ग्वालियर सड़क जांच में तकनीकी टीम पर दबाव पड़ा भारी, हाईकोर्ट ने PWD चीफ इंजीनियर को पद छोड़ने का दिया आदेश
अदालत ने अपने आदेश में सरकारी रिकॉर्ड की सुरक्षा और न्यायिक जांच से जुड़े अधिकारियों पर दबाव बनाने को लेकर गंभीर टिप्पणी की है।
चीफ इंजीनियर को पद छोड़ने का आदेश
हाईकोर्ट ने वीके अरख को याचिका लंबित रहने तक ग्वालियर जोन का कार्यभार छोड़ने के निर्देश दिए हैं। राज्य सरकार को विभाग का काम चलाने के लिए वैकल्पिक व्यवस्था करने को कहा है। अदालत के अनुसार, अरख को पद पर बने रहने के संबंध में नोटिस दिया गया था। लेकिन उन्होंने जवाब नहीं दिया। अवमानना मामले में उन्होंने जवाब पेश किया, लेकिन पद से जुड़े सवाल का जवाब नहीं दिया।
जांच टीम के सदस्य को नोटिस देना पड़ा भारी
हाईकोर्ट की तकनीकी जांच टीम में एग्जीक्यूटिव इंजीनियर राकेश कुमार उपाध्याय भी शामिल थे। चीफ इंजीनियर ने 28 अक्टूबर को उन्हें विभागीय नोटिस जारी किया था। नोटिस में सरकारी रिकॉर्ड सुरक्षित नहीं रखने को लेकर जवाब मांगा गया था। हाईकोर्ट ने इसे न्यायिक जांच से जुड़े अधिकारी पर दबाव बनाने की कोशिश माना। इसके बाद 5 नवंबर को अदालत ने यह Show Cause Notice पूरी तरह रद्द कर दिया।
अदालत की जांच टीम में शामिल थे उपाध्याय
सड़क निर्माण की जांच के लिए हाईकोर्ट ने तीन वकीलों का आयोग बनाया था। इस आयोग ने सड़क के नमूने भी लिए थे। जांच में मदद के लिए एक तकनीकी टीम बनाई गई थी, जिसमें राकेश कुमार उपाध्याय को सदस्य बनाया गया था। अदालत ने कहा कि उपाध्याय जांच टीम का हिस्सा थे। इसलिए वे विभाग की ओर से जांच रिपोर्ट पर आपत्तियां तैयार नहीं कर सकते थे। PWD के खिलाफ रिपोर्ट आने के बाद उनके लिए उसमें बदलाव करना भी संभव नहीं था।
सब इंजीनियर के घर मिला सरकारी रिकॉर्ड
सुनवाई के दौरान सामने आया कि सड़क निर्माण से जुड़े मूल सरकारी दस्तावेज सब इंजीनियर दीपक गुप्ता के घर रखे थे। सरकारी रिकॉर्ड घर में मिलने पर अदालत ने उनकी सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल उठाए। मुख्य अभियंता अरख ने बताया कि जांच आयोग की रिपोर्ट पर आपत्तियां दीपक गुप्ता ने तैयार करवाई थीं। अरख ने इन आपत्तियों पर अपने हस्ताक्षर करना स्वीकार किया। उन्होंने यह भी कहा कि हस्ताक्षर करने से पहले विधि अधिकारी से चर्चा की थी। अदालत ने माना कि जब रिकॉर्ड चीफ इंजीनियर के पास था, तो उपाध्याय को नोटिस देना उचित नहीं था।
सड़क निर्माण में नियमों की अनदेखी का मामला
पिछली सुनवाई में मुख्य अभियंता अरख ने माना था कि सड़क निर्माण निर्धारित मानकों के अनुसार नहीं हुआ था। अदालत ने इस काम पर करोड़ों रुपए खर्च होने और पूरा भुगतान किए जाने का भी उल्लेख किया। हालांकि, भ्रष्टाचार के आरोपों पर अभी कोई अंतिम फैसला नहीं हुआ है। यह मामला फिलहाल अदालत में विचाराधीन है।
चीफ और सब इंजीनियर के खिलाफ अवमानना की कार्रवाई
30 अक्टूबर को हाईकोर्ट ने वीके अरख और दीपक गुप्ता के खिलाफ अलग-अलग अवमानना कार्यवाही शुरू की थी। उस सुनवाई में दीपक गुप्ता के निलंबन और उपाध्याय को नोटिस जारी करने की जानकारी सामने आई थी।
जांच टीम पर दबाव बनाने वालों को हाईकोर्ट की चेतावनी
5 नवंबर के Court Order में अदालत ने जांच टीम के सदस्यों को परेशान करने पर सख्त रुख अपनाया। कोर्ट ने कहा कि न्यायिक जांच से जुड़े अधिकारियों पर दबाव बनाना न्यायिक कामकाज में सीधा हस्तक्षेप है। अदालत ने ऐसे मामलों में उचित कार्रवाई करने की चेतावनी भी दी। यह चेतावनी जांच टीम के किसी भी सदस्य को परेशान करने वाले प्राधिकरण पर लागू होगी।
26 नवंबर को होगी अगली सुनवाई
इस मामले की अगली सुनवाई 26 नवंबर 2026 को होगी। सुनवाई अवमानना प्रकरण क्रमांक 7843/2026 के साथ की जाएगी। यह आदेश कैलाश चंद अग्रवाल की याचिका क्रमांक 10680/2025 में पारित किया गया है। ग्वालियर हाईकोर्ट की जस्टिस जीएस अहलूवालिया और जस्टिस अनुराधा शुक्ला की खंडपीठ ने 5 नवंबर को यह आदेश दिया था।