नेताओं के जन्मदिन पर होर्डिंग लगाने पर हाईकोर्ट सख्त, कहा- बिना अनुमति कैसे लग जाते हैं

Sourabh Bhatnagar | Jun 30, 2026, 12:39 IST
ग्वालियर में अवैध होर्डिंग पर हाईकोर्ट सख्त
ग्वालियर हाईकोर्ट ने अवैध होर्डिंग और यूनिपोल पर नगर निगम को कड़ी फटकार लगाई है। कोर्ट ने 15 दिन में सभी अवैध होर्डिंग हटाने का अल्टीमेटम दिया। साथ ही मिलीभगत करने वाले अफसरों पर दंडात्मक कार्रवाई के आदेश भी दिए।

समझें क्या है पूरा मामला

  • ग्वालियर में 150 से ज्यादा अवैध होर्डिंग और यूनिपोल लगे हैं।
  • नगर निगम ग्वालियर ने खुद कोर्ट में यह बात स्वीकार की।
  • हाईकोर्ट ने 15 दिन में सब हटाने का अल्टीमेटम दिया।
  • ट्रैफिक सिग्नल छिपाने वाले होर्डिंग पहले हटाने के आदेश हैं।
  • मिलीभगत करने वाले अफसरों पर दंडात्मक कार्रवाई होगी।

नगर निगम को हाईकोर्ट की फटकार

ग्वालियर में अवैध होर्डिंग और यूनिपोल (Unipole) का मामला अब Gwalior High Courtतक पहुंच गया है। ग्वालियर हाईकोर्ट की खंडपीठ ने इस मुद्दे पर नगर निगम को जमकर लताड़ लगाई। कोर्ट ने सीधे सवाल किया कि नेताओं के जन्मदिन और स्वागत समारोहों के लिए रातोंरात बिना किसी अनुमति के होर्डिंग कैसे लग जाते हैं?



दरअसल, शहर में धड़ल्ले से लगाए जा रहे अवैध Hoardingsके खिलाफ एक जनहित याचिका (Public Interest Litigation) दायर हुई थी। इसी पर सुनवाई के दौरान ग्वालियर नगर निगम ने 10 बिंदुओं पर अपनी स्टेटस रिपोर्ट पेश की। इस रिपोर्ट में निगम ने खुद माना कि शहर में इस वक्त 150 से ज्यादा अवैध होर्डिंग और यूनिपोल लगे हुए हैं। निगम ने कहा कि उनकी टीम धीरे-धीरे कार्रवाई कर रही है।



15 दिन का सख्त अल्टीमेटम

हाईकोर्ट नगर निगम के इस ढीले-ढाले जवाब से बिल्कुल संतुष्ट नहीं हुआ। कोर्ट ने साफ कहा कि बिना वैध परमिशन के शहर में एक भी होर्डिंग (Hoardings Gwalior-Chambal) नहीं दिखना चाहिए। इसके साथ ही अदालत ने निगम को अगले 15 दिनों के भीतर पूरे शहर से सभी अवैध होर्डिंग और यूनिपोल हटाने का अल्टीमेटम दे दिया।



कोर्ट ने एक और जरूरी बात कही। जो होर्डिंग ट्रैफिक सिग्नलों को छिपा रहे हैं और वाहन चालकों का ध्यान भटका रहे हैं, उन्हें सबसे पहले और प्राथमिकता के आधार पर हटाया जाए। ऐसे होर्डिंग सड़क हादसों की बड़ी वजह बन रहे हैं।



दोषी अफसरों पर भी गाज

हाईकोर्ट ने सिर्फ होर्डिंग हटाने के निर्देश ही नहीं दिए। अदालत ने उन प्रशासनिक अधिकारियों पर भी सख्त रुख अपनाया जिनकी मिलीभगत से यह अवैध जाल फैला। कोर्ट ने आदेश दिया कि ऐसे अफसरों की पहचान की जाए और उनके खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई हो। यानी सिर्फ होर्डिंग हटाना काफी नहीं, जिम्मेदार लोगों को भी जवाब देना होगा।



याचिकाकर्ता ने उठाए सवाल

इस मामले में याचिकाकर्ता के एडवोकेट (Advocate) अनिल श्रीवास्तव ने कहा कि नगर निगम की नीयत शुरुआत से साफ नहीं रही। उनका कहना था, "जब निगम खुद कोर्ट में मान रहा है कि 150 से ज्यादा अवैध होर्डिंग लगे हैं और ये ट्रैफिक बाधित कर रहे हैं, तो अब तक बड़ी कार्रवाई क्यों नहीं हुई?" उन्होंने उम्मीद जताई कि 15 दिन के भीतर पूरा शहर इस अवैध जाल से मुक्त हो जाएगा।



शहर की सूरत और सुरक्षा दोनों दांव पर

ग्वालियर की सड़कों पर इन होर्डिंग ने दोहरी समस्या खड़ी कर दी है। एक तरफ शहर की खूबसूरती बिगड़ रही है, दूसरी तरफ सड़क सुरक्षा को खतरा पैदा हो गया है। ट्रैफिक सिग्नल ढक जाने से हादसों का खतरा बढ़ जाता है। खासतौर पर भीड़भाड़ वाले चौराहों पर यह समस्या और गंभीर है।



अब देखना यह होगा कि हाईकोर्ट के इस कड़े आदेश के बाद नगर निगम कितनी तेजी से काम करता है। रसूखदार नेताओं और लापरवाह अफसरों पर कब और कैसे कार्रवाई होती है, यह भी सबकी नजर में रहेगा।



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