ग्वालियर में NHAI की सड़क जांच में फेल, हाई कोर्ट ने 26.53 करोड़ की पेमेंट पर लगा दी रोक

Ratan Kumar Mishra | Oct 07, 2026, 11:04 IST
ग्वालियर में NHAI सड़क के सैंपल फेल, हाई कोर्ट ने एन्युटी भुगतान पर लगाई रोक
ग्वालियर में NHAI की सड़क के सैंपल फेल होने के बाद मामला अब करोड़ों के भुगतान तक पहुंच गया है। हाई कोर्ट ने 26.53 करोड़ रुपए की एन्युटी किश्त (तय भुगतान राशि) रोकने का आदेश दिया है। इसके अलावा कोर्ट ने इस रकम को एफडीआर में रखने को कहा है।

सैंपल फेल होने के बाद अब करोड़ों की पेमेंट पर ब्रेक

बता दें कि पहले जांच में सड़क के सैंपल तय मानकों पर खरे नहीं उतरे थे। अब हाई कोर्ट ने उसी सड़क से जुड़े 26.53 करोड़ रुपए के एन्युटी भुगतान पर अंतरिम रोक लगा दी है। यानी जिस भुगतान की तारीख पहले 6 अक्टूबर तय थी, वह अब कोर्ट के आदेश के बाद अटक गया है।



जिस रिपोर्ट का इंतजार था, उसी ने रोक दी पेमेंट

मामला ग्वालियर की मेहरा टोल से सिकरौदा चौराहा सड़क का है। सड़क की जांच के लिए कोर्ट की निगरानी में विशेष आयोग ने सैंपल लिए थे। रिपोर्ट में ज्यादातर सैंपल फेल मिले। इसके अलावा NSV की अंतरिम रिपोर्ट में भी सड़क तय स्पेसिफिकेशन के मुताबिक नहीं मिली। यही रिपोर्ट अब NHAI के भुगतान पर रोक का बड़ा आधार बनी है।



NHAI को मिलनी थी 26.53 करोड़ की एन्युटी

सड़क के रखरखाव से जुड़ी कंपनी को NHAI की ओर से एन्युटी की किश्त दी जानी थी। मंगलवार 06 अक्टूबर को इसका भुगतान होना था। उससे पहले हाई कोर्ट ने मामले को सुना और सड़क की गुणवत्ता से जुड़े रिकॉर्ड सामने रखे गए। कोर्ट ने भुगतान रोकते हुए रकम को सुरक्षित रखने का आदेश दिया है। यह रकम राष्ट्रीयकृत बैंक में एफडीआर के रूप में रखी जाएगी।



पैसा रोका है, जब्त नहीं किया

कोर्ट के आदेश का एक अहम पहलू यह भी है कि 26.53 करोड़ रुपए को फिलहाल सुरक्षित रखा जाएगा। इसे सीधे जब्त करने का आदेश नहीं दिया गया है। एफडीआर में रखी गई रकम पर मिलने वाला ब्याज भी सुरक्षित रहेगा। आगे जांच में संबंधित कंपनी भुगतान की हकदार पाई जाती है तो उसे रकम ब्याज सहित मिलने का रास्ता खुला रहेगा।



हर छह महीने में सड़क जांच का नियम

सुनवाई में एक और सवाल NHAI की निगरानी व्यवस्था पर उठा। आयोग के मुताबिक NHAI को सड़क का रैंडम सर्वे हर छह महीने में करना था। जांच के दौरान ऐसा कोई दस्तावेज नहीं मिला, जिससे यह साबित हो कि संबंधित सड़क का NSV सर्वे नियमित रूप से किया गया था। ऐसे में कोर्ट के सामने सड़क की गुणवत्ता के साथ उसकी निगरानी व्यवस्था पर भी सवाल खड़ा हुआ।



मामला सिर्फ सड़क तक नहीं, रिकॉर्ड तक पहुंच गया

कोर्ट की निगरानी में सिर्फ सड़क की हालत नहीं देखी जा रही है। सड़क से जुड़े टेस्ट रिकॉर्ड और NSV डेटा भी जांच के दायरे में हैं। आयोग ने NSV का पूरा डेटा और टेस्ट से जुड़े दस्तावेज मांगे थे। मामले में डिजिटल रिकॉर्ड भी सुरक्षित कराया गया है। इससे अब सड़क की गुणवत्ता के साथ यह भी देखा जा रहा है कि जांच और निगरानी की प्रक्रिया वास्तव में कैसे हुई।



PWD की सड़क भी जांच में आई

ग्वालियर की सड़क गुणवत्ता का मामला केवल NHAI तक सीमित नहीं है। आयोग ने PWD की AG ऑफिस से विक्की फैक्ट्री तक की सड़क के भी सैंपल लिए थे। वहां भी गुणवत्ता को लेकर सवाल सामने आए। पहले की सुनवाई में आयोग ने अलग-अलग सड़कों की तकनीकी रिपोर्ट कोर्ट में रखी थी। इससे ग्वालियर में सड़क निर्माण और मरम्मत की गुणवत्ता पर व्यापक सवाल खड़े हुए हैं।



गड्ढे भरने में भी मलबा डालने पर कोर्ट नाराज

सड़क की जांच के लिए जहां सैंपल लिए गए थे वहां गड्ढे भी किए गए थे। इन गड्ढों को भरने की जिम्मेदारी नगर निगम की थी। कोर्ट के सामने ऐसी तस्वीरें रखी गईं, जिनमें गड्ढों में मलबा डालकर ऊपर से बिटुमिन की पतली परत डालने की बात सामने आई। कोर्ट ने नगर निगम से इस पर जवाब मांगा।



गड्ढा भरने का भी तय तरीका है

कोर्ट रिकॉर्ड में सड़क के गड्ढे भरने की तकनीकी प्रक्रिया भी सामने आई है। गड्ढे की गहराई 100 से 150 मिलीमीटर तक रखने, ढीली सामग्री हटाने और तय सामग्री से भरने की बात है। इसके बाद सामग्री को रोलर से दबाना जरूरी है। यानी कोर्ट की नजर अब सिर्फ बड़ी सड़क की गुणवत्ता पर नहीं, बल्कि उसकी मरम्मत के तरीके पर भी है।



शराब दुकान पर भी कोर्ट ने उठाया सवाल

इसी सुनवाई में सिकरौदा चौराहा के पास हाईवे किनारे शराब दुकान का मुद्दा भी सामने आया। कोर्ट ने राज्य सरकार से पूछा है कि शहरी सीमा में हाईवे से 500 मीटर की दूरी वाले नियम में छूट किस आधार पर दी जा रही है। कोर्ट ने इस नीति पर स्वतः संज्ञान लेते हुए सरकार से जवाब मांगा है। यानी सड़क की सुनवाई के बीच अब हाईवे किनारे शराब दुकानों की नीति भी कोर्ट की जांच के दायरे में आ गई है।



अधिकारियों के रवैये पर भी कोर्ट की नाराजगी

सुनवाई के दौरान NHAI अधिकारियों के रवैये पर भी कोर्ट ने सख्त टिप्पणी की। कोर्ट के सामने यह बात आई कि प्रोजेक्ट डायरेक्टर की भूमिका और अधिकारियों के व्यवहार को लेकर स्थिति ठीक नहीं थी। अदालत ने अधिकारियों को अपनी कार्यशैली सुधारने की हिदायत दी। रिपोर्ट पर हस्ताक्षर और अदालत के सामने रखे रिकॉर्ड को लेकर भी सवाल उठे।



सवाल सड़क मरम्मत से ज्यादा जवाबदेही का

इस पूरे मामले में कहानी अब सिर्फ खराब सड़क की नहीं रह गई है। सवाल यह है कि जब सड़क की गुणवत्ता पर सवाल उठे तो भुगतान क्यों किया जाए। हाई कोर्ट ने फिलहाल 26.53 करोड़ रुपए सुरक्षित रखकर इसी सवाल का जवाब दिया है। अब NHAI को सड़क की गुणवत्ता, सर्वे रिकॉर्ड और भुगतान से जुड़े सवालों पर अपना पक्ष रखना होगा।



16 अक्टूबर को फिर खुलेगा सड़क और पेमेंट का हिसाब

बता दें कि मामले की अगली सुनवाई 16 अक्टूबर 2026 को होगी। तब सड़क की जांच रिपोर्ट, एन्युटी भुगतान, गड्ढों की मरम्मत और हाईवे किनारे शराब दुकान से जुड़े सवालों पर आगे सुनवाई होगी। फिलहाल इतना साफ है कि सड़क की गुणवत्ता पर उठे सवालों ने 26.53 करोड़ रुपए के भुगतान को रोक दिया है। ग्वालियर में सड़क निर्माण की यह जांच अब सीधे सरकारी और सार्वजनिक धन की जवाबदेही तक पहुंच चुकी है।



Tags:
  • एन्युटी भुगतान पर अंतरिम रोक
  • NHAI के भुगतान पर रोक
  • NHAI
  • हाईवे किनारे शराब दुकान का मुद्दा
  • ग्वालियर में सड़क निर्माण
  • ग्वालियर