ग्वालियर निगम घोटाला : विधि विभाग की राय के बाद भी 3 IAS अफसरों पर फैसला अटका

Ramanand Tiwari | Jul 29, 2026, 08:15 IST
ग्वालियर नगर निगम
ग्वालियर नगर निगम के स्वेच्छानुदान वितरण केस में नया मोड़। तीन पूर्व IAS, तत्कालीन महापौर और एक पार्षद के खिलाफ अभियोजन स्वीकृति पर फैसला अटका। अब विधि विभाग ने शासन से पूछा है कि अभियोजन स्वीकृति नहीं देने के फैसले के बाद उसकी राय पर क्या कार्रवाई हुई।

    ग्वालियर नगर निगम केस में नया मोड़ आ गया है। निगम के बहुचर्चित स्वेच्छानुदान वितरण मामले में एक बार फिर प्रशासनिक हलचल तेज हो गई है। लोकायुक्त में दर्ज इस प्रकरण में तीन पूर्व IAS अफसरों, तत्कालीन महापौर और एक पार्षद के खिलाफ अभियोजन स्वीकृति को लेकर चल रही प्रक्रिया अब विधि विभाग की कार्रवाई और शासन के जवाब के बीच अटक गई है।



    सूत्रों के अनुसार, विधि एवं विधायी कार्य विभाग ने शासन से यह जानकारी मांगी है कि अभियोजन स्वीकृति नहीं देने के निर्णय के बाद विभाग की राय पर अब तक क्या कार्रवाई की गई।



    24 जून के पत्र के बाद बढ़ी हलचल, शासन से मांगा गया जवाब

    इस मामले में विधि एवं विधायी कार्य विभाग की ओर से 24 जून को शासन स्तर पर जानकारी तलब की गई थी। विभाग ने पूछा है कि तीन IAS अधिकारियों के संबंध में अभियोजन स्वीकृति नहीं देने के निर्णय के बाद विधि विभाग के अभिमत पर आगे क्या कदम उठाए गए।



    हालांकि, अभी तक यह जानकारी विधि विभाग तक नहीं पहुंची है और मामला शासन स्तर पर लंबित बताया जा रहा है। यही वजह है कि पुराने प्रकरण में एक बार फिर प्रशासनिक गतिविधियां तेज हो गई हैं।



    तीन IAS अफसर और पूर्व महापौर, किस फैसले का इंतजार?

    अपराध क्रमांक 283/2017 से जुड़े इस मामले में लोकायुक्त पुलिस ने भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम और अन्य धाराओं के तहत प्रकरण दर्ज किया था। जांच के बाद पांच लोगों के खिलाफ प्रथम दृष्टया मामला पाए जाने की बात सामने आई थी।



    मामले में शामिल प्रमुख नाम:



    • वेद प्रकाश शर्मा, तत्कालीन आयुक्त, नगर निगम ग्वालियर
    • एनबीएस राजपूत, तत्कालीन आयुक्त, नगर निगम ग्वालियर
    • विनोद शर्मा, तत्कालीन आयुक्त, नगर निगम ग्वालियर
    • समीक्षा गुप्ता, तत्कालीन महापौर, नगर निगम ग्वालियर
    • डॉ. अंजलि रायजादा, तत्कालीन पार्षद, नगर निगम ग्वालियर

    अभियोजन स्वीकृति पर फैसला क्यों बना बड़ा मुद्दा?

    नगरीय प्रशासन विभाग ने संबंधित आरोपियों के मामले में अभियोजन स्वीकृति नहीं देने का निर्णय लिया था। इसके बाद फाइल विधि एवं विधायी कार्य विभाग के अभिमत के लिए भेजी गई। लेकिन अब मुख्य सवाल यही है कि विधि विभाग की राय के बाद शासन ने आगे क्या कार्रवाई की।


    इसी जानकारी को लेकर अब विधि विभाग ने दोबारा स्थिति स्पष्ट करने को कहा है।



    46 लाख के स्वेच्छानुदान वितरण से जुड़ा मामला

    यह पूरा प्रकरण वर्ष 2010 से 2014 के बीच नगर निगम ग्वालियर में स्वेच्छानुदान राशि वितरण से संबंधित है। आरोप है कि जरूरतमंद लोगों को आर्थिक सहायता देने की प्रक्रिया में निर्धारित नियमों और स्वीकृति प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया।



    मामले के मुख्य तथ्य

    • करीब 1143 लोगों को आर्थिक सहायता वितरित की गई थी।
    • कुल सहायता राशि लगभग 46.31 लाख रुपये बताई गई।
    • आरोप है कि वितरण प्रक्रिया में नियमों की अनदेखी हुई।
    • लोकायुक्त जांच के बाद भ्रष्टाचार का प्रकरण दर्ज किया गया।
    • विधि विभाग की राय के बाद भी क्यों नहीं हुआ फैसला?

    इस मामले में अब विधि विभाग का अभिमत सबसे महत्वपूर्ण कड़ी बन गया है। क्योंकि अभियोजन स्वीकृति का निर्णय ही तय करेगा कि मामला न्यायिक प्रक्रिया की ओर बढ़ेगा या संबंधित लोगों को राहत मिलेगी। फिलहाल शासन स्तर से जानकारी नहीं आने के कारण अंतिम निर्णय आगे नहीं बढ़ पाया है।



    पूर्व महापौर समीक्षा गुप्ता का मामला भी चर्चा में

    इस प्रकरण में तत्कालीन महापौर समीक्षा गुप्ता का नाम भी शामिल है। राजनीतिक और प्रशासनिक गलियारों में उनके मामले को लेकर पहले भी चर्चा रही है। हालांकि, अभी तक कोई अंतिम निर्णय नहीं हुआ है और पूरा मामला सरकारी प्रक्रिया तथा कानूनी राय पर निर्भर है।



    कानूनी प्रक्रिया ने बदला पूरा समीकरण

    सूत्रों के अनुसार, कुछ आरोपियों को राहत देने की दिशा में प्रक्रिया आगे बढ़ी थी। लेकिन विधि विभाग ने मामले से जुड़े दस्तावेजों और नियमों की समीक्षा के बाद स्थिति स्पष्ट करने की जरूरत बताई। अब पूरा मामला इस बात पर निर्भर है कि शासन विधि विभाग को क्या जानकारी उपलब्ध कराता है।



    अब आगे क्या होगा?

    विधि विभाग ने शासन से मुख्य रूप से इन बिंदुओं पर जानकारी मांगी है

    • अभियोजन स्वीकृति नहीं देने के फैसले पर विधि विभाग का अभिमत क्या था?
    • उस अभिमत के बाद शासन स्तर पर क्या कार्रवाई की गई?
    • वर्तमान में प्रकरण किस स्तर पर लंबित है?

    इन सवालों के जवाब मिलने के बाद ही मामले की आगे की दिशा तय होगी।



    IAS अफसरों वाले केस में अब गेंद शासन के पाले में

    ग्वालियर नगर निगम का यह मामला अब केवल पुराने आरोपों तक सीमित नहीं है। तीन IAS अफसरों और पूर्व महापौर से जुड़े इस प्रकरण में विधि विभाग की सक्रियता ने एक बार फिर फाइल को चर्चा में ला दिया है। अब निगाहें शासन के जवाब पर हैं। यही जवाब तय करेगा कि यह मामला राहत की ओर जाएगा या फिर कानूनी कार्रवाई की अगली सीढ़ी चढ़ेगा।



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