सड़क घोटाले पर हाईकोर्ट सख्त, ग्वालियर नगर निगम आयुक्त से मांगा हलफनामा

Ratan Kumar Mishra | Aug 18, 2026, 23:07 IST
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ग्वालियर की खराब सड़क और सीवर काम पर हाईकोर्ट सख्त हुआ है। कोर्ट ने नगर निगम आयुक्त से हलफनामा मांगा। जांच से पहले सड़क सुधारने पर भी सवाल उठे। कोर्ट ने सैंपलिंग को सुरक्षित रखने के निर्देश दिए हैं।

ऐसे समझें क्या है पूरा मामला

  • ग्वालियर की एक खराब सड़क की जांच हाईकोर्ट की निगरानी में हो रही है।
  • जांच से दो दिन पहले सड़क के कुछ हिस्से ठीक कराए गए।
  • कोर्ट ने इस काम की अनुमति और रिकॉर्ड पर सवाल उठाए।
  • सीवर लाइन के 4.76 करोड़ रुपए के काम पर भी सवाल उठे।
  • अब सड़क के सैंपल पुलिस सुरक्षा में लिए जाएंगे।

ग्वालियर में सड़क निर्माण को लेकर हाईकोर्ट सख्त है। मामला बेटी बचाओ रोड से गुड़ा गुड़ी नाका तक का है। यह सड़क लंबे समय से खराब बताई गई थी। इसी सड़क की गुणवत्ता जांच के लिए सैंपल लेने थे। सैंपल लेने से दो दिन पहले सड़क सुधार दी गई। कोर्ट ने इस बदलाव को गंभीरता से लिया। पीठ ने पूछा कि मरम्मत की जरूरत अचानक क्यों पड़ी। कोर्ट ने यह भी पूछा कि इसकी अनुमति किसने दी।



नगर निगम आयुक्त से कोर्ट ने क्या पूछा

नगर निगम आयुक्त संघ प्रिय अदालत में खुद पहुंचे। उन्होंने सड़क की खराब हालत की जानकारी स्वीकार की। उन्होंने मरम्मत कराने की बात भी स्वीकार की। यह काम सैंपल लेने से दो दिन पहले हुआ था। कोर्ट ने मरम्मत के तकनीकी आधार पर सवाल किए। आयुक्त ने मिट्टी बैठने को सड़क खराब होने की वजह बताया। कोर्ट ने इसके समर्थन में तकनीकी रिकॉर्ड मांगा। मगर उस समय पूरा रिकॉर्ड पेश नहीं हो सका। इसके बाद कोर्ट ने कड़ी नाराजगी जताई।



60 मिनट में रिकॉर्ड पेश करने का आदेश

कोर्ट ने नगर निगम आयुक्त को 60 मिनट दिए। उन्हें टेंडर और काम से जुड़े कागज लाने थे। इसके बाद दोपहर 1:07 बजे सुनवाई फिर शुरू हुई। आयुक्त ने सीवर काम की कई जानकारी अदालत को दी। रिकॉर्ड के अनुसार टेंडर 31 जनवरी 2024 को निकला। काम का आदेश 9 जुलाई 2024 को जारी हुआ। इस काम की कीमत 4.76 करोड़ रुपए बताई गई। अब तक 2.75 करोड़ रुपए का भुगतान हुआ है। फिर भी काम पूरा होने का प्रमाण नहीं मिला।



सीवर लाइन के काम पर भी उठे सवाल

कोर्ट ने सीवर लाइन के काम की स्थिति पूछी। छह महीने में काम पूरा होना था। लेकिन काम समय पर पूरा नहीं हुआ। ठेकेदार को कई बार समय बढ़ाने की सुविधा मिली। पहले दिवाली का कारण बताया गया। इसके बाद बारिश को कारण बताया गया। कोर्ट ने समय बढ़ाने की प्रक्रिया पर सवाल उठाए। शुष्क मौसम में भी काम रुकने की बात सामने आई। इसके बाद भी समय सीमा बढ़ती रही।



सड़क की मरम्मत को लेकर कोर्ट क्यों नाराज हुआ

कोर्ट की नाराजगी सड़क की मरम्मत पर ज्यादा रही। जांच के लिए सैंपल पहले से तय थे। सैंपल लेने से ठीक पहले सड़क पर काम हुआ। इससे जांच के नतीजे प्रभावित होने का सवाल उठा। कोर्ट ने इसे गंभीर मामला माना। अदालत ने सड़क की जांच को पूरी तरह निष्पक्ष रखने को कहा। इसी वजह से सैंपलिंग की नई व्यवस्था तय हुई। अब सड़क चुनने में कमीशन को ज्यादा अधिकार मिलेंगे।



चार सैंपल लेकर अलग-अलग जगह भेजे जाएंगे

सड़क से चार अलग सैंपल लिए जाएंगे। पहला सैंपल जिला अदालत के मालखाने में रहेगा। दूसरा सैंपल पीएमजीएसवाई की जांच लैब में जाएगा। तीसरा सैंपल पीडब्ल्यूडी की लैब में भेजा जाएगा। चौथा सैंपल नगर निगम की सुरक्षित जगह रहेगा। इस व्यवस्था से जांच पर सवाल कम होंगे। किसी रिपोर्ट पर विवाद हुआ तो दोबारा जांच होगी। इसके लिए सुरक्षित सैंपल स्वतंत्र लैब भेजा जा सकेगा।



सैंपलिंग के दौरान पुलिस सुरक्षा रहेगी

ग्वालियर हाईकोर्ट ने सैंपलिंग के दौरान सुरक्षा बढ़ाने के निर्देश दिए। ग्वालियर एसपी को पूरी प्रक्रिया में मौजूद रहना होगा। पुलिस सड़क पर यातायात व्यवस्था भी संभालेगी। जरूरत पड़ने पर ट्रैफिक का रास्ता बदला जाएगा। सैंपलिंग की पूरी प्रक्रिया की वीडियो रिकॉर्डिंग होगी। इसके लिए स्वतंत्र फोटोग्राफर की मदद ली जाएगी। नगर निगम को इसका भुगतान समय पर करना होगा। इस व्यवस्था का मकसद जांच में पारदर्शिता रखना है।



सड़क की सूची अब पहले से तय नहीं होगी

कोर्ट ने पहले वाली सड़क सूची रद्द कर दी। अब कमीशन किसी भी सड़क का चुनाव कर सकेगा। इसमें मुख्य सड़क भी शामिल हो सकती है। आंतरिक सड़क भी जांच के लिए चुनी जा सकेगी। चुनी गई सड़क की जानकारी पहले नहीं दी जाएगी। रवानगी से करीब 30 मिनट पहले जानकारी दी जाएगी। इससे सड़क पहले से सुधारने की संभावना घटेगी। कोर्ट ने जांच को ज्यादा भरोसेमंद बनाने की कोशिश की है।



व्हाट्सऐप रिकॉर्ड और वीडियो भी जांच में आएंगे

ग्वालियर नगर निगम के व्हाट्सऐप निर्देश भी मांगे गए हैं। सड़क से जुड़े वीडियो और तस्वीरें भी मांगी गई हैं। इन डिजिटल रिकॉर्ड को पांच पेन ड्राइव में देना होगा। इससे आदेश देने और काम कराने की जानकारी मिलेगी। कोर्ट सड़क मरम्मत के पूरे घटनाक्रम को देखना चाहता है। किसने आदेश दिया और कब दिया, यह साफ होगा। इस रिकॉर्ड से जांच आगे बढ़ाने में मदद मिलेगी।



जांच में दखल देने वालों को चेतावनी

हाईकोर्ट ने जांच में दखल को गंभीर बताया। कोर्ट ने अवमानना की कार्रवाई की चेतावनी दी। सैंपलिंग में बाधा डालने पर सख्त कदम उठेंगे। जांच में किसी भी तरह का दबाव स्वीकार नहीं होगा। एक निजी लैब को लेकर भी अदालत में बात हुई। कोर्ट के सामने जांच से पीछे हटने की बात आई। अदालत ने इसे न्यायिक प्रक्रिया में दखल माना। इस मामले में आगे की कार्रवाई भी देखी जाएगी।



अब 25 अगस्त को फिर होगी सुनवाई

मामले की अगली सुनवाई 25 अगस्त 2026 को होगी। उस दिन सड़क की जांच रिपोर्ट देखी जाएगी। कोर्ट नगर निगम की कार्रवाई भी देखेगा। मुख्य सचिव स्तर पर हुई कार्रवाई भी सामने आएगी। इस मामले में अभी फर्जीवाड़ा साबित नहीं हुआ है। फिलहाल कोर्ट ने काम और जांच पर सवाल उठाए हैं। अंतिम निष्कर्ष जांच रिपोर्ट और रिकॉर्ड के बाद आएगा। इसी कारण मामले पर आगे की सुनवाई अहम होगी।



सड़क निर्माण में गड़बड़ी का असली सवाल

इस मामले ने शहर की सड़कों पर सवाल बढ़ाए हैं। सवाल केवल एक सड़क की गुणवत्ता का नहीं है। सवाल यह भी है कि सड़क खराब क्यों हुई। सीवर काम के बाद सड़क कितनी मजबूत बनी। ठेकेदार को समय पर काम पूरा क्यों नहीं कराया गया। भुगतान के बाद काम की गुणवत्ता कैसे जांची गई। जांच से पहले सड़क सुधारने की जरूरत क्यों पड़ी। अब हाईकोर्ट की निगरानी में इन सवालों के जवाब मिलेंगे।



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