अधिकारियों को प्रोबेशन में मिलेगा पूरा वेतन, ग्वालियर हाईकोर्ट का बड़ा फैसला
5 प्वाइंट में समझें क्या है पूरा मामला
- कृषि विस्तार अधिकारियों ने प्रोबेशन वेतन नियम को हाईकोर्ट में चुनौती दी थी।
- नियम के तहत पहले साल 70 प्रतिशत वेतन दिया जा रहा था।
- दूसरे साल 80 प्रतिशत और तीसरे साल 90 प्रतिशत वेतन मिलता था।
- याचिकाकर्ताओं ने पूरे न्यूनतम वेतन की मांग कोर्ट से की थी।
- हाईकोर्ट ने बकाया रकम पर छह प्रतिशत सालाना ब्याज भी कहा।
ग्वालियर। कृषि विस्तार अधिकारियों के लिए राहत की खबर है। मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की ग्वालियर खंडपीठ ने अहम आदेश दिया है। कोर्ट ने प्रोबेशन अवधि के वेतन को लेकर निर्देश दिए हैं। याचिकाकर्ताओं को पूरे न्यूनतम वेतनमान का भुगतान करना होगा। बकाया रकम पर छह प्रतिशत सालाना ब्याज भी देना होगा।
तीन साल में कम वेतन देने की थी शर्त
मामला नियुक्ति पत्र की एक शर्त से जुड़ा था। इस शर्त के तहत तीन साल कम वेतन दिया जाता था। पहले साल 70 प्रतिशत वेतन देने का नियम था। दूसरे साल 80 प्रतिशत वेतन देने की बात थी। तीसरे साल 90 प्रतिशत वेतन देने का प्रावधान था। याचिकाकर्ताओं ने इसी व्यवस्था को हाईकोर्ट में चुनौती दी थी।
राकेश कुमार धाकड़ सहित अन्य ने लगाई थी याचिका
राकेश कुमार धाकड़ और अन्य ने याचिका दायर की थी। उन्होंने नियुक्ति पत्र की शर्त संख्या दो को चुनौती दी। साथ ही 12 दिसंबर 2019 के सरकारी सर्कुलर को चुनौती दी। याचिकाकर्ताओं ने पूरा न्यूनतम वेतन देने की मांग रखी। उन्होंने बकाया रकम पर ब्याज देने की भी मांग की।
वकील ने वेतन नियम पर उठाए सवाल
याचिकाकर्ताओं की ओर से शिशुपाल सिंह गुर्जर ने पैरवी की। उन्होंने इस वेतन व्यवस्था को अनुचित बताया था। उनका कहना था कि इससे कर्मचारियों को नुकसान हो रहा है। उन्होंने संविधान के अनुच्छेद 14 और 16 का हवाला दिया। उन्होंने समानता और बराबरी के अधिकार की बात रखी।
हाईकोर्ट ने पुराने फैसले को आधार बनाया
मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति आनंद सिंह बहरावत ने की। उन्होंने पूर्व में दिए गए फैसले का आधार लिया। मामले का निपटारा इंदौर पीठ के फैसले के आधार पर हुआ। इस फैसले में विनीता तिवारी मामले का हवाला दिया गया था। इसी आधार पर वर्तमान याचिका का भी निपटारा हुआ।
प्रोबेशन में पूरे न्यूनतम वेतन का निर्देश
कोर्ट ने प्रोबेशन पीरियड के वेतन पर निर्देश जारी किए। याचिकाकर्ताओं को पूरा न्यूनतम वेतनमान देने को कहा गया। इसमें तीन साल की प्रोबेशन अवधि शामिल है। पहले दिए कम वेतन का अंतर भी चुकाना होगा। इस अंतर की रकम पर छह प्रतिशत ब्याज देना होगा।
बकाया रकम पर छह प्रतिशत ब्याज मिलेगा
कोर्ट के आदेश से पुराने वेतन का हिसाब अहम होगा। जितनी रकम कम मिली, उसका अंतर निकाला जाएगा। उस अंतर पर छह प्रतिशत सालाना ब्याज लगेगा। इससे कर्मचारियों को केवल आगे का वेतन नहीं मिलेगा। उन्हें पुराने भुगतान का अंतर भी मिलना है।
फैसला किन कर्मचारियों के लिए अहम है
यह फैसला याचिकाकर्ताओं के लिए सीधे तौर पर राहत वाला है। इसका असर समान नियम वाले कर्मचारियों पर भी चर्चा में है। हालांकि हर कर्मचारी पर आदेश अपने आप लागू नहीं होगा। इसके लिए संबंधित सेवा और नियुक्ति शर्त देखना जरूरी होगा। समान मामले में अलग कानूनी स्थिति भी हो सकती है।
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कृषि विस्तार अधिकारी