ग्वालियर की सड़कें अब खोदकर जांचेगा हाईकोर्ट, निगम के आंकड़ों ने खोली पोल

Ratan Kumar Mishra | Aug 10, 2026, 23:34 IST
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ग्वालियर की खराब सड़कों पर हाईकोर्ट ने सख्ती दिखाई है। नगर निगम के आंकड़ों ने सड़क व्यवस्था की पोल खोली है। कोर्ट अब सड़कें खुदवाकर गुणवत्ता जांचेगा। पांच साल के खर्च का हिसाब भी मांगा गया है।

5 प्वाइंट में समझें क्या है पूरा मामला

  • ग्वालियर की खराब सड़कों का मामला हाईकोर्ट तक पहुंच गया है।
  • नगर निगम ने 129 प्रमुख सड़कों की जानकारी कोर्ट में दी।
  • इनमें 67 सड़कें खराब या काम चलाऊ बताई गई हैं।
  • अब कोर्ट सड़कें खुदवाकर उनकी असली गुणवत्ता जांचेगा।
  • पांच साल के खर्च और निर्माण रिकॉर्ड भी मांगे गए हैं।

ग्वालियर की सड़कों की हालत लंबे समय से सवालों में है। टूटी सड़कें और गड्ढे लोगों की परेशानी बढ़ा रहे हैं।।अब यह मामला मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की ग्वालियर बेंच पहुंचा है। मामले में जनहित याचिका दायर की गई है।



कैलाश चंद्र अग्रवाल ने यह याचिका दायर की है। याचिका में शहर की खराब सड़कों का मुद्दा उठाया गया। सड़क सुरक्षा और हादसों का भी इसमें जिक्र है। मामले की सुनवाई लगातार हाईकोर्ट में चल रही है।



नगर निगम के आंकड़ों ने खोली सड़क व्यवस्था की पोल

कोर्ट ने नगर निगम से सड़कों की पूरी जानकारी मांगी थी। निगम ने अपनी रिपोर्ट में 129 प्रमुख सड़कें बताईं। इन सड़कों की कुल लंबाई 140.58 किलोमीटर बताई गई है। रिपोर्ट के मुताबिक 62 सड़कें चलने लायक हैं।



34 सड़कें आंशिक रूप से खराब बताई गई हैं। 24 सड़कें पूरी तरह खराब बताई गई हैं। नौ सड़कों पर काम चल रहा है या प्रस्तावित है। इन आंकड़ों ने सड़क व्यवस्था पर बड़ा सवाल खड़ा किया। कुल मिलाकर 67 सड़कें खराब या काम वाली हैं। यह संख्या कुल सड़कों की करीब 52 प्रतिशत है।



अब सवाल सड़क की ऊपरी परत का नहीं रहेगा

कोर्ट अब सिर्फ कागजों पर भरोसा नहीं करेगा। सड़क की असली हालत जमीन पर जांची जाएगी। इसके लिए सड़क की परत तक खोदी जा सकती है। तकनीकी विशेषज्ञ जांच में मदद करेंगे। इस जांच से सड़क की गुणवत्ता सामने आ सकती है। यह देखा जाएगा कि सड़क कैसे बनाई गई थी। निर्माण में तय मानकों का पालन हुआ या नहीं। सड़क में इस्तेमाल सामग्री की गुणवत्ता भी देखी जाएगी। यानी अब सड़क की असली कहानी सामने आ सकती है।



कोर्ट बनाएगा स्वतंत्र जांच टीम, अफसर रहेंगे दूर

हाईकोर्ट ने जांच को लेकर अहम निर्देश दिए हैं। एक वकील की अध्यक्षता में कमिशन बनाया जा सकता है। तकनीकी विशेषज्ञ भी इस टीम का हिस्सा होंगे। जांच के दौरान नगर निगम अधिकारी मौजूद नहीं रहेंगे। इसका मकसद जांच को किसी प्रभाव से दूर रखना है।



ग्वालियर नगर निगम के वकील गौरव मिश्रा मौजूद रह सकेंगे। स्वतंत्र टीम मौके पर सड़क की जांच करेगी। इससे जांच की निष्पक्षता बनाए रखने की कोशिश होगी।



पांच साल का पैसा भी अब जांच के दायरे में

कोर्ट ने सड़क निर्माण से जुड़ा पुराना रिकॉर्ड भी मांगा है। पिछले पांच साल में खर्च रकम बतानी होगी। निर्माण के समय की गई सड़क माप भी देनी होगी। इन रिकॉर्ड से काम और खर्च की तस्वीर साफ होगी। कोर्ट रिकॉर्ड की तुलना जमीनी स्थिति से कर सकता है। यानी कागज और सड़क दोनों आमने सामने होंगे। यहीं से सड़क निर्माण की पूरी कहानी सामने आ सकती है।



पूर्व सिटी प्लानर का रिश्वत मामला भी उठा

सुनवाई के दौरान पूर्व सिटी प्लानर का नाम भी आया। प्रदीप वर्मा के रिश्वत मामले का जिक्र हुआ। बताया गया कि उन्हें रिश्वत लेते पकड़ा गया था। उनके खिलाफ आपराधिक मामला चलने की बात सामने आई।



कोर्ट ने इस मामले की प्रमाणित प्रति मांगी है। इस रिकॉर्ड को भी अदालत के सामने रखा जाएगा। हालांकि किसी आरोप से दोष साबित नहीं होता। अंतिम जिम्मेदारी जांच और अदालत के फैसले से तय होगी।



खराब सड़कें सिर्फ परेशानी नहीं, जान का खतरा भी

शहर की खराब सड़कें लोगों के लिए बड़ी परेशानी हैं। गड्ढों के कारण दोपहिया वाहन चालक गिर सकते हैं। चार पहिया वाहनों को भी नुकसान हो सकता है। बारिश में ऐसे गड्ढे और ज्यादा खतरनाक हो जाते हैं। रात में सड़क की खराब हालत का खतरा बढ़ता है।



बुजुर्ग और बच्चे ऐसे रास्तों पर ज्यादा जोखिम में रहते हैं। याचिका में जयारोग्य अस्पताल जाने वाले रास्तों का जिक्र भी है। खराब रास्तों से एंबुलेंस की आवाजाही प्रभावित हो सकती है। ऐसी स्थिति में कुछ मिनट भी बेहद अहम होते हैं।



कोर्ट की सख्ती से अब ठेकेदारों पर भी नजर

सड़क की जांच सिर्फ सरकारी रिकॉर्ड तक सीमित नहीं रहेगी। जमीनी जांच में निर्माण की गुणवत्ता भी सामने आएगी। अगर गड़बड़ी मिली तो जिम्मेदारी तय हो सकती है। जांच में ठेकेदारों की भूमिका भी सामने आ सकती है। अफसरों की भूमिका पर भी सवाल उठ सकते हैं।



हालांकि अभी किसी पर दोष तय नहीं हुआ है। फिलहाल पूरा मामला जांच के अगले चरण में है।



11 अगस्त की सुनवाई पर टिकी सबकी नजर

इस मामले में अगली सुनवाई 11 अगस्त 2026 को होगी। अगली सुनवाई में जांच से जुड़े निर्देश आ सकते हैं। कोर्ट कमिशन की भूमिका भी साफ कर सकता है। पांच साल के रिकॉर्ड को लेकर भी जानकारी मिल सकती है।



सबसे बड़ा सवाल सड़क की असली गुणवत्ता का रहेगा। अगर जांच में गड़बड़ी मिली तो मामला आगे बढ़ेगा।


फिलहाल ग्वालियर की सड़कों की नजर हाईकोर्ट पर है। अब सड़कें सिर्फ चलने के लिए नहीं खोदी जाएंगी।


उनकी परतों में छिपी सच्चाई भी तलाश की जाएगी।



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