ग्वालियर सड़क हादसा: भाई को बचाने 8 किलोमीटर दौड़ा सौरभ, हाइड्रा लाया पर नहीं बची जान, दास्तां कर देगी हैरान
लेकिन वह अपने भाई गौरव परिहार की जान नहीं बचा सका। ग्वालियर हादसे की यह कहानी बेबसी और दर्द बयां करती है। शीतला माता मंदिर के पास हुए इस हादसे ने कई परिवारों को तोड़ दिया। रिपोर्ट के मुताबिक, पुलिस ने चालक और ट्रक मालिक को गिरफ्तार कर लिया है।
ग्वालियर सड़क हादसा कैसे हुआ
ग्वालियर में शीतला माता मंदिर के पास मेले के दौरान सड़क हादसा हुआ। श्रद्धालु दर्शन के लिए मंदिर की ओर जा रहे थे। तभी एक ट्रक भीड़ में घुस गया। हादसे के बाद मौके पर अफरा-तफरी मच गई। लोग अपनी जान बचाने के लिए इधर-उधर भागने लगे।
एक रिपोर्ट के मुताबिक, ट्रक चालक गूगल मैप देखकर रास्ता तलाश रहा था। हादसे के बाद चालक और ट्रक मालिक को गिरफ्तार कर लिया गया है।
आठ किलोमीटर तक मदद की तलाश
सौरभ ने बताया कि दर्शन के लिए जाते समय अचानक हादसा हो गया। उसने देखा कि उसकी बहन का पैर ट्रक के टायर के नीचे दबा था। लेकिन उसे भाई गौरव कहीं नजर नहीं आया। उसे शक हुआ कि गौरव ट्रक के नीचे फंसा है।
गौरव को ट्रक के नीचे से निकालने के लिए मशीन की जरूरत थी। सौरभ ने पुलिसकर्मियों से क्रेन या हाइड्रा मंगवाने को कहा। पुलिसकर्मियों ने कुछ ही मिनटों में मदद पहुंचने का भरोसा दिया। लेकिन सौरभ ने इंतजार नहीं किया। वह खुद मदद की तलाश में निकल गया।
लिफ्ट लेकर पहुंचा विक्ट्री फैक्टरी
सौरभ ने रास्ते में कई गाड़ियां रोकने की कोशिश की। लेकिन कई वाहन चालकों ने गाड़ी नहीं रोकी। कुछ लोगों ने उसे लिफ्ट दी, जिसके बाद वह विक्ट्री फैक्टरी पहुंचा। वहां उसने 800 रुपए का ऑनलाइन भुगतान किया। इसके बाद वह हाइड्रा लेकर घटनास्थल पर लौट आया।
ट्रक उठाया गया, पर देर हो चुकी थी
हाइड्रा की मदद से ट्रक को उठवाया गया। लेकिन तब तक गौरव परिहार की मौत हो चुकी थी। अपने भाई को बचाने की सौरभ की हर कोशिश अधूरी रह गई।
सौरभ के इस संघर्ष का वीडियो भी सामने आया है। वीडियो हादसे के बाद की अफरा-तफरी और बेबसी दिखाता है। यह घटनाक्रम रिपोर्ट में सौरभ के बयान और वीडियो के आधार पर बताया गया है।
आठ किलोमीटर का मतलब क्या है
आठ किलोमीटर की दूरी करीब 80 फुटबॉल मैदानों की लंबाई के बराबर है। रिपोर्ट के मुताबिक, सौरभ ने यह दूरी भागकर और लिफ्ट लेकर तय की है। ऐसे हादसों में हर मिनट बहुत कीमती होता है।
सौरभ की कोशिश दिखाती है कि अपनों के लिए इंसान कितनी दूर जा सकता है। लेकिन इस बार समय ने साथ नहीं दिया। शीतला माता मंदिर हादसे ने कई परिवारों को गहरा दुख दिया।
हादसे में बुझे कई घरों के चिराग
इस हादसे ने कई परिवारों की खुशियां छीन लीं हैं। मृतकों में एक किशोर और उसके ताऊ भी शामिल हैं। दोनों परिवार के साथ मेले में दर्शन करने आए थे। किशोर के माता-पिता और परिवार के अन्य सदस्य गंभीर रूप से घायल हैं। सभी का इलाज अस्पताल के ट्रॉमा सेंटर में चल रहा है।
हादसे के बाद पूरे इलाके में शोक का माहौल है। शिवपुरी जिले की 20 वर्षीय जाह्नवी भी हादसे में घायल हुई। वह अपनी बहन और सहेली के साथ मंदिर आई थी। हादसे में उसका पैर भी फ्रैक्चर हो गया।
जाह्नवी को लगा जैसे तूफान आ गया
जाह्नवी के मुताबिक, तेज रफ्तार ट्रक अचानक लोगों के बीच घुस गया। उसे ऐसा लगा, जैसे कोई भयानक तूफान आ गया हो। श्रद्धालुओं को संभलने या कुछ समझने का मौका नहीं मिला। देखते ही देखते चारों तरफ चीख-पुकार मच गई। लोग अपनी जान बचाने के लिए भागने लगे। इसी अफरा-तफरी में जाह्नवी भी गिर गई। उसने बताया कि मृतकों में उसके गांव के दो लोग भी शामिल थे।
कुल कितने लोग हुए हादसे का शिकार
रिपोर्ट के मुताबिक, इस हादसे में 15 लोगों की जान गई और 26 लोग घायल हुए हैं। यानी कुल 41 लोग हादसे की चपेट में आए। मरने वालों में गौरव परिहार, एक किशोर और उसके ताऊ भी शामिल हैं। हर घायल और मृतक के पीछे एक पूरा परिवार है।
FAQ
- ग्वालियर के शीतला माता मंदिर हादसे में कितने लोगों की मौत हुई?
रिपोर्ट के मुताबिक इस हादसे में 15 लोगों की मौत हुई और 26 लोग घायल हुए हैं। - सौरभ परिहार ने अपने भाई को बचाने के लिए क्या कदम उठाए?
सौरभ ने अपने भाई को बचाने के लिए 8 किलोमीटर तक मदद की तलाश की। उसने 800 रुपए का ऑनलाइन भुगतान कर हाइड्रा मंगवाया, लेकिन ट्रक हटाने के बाद भी गौरव की जान नहीं बचाई जा सकी। - ट्रक चालक और मालिक के बारे में क्या जानकारी है?
रिपोर्ट के अनुसार ट्रक चालक और ट्रक मालिक को गिरफ्तार किया गया है और कहा गया है कि चालक गूगल मैप देखकर रास्ता तलाश रहा था।