जांच के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इससे सड़क निर्माण का पूरा इतिहास सामने आ सकता है। किस सड़क पर कब काम हुआ, यह पता चलेगा।



साथ ही किस एजेंसी ने काम किया यह भी सामने आएगा। निर्माण पर कितना खर्च हुआ, इसकी जानकारी मिल सकती है। काम पूरा होने की तारीख भी जांची जा सकती है। इस रिकॉर्ड से सड़क की मौजूदा हालत जोड़ी जा सकती है।



जमीन पर होने वाली जांच असली परीक्षा

अब सबसे बड़ा सवाल तकनीकी जांच की रिपोर्ट पर रहेगा। रिपोर्ट बताएगी कि सड़क तय मानकों पर बनी है या नहीं। मोटाई में कमी मिली तो मामला गंभीर होगा। सामग्री खराब मिली तो जिम्मेदारी तय हो सकती है।



सड़क समतल नहीं मिली तो भी सवाल उठेंगे। अधूरे कामों की वजह भी जांच में सामने आएगी। इससे लंबे समय से उठ रहे सवालों को जवाब मिलेगा।



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