ग्वालियर सेंट्रल जेल में भ्रष्टाचार के नाम पर अधीक्षक से ब्लैकमेलिंग, 5 लाख की डिमांड
समझें क्या है पूरा मामला...
- ग्वालियर सेंट्रल जेल के अधीक्षक को व्हाट्सएप पर धमकी मिली है।
- अज्ञात शख्स ने जेल के संवेदनशील वीडियो भेजकर 5 लाख रुपए मांगे।
- पैसे न मिलने पर आरोपी ने वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल कर दिए हैं।
- पुलिस ने मामला दर्ज कर ब्लैकमेलर का मोबाइल नंबर सर्विलांस पर लिया है।
- निलंबित जेल प्रहरी और एक पूर्व कैदी के इसमें शामिल होने का संदेह है।
7 जून को आई पहली धमकी
ग्वालियर में एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। ग्वालियर सेंट्रल जेल के अधीक्षक विदित सरवइया को 7 जून 2026 की दोपहर करीब 12:40 बजे एक अनजान नंबर 9179 XXXX XX से व्हाट्सएप कॉल और मैसेज आए।
उस अनजान शख्स ने दावा किया कि उसके पास जेल के अंदर के बेहद संवेदनशील वीडियो हैं। बात को साबित करने के लिए उसने 4 वीडियो क्लिप भी व्हाट्सएप पर भेज दिए। साथ में अभद्र भाषा में लिखा कि पैसे नहीं दिए तो ये वीडियो वरिष्ठ अधिकारियों तक पहुंचा दूंगा। कल तक का वक्त है।
यह घटना 7 जून से 13 जून 2026 के बीच की है। जेल अधीक्षक ने पहले अपने वरिष्ठ अधिकारियों को इसकी जानकारी दी।
अधीक्षक को रेस्ट हाउस में बुलाया
जेल अधीक्षक ने जब आरोपी को जेल परिसर में मिलने को कहा, तो उसने अकड़ दिखाई। उसने मैसेज किया कि तेरी गरज है, तू आ। आरोपी ने अधीक्षक को गांधी रोड स्थित एक रेस्ट हाउस में बुलाया था।
जब अधीक्षक ने पूछा कि कितने पैसे चाहिए, तो जवाब में आरोपी ने व्हाट्सएप पर हाथ के पंजे की इमोजी भेजी। इसका सांकेतिक मतलब 5 लाख रुपए या उससे भी बड़ी रकम की मांग माना जा रहा है।
अधीक्षक विदित सरवइया ने खुद इस मामले की पुष्टि की। उन्होंने बताया कि मैसेज में ट्रांसफर सीजन का हवाला देते हुए यह भी चेतावनी दी गई कि वे बच नहीं पाएंगे। इसके बाद मीटिंग और पैसे लाने की बात की गई।
जेल में महंगी बिक्री के आरोप
जब जेल अधीक्षक ने पैसे देने से इनकार किया, तो आरोपी ने सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल कर दिए। इन वीडियो में दावा किया गया कि जेल के अंदर बीड़ी, सब्जी और फल जैसी चीजें बाजार भाव से 20 से 50 गुना ज्यादा दाम पर बेची जा रही हैं।
हालांकि पुलिस और जेल प्रशासन के सामने यह सवाल अभी भी खुला है कि ये वीडियो ग्वालियर सेंट्रल जेल के ही हैं या किसी दूसरी जेल के। वीडियो में कोई साफ टाइमस्टैम्प (timestamp यानी तारीख और समय की मुहर) भी नजर नहीं आती। इससे इनकी प्रामाणिकता पर सवाल उठ रहे हैं।
निलंबित प्रहरी और पूर्व कैदी पर नजर
जेल अधीक्षक ने अपनी शिकायत में साफ कहा है कि यह मामला आम साइबर ठगी जैसा नहीं लग रहा। उन्हें संदेह है कि इसके पीछे जेल के भीतर की रंजिश या गुटबाजी हो सकती है। उन्होंने दो नाम भी लिए जिन पर संदेह है। पहला, केंद्रीय जेल ग्वालियर के एक निलंबित प्रहरी पवन और दूसरा, हाल ही में जेल से रिहा हुआ आरोपी रिश्पाल सिंह है। पुलिस इन दोनों के जेल से जुड़े नेक्सस की जांच कर रही है।
पुलिस ने थामी कमान, नंबर सर्विलांस पर
जेल अधीक्षक विदित सरवइया ने ग्वालियर एसएसपी (SSP यानी Senior Superintendent of Police) और बहोड़ापुर थाने में लिखित शिकायत दर्ज कराई है। उन्होंने व्हाट्सएप के सभी मैसेज, कॉल लॉग और वीडियो क्लिप एक पेन ड्राइव में सुरक्षित कर पुलिस को सौंप दिए हैं। पुलिस ने इस पेन ड्राइव को जब्त कर लिया है और जांच शुरू कर दी है।
बहोड़ापुर थाना प्रभारी आलोक परिहार ने पुष्टि की है कि जेल अधीक्षक की शिकायत मिली है। उन्होंने बताया कि ब्लैकमेलर के मोबाइल नंबर को सर्विलांस पर ले लिया गया है और मामले की गहन छानबीन की जा रही है।
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