आईपीएस राजेश सिंह चंदेल समेत 4 पुलिसकर्मियों पर डकैती का केस, ये है पूरा मामला
भोपाल ग्रामीण में तैनात डीआईजी राजेश सिंह चंदेल (तत्कालीन SP ग्वालियर) और तीन अन्य पुलिसकर्मियों पर ग्वालियर कोर्ट के आदेश से लूट-डकैती का मामला दर्ज किया गया है। जिला न्यायालय में एडीजे सुनील दंडोतिया ने सोमवार, 11 मई को परिवाद स्वीकार करते हुए इस पर आदेश दिया है। इसके साथ ही, कोर्ट ने सभी आरोपियों को 22 जून 2026 को तलब किया है।
जबरन वसूली और धमकी से जुड़ा मामाल
यह मामला 2023-24 में ग्वालियर के ठाटीपुर थाने में कथित जबरन वसूली और धमकी से जुड़ा हुआ है। परिवाद में तत्कालीन थाना प्रभारी सुरेंद्र नाथ यादव, एसआई अजय सिंह सिकरवार और साइबर आरक्षक संतोष वर्मा पर लाखों रुपए की वसूली, धमकी और झूठे मामलों में फंसाकर जेल भेजने के आरोप लगाए गए हैं।
30 लाख रुपए वसूले
एडवोकेट अशोक प्रजापति के मुताबिक, परिवादी अनूप राणा ने आरोप लगाया कि दिसंबर 2023 में 420 के एक मामले में समझौता कराने के नाम पर पहले उनसे 5.80 लाख रुपए लिए गए। इसके बाद 24 दिसंबर 2023 को थाने बुलाकर उन्हें 25 लाख रुपए और मंगवाए गए थे।
इसके बाद भी पुलिस की मांग नहीं रुकी। आरोप है कि तुरंत 6 लाख रुपए और अगले दो दिनों में 30 लाख रुपए अतिरिक्त देने का दबाव बनाया गया।
शिकायत की, उल्टा जेल गए
एडवोकेट अशोक प्रजापति ने बताया कि जब अनूप राणा ने तत्कालीन SP राजेश चंदेल से लिखित शिकायत की, तो उन पर कोई कार्रवाई नहीं हुई। आरोप है कि शिकायत दोबारा थाटीपुर थाने को ही भेज दी गई। इसके बाद पुलिस ने 18 जनवरी 2024 को अनूप राणा को एक ऐसे मामले में साजिशकर्ता बताकर जेल भेज दिया, जिसमें उसका नाम तक नहीं था। बाद में 8 फरवरी 2024 को उसे हाईकोर्ट से जमानत मिली थी।
CCTV फुटेज डिलीट का मामला
अदालत ने सुनवाई के दौरान थाटीपुर थाने के CCTV फुटेज मांगे। पुलिस का जवाब था कि 3 जनवरी 2024 से पहले के सभी फुटेज डिलीट हो चुके हैं। कोर्ट ने इस जवाब पर कड़ी नाराजगी जताई। परिवादी ने कोर्ट को यह भी बताया था कि पैसों से भरे बैग का रंग क्या था, ताकि फुटेज से पुष्टि हो सके।
मामले की जांच एडिशनल SP रेडियो से भी कराई गई। जांच में यह स्पष्ट हुआ कि फुटेज वाकई डिलीट हो चुके हैं। परिवाद के साथ लगाए गए एक कारण बताओ नोटिस में भी थाने के स्टाफ से इसका जवाब मांगा गया था।
SP पर आरोप क्यों?
परिवाद में दावा किया गया है कि इतनी बड़ी रकम की वसूली बिना तत्कालीन थाना प्रभारी और SP (आईपीएस राजेश सिंह चंदेल) की जानकारी के संभव नहीं थी। इसी आधार पर सभी आरोपियों पर आपराधिक षड्यंत्र की धारा 120-बी के तहत भी केस दर्ज किया गया है। तत्कालीन थाना प्रभारी सुरेंद्र नाथ यादव, एसआई अजय सिंह सिकरवार और साइबर आरक्षक संतोष वर्मा मुख्य आरोपियों में शामिल हैं।
डकैती एक्ट में जमानत नहीं
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के रिटायर्ड जज जस्टिस दीपक अग्रवाल ने इस मामले पर अपनी राय दी। उनके अनुसार डकैती एक्ट में अग्रिम जमानत का कोई प्रावधान नहीं है। इसका मतलब यह है कि सत्र न्यायालय इस मामले में आरोपियों को जमानत नहीं दे सकता। केवल हाई कोर्ट ही ऐसे मामलों में जमानत दे सकता है। ऐसे में सभी आरोपी पुलिसकर्मियों को गिरफ्तारी से बचने के लिए हाईकोर्ट की शरण लेनी होगी।
पुलिस का पक्ष क्या है?
पुलिस का दावा है कि यह मामला नौकरी के नाम पर ठगी करने वाले एक गिरोह की जांच से जुड़ा था। पुलिस के अनुसार अनूप राणा और उसका भाई उसी रैकेट का हिस्सा थे। वहीं अनूप राणा का कहना बिल्कुल अलग है। उनका कहना है कि वह खुद ठगी का शिकार हुए थे। साथ ही, भाई की मदद के लिए थाने गए थे। उनका आरोप है कि पुलिस ने असली आरोपियों को बचाते हुए उनसे ही लाखों रुपए वसूले और झूठे केस में फंसा दिया।
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