एमपी में सरकारी बजट का अजब खेल: स्कूल के लिए जमीन नहीं, हॉस्टल पर 1.39 करोड़ हुए खर्च

Arohi Raj | Sootr Creatives | Nov 03, 2026, 09:55 IST
स्कूल के लिए जमीन नहीं मिली, लेकिन छात्राओं के हॉस्टल पर1.39 करोड़ रुपए खर्च किए गए।
In a village in the Harda district of Madhya Pradesh, while land could not be found for a school, a 50-bed hostel for female students was constructed.
मध्य प्रदेश के एक गांव में सरकारी खर्च की अजीब तस्वीर सामने आई है। यहां 8वीं तक के स्कूल के लिए जमीन नहीं मिल सकी। लेकिन दो एससी छात्राओं के लिए 50 सीटर हॉस्टल बना दिया गया। इस पर सरकार ने 1 करोड़ 39 लाख 50 हजार रुपए खर्च किए। हॉस्टल बनने में 13 साल लग गए।

हैरानी की बात है कि इतना पैसा खर्च होने के बाद भी हॉस्टल शुरू नहीं हुआ। यह गांव जनजातीय कार्य मंत्री विजय शाह का गृहग्राम मकड़ाई है। टिमरनी विधायक अभिजीत शाह और पूर्व विधायक संजय शाह भी इसी गांव से जुड़े हैं।



गांव में एससी वर्ग की सिर्फ दो छात्राएं हैं। ऐसे में 50 छात्राओं की क्षमता वाला हॉस्टल बनाने का फैसला सवालों के घेरे में है। आखिर इस हॉस्टल की जरूरत किसे थी? निर्माण पूरा होने के बाद भी यह अब तक बंद क्यों है? सरकारी पैसे के इस्तेमाल और अधिकारियों की जवाबदेही पर ये सवाल खड़े हो रहे हैं।



13 साल में 1.39 करोड़ पहुंचा 86 लाख का प्रोजेक्ट

खबरों के मुताबिक, मकड़ाई में एससी छात्राओं के लिए हॉस्टल बनाने की योजना 2013 में शुरू हुई। 19 मार्च 2013 को इसके लिए 86 लाख रुपए मंजूर हुए। इसके बाद भवन निर्माण का काम शुरू कर दिया गया। साल 2014 में योजना में कर्मचारियों के क्वार्टर भी जोड़ दिए गए। इसके बाद बजट बढ़ाकर 1 करोड़ 5 लाख रुपए कर दिया गया। हालांकि, निर्माण की रफ्तार काफी धीमी रही। काम पूरा होने में लगातार देरी होती गई।



इस दौरान निर्माण की लागत भी लगातार बढ़ती गई। बाद में विभाग ने रिवाइज्ड एस्टीमेट तैयार किया। आखिरकार जुलाई 2026 में भवन का निर्माण पूरा हुआ। तब तक कुल लागत 1 करोड़ 39 लाख 50 हजार रुपए पहुंच गई। शुरुआती मंजूरी के मुकाबले 53 लाख 50 हजार रुपए ज्यादा खर्च हुए। इस तरह 13 साल बाद 50 सीटों वाला हॉस्टल तैयार हुआ। लेकिन अब तक छात्राओं को इसका लाभ नहीं मिल पाया है।



स्कूल के लिए जगह नहीं, कैसे बना 50 सीटर हॉस्टल?

जानकारी के मुताबिक, मकड़ाई गांव में शिक्षा की व्यवस्था भी सवालों के घेरे में है। यहां शंकरशाह रघुनाथ शाह शासकीय आदिवासी बालक आश्रम संचालित है। इस आश्रम में पहली से 8वीं तक की क्लास लगती हैं। स्कूल में कुल 83 बच्चे हैं। इनमें मकड़ाई गांव के सिर्फ 15 छात्र शामिल हैं।



मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, करीब दो साल पहले तक स्कूल किराए के भवन में चलता था। यह भवन प्राचीन कचहरी का था। लेकिन एक दिन आंधी से इसकी छत ढह गई। इसके बाद स्कूल को आश्रम में शिफ्ट करना पड़ा। तब से बच्चे इसी व्यवस्था में पढ़ाई कर रहे हैं।



हैरानी की बात है कि प्रशासन स्कूल के लिए जमीन नहीं खोज पाया। दूसरी ओर, इसी गांव में 50 सीटों का हॉस्टल बनाया गया। ऐसे में सरकारी योजनाओं की प्राथमिकता पर सवाल उठ रहे हैं।



रोजगार के साधन नहीं, गांव छोड़ने को मजबूर लोग

मीडियो रिपोर्ट के मुताबिक, मकड़ाई पहाड़ी पर बसा एक ऐतिहासिक गांव है। यहां की आबादी अब करीब 100 रह गई है। गांव में केवल 15 घर बचे हैं। रोजगार के साधन कम होने से लोग पलायन कर रहे हैं। कई लोग मजदूरी के लिए दूसरे इलाकों में जा रहे हैं। वे सिराली और खुटिया जैसे क्षेत्रों में काम करने जाते हैं। गांव से लगातार हो रहे पलायन के बीच हॉस्टल की जरूरत पर सवाल हैं।



बिल्डिंग तैयार, इस्तेमाल की मंजूरी का इंतजार

खबरों के मुताबिक, हॉस्टल का निर्माण जुलाई 2026 में पूरा हो चुका है। इसके बावजूद हॉस्टल का संचालन अब तक शुरू नहीं हो पाया। इसकी वजह विभागों के बीच अटकी हैंडओवर प्रक्रिया है। जानकारी के मुताबिक, पब्लिक वर्क्स डिपार्टमेंट (PWD), प्रोजेक्ट इम्प्लांटेशन यूनिट (PIU) और आदिम जाति कल्याण विभाग के बीच प्रक्रिया चल रही है। भवन सौंपने से जुड़ी फाइलें अभी विभागों के बीच घूम रही हैं। इस देरी का असर भवन की हालत पर भी दिख रहा है।



हॉस्टल निर्माण में देरी पर होगी जांच

जानकारी के मुताहिक, हरदा कलेक्टर कुमार सत्यम ने मामले की जांच कराने की बात कही है। उन्होंने कहा कि हॉस्टल बनाने में देरी की वजह पता की जाएगी। जल्द ही भवन का इस्तेमाल शुरू कराया जाएगा। स्कूल के लिए जमीन दिलाने के प्रयास भी किए जा रहे हैं।



वहीं, पीडब्ल्यूडी पीआईयू की ईई गुरनीत कौर भाटिया ने भी जानकारी दी। उन्होंने बताया कि हॉस्टल का निर्माण पूरा हो चुका है। भवन सौंपने के लिए आदिम जाति कल्याण विभाग को पत्र लिखा है।



FAQs



  1. मकड़ाई में 50 सीटों का एससी छात्रावास कब बना और इसकी कुल लागत क्या है?
    मकड़ाई में 50 सीटों वाले एससी छात्रावास का निर्माण 2013 में 86 लाख रुपए की मंजूरी के बाद शुरू हुआ और इसकी कुल लागत 1 करोड़ 39 लाख 50 हजार रुपए तक पहुंच गई है।
  2. मकड़ाई में स्कूल के लिए जमीन क्यों नहीं मिल पाई है?
    अद्यतन रिपोर्ट के अनुसार, मकड़ाई में स्कूल के लिए अब तक जमीन की तलाश नहीं की जा सकी है, जबकि कक्षाएं वर्तमान में आदिवासी बालक आश्रम में चल रही हैं।
  3. हॉस्टल तैयार होने के बावजूद छात्राएं उसमें क्यों नहीं रह पा रही हैं?
    हॉस्टल का निर्माण पूर्ण होने के बावजूद, यह आदिम जाति कल्याण विभाग को हैंडओवर नहीं हुआ है, जिसकी प्रक्रिया अभी पीडब्ल्यूडी और अन्य विभागों के बीच अटकी हुई है।
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