मॉडल से संन्यासी बनीं हर्षा रिछारिया ने लव जिहाद पर युवतियों को चेताया, बांटी तलवारें
News in short
- स्वामी हर्षानंद गिरी ने लव जिहाद पर चेतावनी दी।
- युवतियों को आत्मरक्षा और शस्त्र प्रशिक्षण की सलाह दी।
- नशे और ड्रग्स के बढ़ते प्रभाव पर चिंता जताई।
- सनातन धर्म के प्रति समर्पण की शपथ दिलाई।
- सरकारी आयोजनों पर सादगी अपनाने का आह्वान किया।
News in detail
उज्जैन में हर्षा रिछारिया ने 'स्वामी हर्षानंद गिरी' के नाम से संन्यास लिया। उन्होंने महिलाओं को सशक्त करने और लव जिहाद के खिलाफ जागरूक करने के लिए प्रवचन शुरू किए। हाल ही में देवी प्रवचन के समापन पर उन्होंने युवतियों को तलवारें बांटी। उन्होंने आत्मरक्षा और धर्म के प्रति समर्पण का संदेश दिया।
लव जिहाद पर चेतावनी
स्वामी हर्षानंद गिरी ने युवतियों को लव जिहाद से सतर्क रहने के लिए कड़े शब्दों में चेतावनी दी। उन्होंने कहा कि हिंदू लड़कियों को सुनियोजित तरीके से निशाना बनाया जा रहा है। यह एक गंभीर समस्या है, जिसे अब खड़ा होकर सामना करना चाहिए। उनका संदेश था, किसी दूसरे धर्म के बहकावे में मत आना, अपने धर्म और संस्कृति से जुड़ना चाहिए।
आत्मरक्षा का संदेश
अपने प्रवचन में स्वामी हर्षानंद गिरी ने युवतियों को तलवारबाजी, शस्त्र प्रशिक्षण, और घुड़सवारी सीखने का सुझाव दिया। उन्होंने यह कहा कि आत्मरक्षा का यह अभ्यास शारीरिक शक्ति से कहीं अधिक, आत्मबल और आत्मविश्वास बढ़ाने में मदद करेगा। उनके अनुसार, समाज में महिलाओं को मजबूत और सशक्त बनाने के लिए यह कदम उठाना अत्यंत आवश्यक है।
नशे से सतर्क रहने की अपील
स्वामी हर्षानंद गिरी ने समाज में बढ़ते नशे और ड्रग्स की प्रवृत्तियों पर भी चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि लड़कियों को पैसे कमाने के नाम पर ड्रग्स की ओर धकेला जा रहा है, और यह समाज की गंभीर समस्या बन चुकी है। उन्होंने समाज के हर वर्ग से अपील की कि वे इस दिशा में जागरूकता फैलाएं और युवतियों को सुरक्षा प्रदान करें।
सनातन धर्म के प्रति समर्पण
साध्वी हर्षानंद ने युवतियों से सनातन धर्म के प्रति सच्चे समर्पण की शपथ भी दिलाई। उन्होंने कहा कि यह समय है जब हमें अपने धर्म को न केवल मानना, बल्कि उसे बचाए रखने की जिम्मेदारी भी उठानी चाहिए। उनका मानना है कि सनातन धर्म में मानसिक और शारीरिक ताकत भी निहित है। इसलिए, युवतियों को इसे आत्मसात करना चाहिए।
सरकारी आयोजनों पर सादगी का आह्वान
स्वामी हर्षानंद गिरी ने समाज के सशक्तिकरण के लिए सरकारों से खर्च कम करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि जब तक समाज की समस्याएं हल नहीं होतीं, तब तक बड़े आयोजनों पर खर्च करना असंवेदनशीलता है। उन्होंने सादगी और मितव्ययिता अपनाने का सुझाव दिया। यह संदेश देना चाहिए कि समाज की समस्याओं का समाधान किया जा रहा है।
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