ग्वालियर हाईकोर्ट: आईटी ऑपरेटर्स को विभागीय परीक्षा से बाहर करने वाला नियम निरस्त
समझें क्या है पूरा मामला
- हाईकोर्ट ने IT और डाटा एंट्री ऑपरेटर्स को राहत दी।
- 2023 से पहले रिक्तियों पर लगाया गया प्रतिबंध हटाया गया।
- सरकार की शर्त को असंवैधानिक घोषित किया गया।
- पात्रता मिलने के बाद रोक को गलत बताया गया।
- याचिकाकर्ताओं को विभागीय परीक्षा में शामिल होने का अधिकार मिला।
डाटा एंट्री ऑपरेटर्स के पक्ष में बड़ा फैसला
मध्यप्रदेश हाईकोर्ट की ग्वालियर खंडपीठ ने आईटी ऑपरेटर्स और डाटा एंट्री ऑपरेटर्स के पक्ष में बड़ा फैसला सुनाया है। हाईकोर्ट ने राज्य सरकार का प्रतिबंध निरस्त कर दिया जिसमें 2023 से पहले की रिक्तियों की विभागीय परीक्षा में शामिल होने से रोका गया था। यह निर्णय कर्मचारियों के लिए बड़ी राहत माना जा रहा है।
विभागीय परीक्षा में शामिल होने का अधिकार
हाईकोर्ट ने आईटी ऑपरेटर्स को पुरानी रिक्तियों के लिए आयोजित विभागीय परीक्षा में शामिल होने का अधिकार दिया। वर्ष 2023 से पहले की रिक्तियों के लिए पात्रता पर लगाया गया प्रतिबंध निरस्त किया गया। कोर्ट ने कहा कि पात्रता मिलने के बाद कर्मचारियों के अवसर सीमित नहीं किए जा सकते। राजेश कुमार धाकड़ सहित अन्य कर्मचारियों की याचिका स्वीकार करते हुए राज्य सरकार की शर्त को खारिज कर दिया गया।
प्रतिबंध को असंवैधानिक करार दिया
हाईकोर्ट ने आईटी और डाटा एंट्री ऑपरेटर्स के पक्ष में फैसला सुनाया और राज्य सरकार का प्रतिबंध असंवैधानिक घोषित किया। कोर्ट ने कहा कि पात्रता मिलने के बाद कर्मचारियों को पूर्व की रिक्तियों की विभागीय परीक्षा में शामिल होने से नहीं रोका जा सकता।
क्या है पूरा मामला ?
ग्वालियर हाईकोर्ट ने मध्य प्रदेश सरकार के उस प्रतिबंधात्मक प्रावधान को निरस्त कर दिया है। इसके तहत इन कर्मचारियों को वर्ष 2023 से पूर्व की रिक्तियों के लिए आयोजित सीमित विभागीय प्रतियोगिता परीक्षा में शामिल होने से वंचित किया गया था।
वाणिज्यिक कर विभाग ने 25 सितंबर 2023 को अधिसूचना जारी की और आबकारी सेवा भर्ती नियम 1982 में संशोधन किया। संशोधन के तहत आईटी ऑपरेटर्स को आबकारी उपनिरीक्षक पद की विभागीय परीक्षा की पात्रता दी गई। शर्त लगाई गई कि वे केवल 2023 और उसके बाद की रिक्तियों के लिए ही पात्र होंगे।
इसके बाद आबकारी आयुक्त द्वारा अक्टूबर 2023 में दिसंबर 2022 तक की रिक्तियों को भरने के लिए सीमित विभागीय प्रतियोगिता परीक्षा की अधिसूचना जारी की गई। सरकार द्वारा लगाई गई शर्त के कारण आईटी ऑपरेटर्स इस परीक्षा में शामिल नहीं हो सके।
पात्रता मिलने के बाद रोक उचित नहीं
इस निर्णय को चुनौती देते हुए राजेश कुमार धाकड़ सहित अन्य कर्मचारियों ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की। अधिवक्ता रवि राहुल ने पक्ष रखा। सुनवाई के बाद डबल बेंच ने शर्त को अनुचित माना। कोर्ट ने कहा कि पात्रता मिलने के बाद रोक उचित नहीं है। पूर्व रिक्तियों की चयन प्रक्रिया से बाहर रखना न्यायसंगत नहीं है। विवादित शर्त को निरस्त किया गया। याचिकाकर्ताओं को राहत दी गई। यह फैसला पदोन्नति अवसरों को बढ़ाने वाला माना जा रहा है।
आबकारी विभाग में पदस्थ ऑपरेटर लाभान्वित हुए
पहली बार आईटी ऑपरेटर्स को आबकारी उप-निरीक्षक के पद पर पदोन्नति के लिए विभागीय परीक्षा में बैठने की पात्रता तो दी गई थी, लेकिन साथ में एक शर्त (परंतु) जोड़ दी गई। शर्त के मुताबिक, वे केवल वर्ष 2023 और उसके बाद की रिक्तियों के लिए ही पात्र माने गए। इसके बाद आबकारी आयुक्त द्वारा अक्टूबर 2023 में दिसंबर 2022 तक की पुरानी रिक्तियों को भरने के लिए परीक्षा की अधिसूचना जारी की गई। इस शर्त के कारण आईटी ऑपरेटर्स इस परीक्षा से बाहर हो गए थे।
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