संन्यास के बाद उज्जैन में हर्षा रिछारिया का पहला प्रवचन, भक्तों की भारी भीड़
News in Short
- साध्वी हर्षा रिछारिया ने संन्यास के एक महीने बाद अपना पहला प्रवचन दिया।
- रिछारिया ने देवी शक्ति और 52 शक्तिपीठों के महत्व पर करीब डेढ़ घंटे व्याख्यान दिया।
- प्रवचन में हर्षा ने राजा दक्ष और माता सती की कथा से शुरुआत की।
- हर्षा ने महादेव और आदिशक्ति के रिश्ते को स्पष्ट किया।
- भाजपा प्रवक्ता राजपाल सिंह सिसोदिया समेत कई नेता श्रद्धालुओं के साथ कार्यक्रम में शामिल हुए।
News in Detail
पूर्व मॉडल और सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर हर्षा रिछारिया ने संन्यास लेने के एक माह के भीतर ही अपने प्रवचन की शुरुआत की है। शुक्रवार को उज्जैन से करीब 22 किलोमीटर दूर लक्ष्मीपुरा गांव में आयोजित 108 कुंडीय यज्ञ के दौरान उन्होंने अपना पहला सार्वजनिक प्रवचन दिया। इस प्रवचन में हर्षा ने देवी शक्ति, माता सती और 52 शक्तिपीठों के महत्व पर करीब डेढ़ घंटे तक व्याख्यान दिया। भीषण गर्मी के बावजूद बड़ी संख्या में श्रद्धालु उनके प्रवचन को सुनने पहुंचे।
प्रवचन की शुरुआत
प्रवचन में हर्षा ने राजा दक्ष और माता सती की कथा से शुरुआत की। उन्होंने बताया कि बिना निमंत्रण कहीं नहीं जाना चाहिए। साथ ही, 52 शक्तिपीठों और हिंदी वर्णमाला के 52 अक्षरों को जोड़ते हुए धार्मिक व्याख्या दी।
देवी शक्ति और 52 शक्तिपीठों की व्याख्या
हर्षा ने प्रवचन में कहा कि हिंदी वर्णमाला में जैसे 52 शब्द होते हैं, वैसे ही शक्ति पीठ भी 52 हैं। इनसे ही बीज मंत्र उत्पन्न हुए, जो वर्णमाला की रचना का आधार बने। उन्होंने शक्ति पीठों की मान्यता और उनके दर्शन की प्रक्रिया को भी विस्तार से समझाया। हर्षा ने बताया कि पहले पूरी पृथ्वी सनातनी थी और शक्ति पीठों से ही संपूर्ण शक्ति का प्राकट्य हुआ था।
हर्षा रिछारिया का आत्मविश्वास
अपने पहले प्रवचन के दौरान हर्षा रिछारिया मंच पर थोड़ी घबराई हुई नजर आईं। हालांकि, उन्होंने गुरु और माता के आशीर्वाद को श्रेय देते हुए कहा कि यह उनके लिए एक अलग अनुभव था। कैमरे के सामने बोलना और हजारों लोगों के सामने अपनी बात रखना अलग था, लेकिन उनके विश्वास ने उन्हें मंच पर आने की प्रेरणा दी।
गुरु और माता की कृपा का महत्व
प्रवचन के दौरान हर्षा ने कहा कि बिना गुरु और माता रानी की कृपा के बिना कथा संभव नहीं है। उन्होंने कहा कि "आप हैं तो हम हैं" और देवी चेतना और जागृति के स्वरूप को बताया। उनका मानना था कि देवी कथा सुनना भी माता रानी की विशेष कृपा से ही संभव होता है।
महादेव और आदिशक्ति का संबंध
प्रवचन में हर्षा ने महादेव और आदिशक्ति के रिश्ते को स्पष्ट किया। उन्होंने कहा कि महादेव और आदिशक्ति एक-दूसरे के बिना अधूरे हैं। जैसे माता-पिता का समान महत्व होता है, वैसे ही शिव और शक्ति भी कभी अलग नहीं हो सकते। हर्षा ने कहा कि शक्ति के बिना शिव भी शून्य हैं और दोनों एक-दूसरे के पूरक हैं।
संन्यास ग्रहण करना
हर्षा रिछारिया ने 19 अप्रैल को उज्जैन स्थित मौनी आश्रम में संन्यास ग्रहण किया था। संन्यास के बाद उन्होंने अपना नाम ‘स्वामी हर्षानंद गिरी’ रखा। सोशल मीडिया पर उनके संन्यास को लेकर कई सवाल उठे थे, लेकिन उन्होंने हमेशा अपने विरोधियों को शांतिपूर्वक जवाब दिया है।
प्रमुख नेताओं की उपस्थिति
प्रवचन के दौरान हर्षा के चरण स्पर्श करने के लिए कई लोग पहुंचे, जिनमें भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता राजपाल सिंह सिसोदिया समेत कई स्थानीय नेता और श्रद्धालु शामिल थे। कार्यक्रम के बाद श्रद्धालुओं ने उन्हें दक्षिणा भी भेंट की। लक्ष्मीपुरा, कायथा और आसपास के गांवों से बड़ी संख्या में लोग कार्यक्रम में शामिल हुए थे।
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