ग्वालियर सड़क घोटाला: हाईकोर्ट के आदेश पर सैंपलिंग शुरू, सामने आएगी सच्चाई!
ग्वालियर की खराब सड़कों की गुणवत्ता अब जांच के दायरे में है। ग्वालियर हाईकोर्ट के आदेश पर बुधवार को वकीलों और तकनीकी टीम ने सड़कें खोदकर सैंपल लिए। सैंपल जांच के लिए भेजे गए हैं। अगली सुनवाई 25 अगस्त को होगी।
ग्वालियर की खराब सड़कों का मामला अब जांच तक पहुंच गया है। इस मामले में हाईकोर्ट की ग्वालियर बेंच में याचिका लगी है। याचिका अधिवक्ता अवधेश सिंह तोमर की ओर से लगाई गई है। मामले में लगातार सुनवाई के बाद जांच का रास्ता खुला।
बुधवार को कोर्ट के निर्देश पर सैंपलिंग की गई। वकीलों के साथ तकनीकी टीम भी मौके पर पहुंची। टीम ने सड़क की परतों से निर्माण सामग्री के नमूने लिए। इन नमूनों को अब गुणवत्ता जांच के लिए भेजा गया है।
सड़क की परत हटाकर लिए गए निर्माण सामग्री के नमूने
सैंपलिंग के लिए टीम पहले बेटी बचाओ चौराहे पहुंची। इसके बाद टीम गुड़ी गुड़ा का नाका भी पहुंची। दोनों जगह सड़क की परत काटकर सामग्री निकाली गई। मौके पर लिए गए नमूनों को सील किया गया। इस पूरी प्रक्रिया की निगरानी जांच टीम ने की। टीम ने मीडिया से बातचीत करने से दूरी बनाए रखी। सैंपलिंग के दौरान सड़क से सामग्री सावधानी से निकाली गई। इसके बाद नमूनों को जांच के लिए सुरक्षित किया गया।
एक सड़क से चार नमूने लेने की बात सामने आई
मिली जानकारी के अनुसार एक सड़क से चार नमूने लिए गए। इन नमूनों की अलग-अलग स्तर पर जांच होनी है। कुछ नमूने सरकारी प्रयोगशालाओं में भेजे जाएंगे। इनमें पीडब्ल्यूडी की लैब भी शामिल बताई गई है। ग्रामीण अभियांत्रिकी सेवा की लैब का भी इस्तेमाल होगा। एक नमूने की अलग लैब में जांच संभव है। इससे रिपोर्ट की दोबारा जांच का रास्ता खुल सकता है। हालांकि अंतिम लैब चयन की जानकारी स्पष्ट नहीं है।
पहले तय सड़कें बदली गईं, रैंडम सैंपलिंग पर जोर
सैंपलिंग को लेकर कोर्ट ने खास सावधानी बरती है। पहले कुछ तय सड़कों की जांच सूची बनाई गई थी। बाद में उस सूची को बदल दिया गया। इसके बाद रैंडम तरीके से सड़कें चुनी गईं। इस बदलाव का मकसद जांच को निष्पक्ष रखना बताया गया। किस सड़क से नमूना लिया जाएगा, यह पहले तय नहीं रहा। इससे जांच के नतीजों पर भरोसा बढ़ सकता है। अब रिपोर्ट में सड़क की वास्तविक गुणवत्ता सामने आएगी।
सैंपलिंग में दखल की शिकायत पर कोर्ट सख्त
सुनवाई के दौरान सैंपलिंग को लेकर सवाल भी उठे। प्राइवेट लैब पर दबाव की बात कोर्ट के सामने आई। इस पर हाईकोर्ट ने नाराजगी जताई। कोर्ट ने जांच प्रक्रिया को निष्पक्ष रखने पर जोर दिया। कोर्ट के आदेश का मुख्य उद्देश्य गुणवत्ता जांच है। रिपोर्ट आने के बाद आगे की तस्वीर साफ होगी। यदि कमी मिली, तो जिम्मेदारी तय हो सकती है। हालांकि अभी किसी जिम्मेदार पर आरोप तय नहीं हुआ।
जांच रिपोर्ट बताएगी सड़क कितनी मजबूत है
अब सबसे बड़ा सवाल सड़क की गुणवत्ता का है। क्या निर्माण सामग्री तय मानकों के मुताबिक है ? क्या सड़क की परत सही तरीके से बनाई गई ? इन सवालों के जवाब जांच रिपोर्ट से मिलेंगे। सड़क निर्माण में सामग्री की गुणवत्ता बेहद अहम होती है। कमजोर सामग्री से सड़क जल्दी खराब हो सकती है। ऐसे में लैब रिपोर्ट पूरे मामले में अहम होगी। रिपोर्ट आने के बाद ही ठोस निष्कर्ष निकलेगा।
सुबह से शाम तक चली जांच की प्रक्रिया
सड़क की सैंपलिंग एक तय प्रक्रिया के तहत की गई। टीम मौके पर पहुंची और सड़क की परत खोली। इसके बाद निर्माण सामग्री को अलग किया गया। हर नमूने को सुरक्षित तरीके से सील किया गया। पूरी प्रक्रिया में जांच टीम ने सावधानी बरती। नमूनों को जांच के लिए संबंधित लैब भेजा गया। अब इनकी रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है। रिपोर्ट आने के बाद अगली कानूनी कार्रवाई तय होगी।
25 अगस्त को हाईकोर्ट में फिर होगी सुनवाई
इस मामले में अगली सुनवाई 25 अगस्त को होगी। उस दिन सैंपल जांच की स्थिति सामने आ सकती है। लैब रिपोर्ट आई तो चर्चा का केंद्र वही रहेगी। रिपोर्ट में गुणवत्ता की स्थिति स्पष्ट हो सकती है। कोर्ट के सामने इसके बाद आगे की तस्वीर होगी। जरूरत पड़ने पर कोर्ट नए निर्देश भी दे सकता है। फिलहाल सड़क निर्माण की गुणवत्ता जांच जारी है।
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