12 लाख में पटवारी बनाने की डील! ज्वाइनिंग लेटर थमाया, कलेक्ट्रेट में वेरिफिकेशन भी कराया, युवाओं से 50 लाख की ठगी
फर्जी सिलेक्शन लिस्ट और नियुक्ति पत्र भी दिए थे। यहां तक कि भिंड कलेक्ट्रेट परिसर में दस्तावेजों का वेरिफिकेशन भी कराया गया था। लेकिन किसी को नौकरी नहीं मिली। अब पुलिस ने तीन आरोपियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है।
यूनिवर्सिटी कर्मचारी के जरिए आरोपियों से मिले युवा
यह मामला ग्वालियर की जीवाजी यूनिवर्सिटी से जुड़ा है। यहां लॉ शाखा में काम करने वाले राजवीर सिंह तोमर ने सात बेरोजगार युवाओं को अरविंद नरवरिया से मिलवाया था। इन युवाओं में रवि शर्मा, शत्रुघ्न शर्मा, पवन कौरव, दिव्यांश शर्मा, जितेंद्र गुर्जर, नागेंद्र चौहान और सतेन्द्र सिंह शामिल हैं।
राजवीर सिंह तोमर महलगांव का रहने वाला है। आरोप है कि उसी की मध्यस्थता से युवाओं का संपर्क नौकरी दिलाने का दावा करने वाले लोगों से हुआ। इसके बाद अरविंद नरवरिया सभी युवाओं को भोपाल ले गया था।
व्यापमं कर्मचारी और STF अधिकारी बताकर जीता भरोसा
भोपाल पहुंचने के बाद अरविंद ने युवाओं को प्रदीप गौतम के बारे में बताया। उसने दावा किया कि प्रदीप व्यापमं में कर्मचारी है और पटवारी की नौकरी लगवा सकता है।
पहले युवाओं को परीक्षा कराने का भरोसा दिया गया। इसके बाद उन्हें तीन दिन तक भोपाल में रोका गया। फिर गोवर्धन सिंह तोमर का नाम सामने आया। उसे एसटीएफ का बड़ा अधिकारी बताकर युवाओं से मिलवाया गया। आरोप है कि सरकारी विभागों से जुड़े होने का दावा करके युवाओं का भरोसा जीता गया।
12 लाख में नौकरी की डील, पहले लिए 2 से 4 लाख
आरोपियों ने हर उम्मीदवार से पटवारी की नौकरी दिलाने के बदले 12 लाख रुपए मांगे थे। शुरुआत में किसी से दो लाख तो किसी से चार लाख रुपए एडवांस लिए गए थे। इसके बाद अलग-अलग किस्तों में और रकम मांगी गई थी।
पीड़ितों के मुताबिक आरोपियों ने PhonePe और बैंक खातों के जरिए पैसे लिए थे। कुछ रकम नकद भी ली गई थी। इस तरह सात युवाओं से करीब 50 लाख रुपए वसूले गए थे।
फर्जी सिलेक्शन लिस्ट और जॉइनिंग लेटर दिए
युवाओं को भरोसा दिलाने के लिए आरोपियों ने सरकारी भर्ती जैसी पूरी प्रक्रिया दिखाई थी। पहले भोपाल और जबलपुर ले जाकर परीक्षा कराने की बात कही गई थी। इसके बाद फर्जी Selection List दिखाई गई।
इतना ही नहीं, युवाओं को नियुक्ति पत्र भी दिए गए हैं। इससे उन्हें लगा कि उनकी पटवारी की नौकरी पक्की हो गई है। हालांकि बाद में पता चला कि यह सब कथित ठगी का हिस्सा था।
भिंड कलेक्ट्रेट में कराया दस्तावेजों का वेरिफिकेशन
इस मामले में सबसे हैरान करने वाली बात दस्तावेजों के सत्यापन से जुड़ी है। आरोप है कि युवाओं को भिंड कलेक्ट्रेट परिसर में बने एक सेवा केंद्र पर बुलाया गया था। वहां एक कर्मचारी से मिलवाकर दस्तावेजों का Document Verification कराया गया था। इस दौरान युवाओं से कागजों पर हस्ताक्षर भी कराए गए थे।
कलेक्ट्रेट परिसर में यह प्रक्रिया कराए जाने से युवाओं को भरोसा हो गया कि उनकी नियुक्ति सही तरीके से हो रही है। अब इस मामले में वहां किसी कर्मचारी की भूमिका होने की आशंका भी जताई जा रही है। हालांकि इसकी पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।
एक साल बाद भी नौकरी नहीं मिली, पैसे मांगने पर धमकी
यह मामला 16 दिसंबर 2023 से शुरू होकर आगे की अवधि का बताया गया है। उस दौरान मध्य प्रदेश में पटवारी भर्ती परीक्षा को लेकर पहले से विवाद चल रहा था। आरोपियों के भरोसे में आकर युवाओं ने लाखों रुपए दे दिए थे। लेकिन एक साल से ज्यादा समय बीतने के बाद भी किसी को नौकरी नहीं मिली। इसके बाद युवाओं ने अपने पैसे वापस मांगने शुरू किए।
पीड़ितों का आरोप है कि आरोपियों ने रुपए लौटाने से इनकार कर दिया। उन्हें जान से मारने की धमकियां भी दी गईं।
यूनिवर्सिटी कर्मचारी ने ही थाने में दर्ज कराई शिकायत
नौकरी नहीं मिलने पर युवाओं ने जीवाजी यूनिवर्सिटी के कर्मचारी राजवीर सिंह तोमर से संपर्क किया। उन्होंने राजवीर से पैसे वापस दिलाने की मांग की और उस पर दबाव बनाया।
इसके बाद राजवीर ने खुद फरियादी बनकर ग्वालियर के थाटीपुर थाने में शिकायत की। उसने पुलिस को मामले से जुड़े दस्तावेज और जानकारी भी दी। शिकायत के आधार पर सोमवार को पुलिस ने धोखाधड़ी की FIR दर्ज कर ली।
तीन लोगों के खिलाफ धोखाधड़ी का केस
पुलिस ने मामले में तीन लोगों को आरोपी बनाया है।
- अरविंद नरवरिया: नौकरी दिलाने के नाम पर ठगी का मुख्य आरोपी।
- गोवर्धन सिंह तोमर: खुद को एसटीएफ का बड़ा अधिकारी बताने का आरोप।
- प्रदीप गौतम: खुद को व्यापमं का कर्मचारी बताने का आरोप।
इन तीनों के खिलाफ धोखाधड़ी का मामला दर्ज किया गया है।
पुलिस ने क्या कहा?
थाटीपुर थाना प्रभारी विपेन्द्र सिंह चौहान ने बताया कि पटवारी की नौकरी दिलाने का झांसा देकर सात युवाओं से लाखों रुपए लेने की शिकायत मिली थी। शिकायत के आधार पर आरोपियों के खिलाफ धोखाधड़ी का केस दर्ज किया गया है।
पुलिस आरोपियों की तलाश कर रही है। थाना प्रभारी के मुताबिक जल्द ही आरोपियों को गिरफ्तार करने की कार्रवाई की जाएगी।
इस मामले में अब बड़ा सवाल यह है कि आरोपियों ने सरकारी भर्ती जैसी प्रक्रिया कैसे तैयार की और भिंड कलेक्ट्रेट परिसर में कथित फर्जी वेरिफिकेशन किसकी मदद से कराया गया। इन सवालों के जवाब पुलिस जांच के बाद ही सामने आएंगे।