हर्षा रिछारिया के संन्यास पर भड़के संत अनिलानंद, कहा-सनातन धर्म का घोर अपमान

Aman Vaishnav | Apr 23, 2026, 11:48 IST
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महाकुंभ की चर्चित हर्षा रिछारिया ने उज्जैन के मौनी तीर्थ आश्रम में आधिकारिक तौर पर संन्यास की दीक्षा ली है। इसे लेकर मध्य प्रदेश के संत समाज में एक नया विवाद छेड़ दिया है। संत समिति ने इस दीक्षा पर कई गंभीर सवाल उठाए हैं।

मॉडल से साध्वी बनीं हर्षा रिछारिया (harsha richhariya) अब स्वामी हर्षानंद गिरि के नाम से जानी जाएंगी। उन्होंने आधिकारिक रूप से संन्यास ले लिया है। उज्जैन के मौनी तीर्थ आश्रम में उन्हें महामंडलेश्वर सुमनानंदजी महाराज ने दीक्षा दी है।



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हर्षा के संन्यास पर महाराज अनिलानंद की आपत्ति

वहीं दूसरी ओर उनके संन्यास पर मध्य प्रदेश संत समिति के अध्यक्ष महाराज अनिलानंद ने आपत्ति जताई है। महाराज अनिलानंद ने कहा कि यह पूरा मामला गलत है और सनातन धर्म की मर्यादा के खिलाफ है।



उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा 900 चूहे खाकर बिल्ली हज नहीं जा सकती। उन्होंने कहा कि हर्षा ने पहले प्रयागराज कुंभ में संन्यास लेने का दावा किया था।



बाद में उसने सनातन धर्म के खिलाफ अपमानजनक बातें कहीं थी। ऐसे व्यक्ति का संन्यास लेना सही नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि हर्षा को दीक्षा देने वाले सुमनानंदजी महाराज की जांच होनी चाहिए।



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सनातन धर्म का घोर अपमान

महाराज अनिलानंद ने कहा कि हर्षा रिछारिया पहले भी धार्मिक आयोजनों को लेकर विवादित रही हैं। ऐसे व्यक्ति का संन्यास लेना संदेह पैदा करता है। उन्होंने कहा कि संन्यास एक पवित्र और अनुशासित परंपरा है। इसे कोई भी अचानक नहीं अपना सकता है।



महाराज ने यह भी कहा कि जो लोग पहले अलग तरह का जीवन जी रहे थे वे अचानक संन्यास लेकर सम्मान की उम्मीद नहीं कर सकते हैं। यह हमारे सनातन धर्म का घोर अपमान है।



सुमनानंद महाराज की भूमिका पर उठाए सवाल

मध्य प्रदेश संत समिति के अध्यक्ष महाराज अनिलानंद ने अखाड़ा परिषद से इस मामले में हस्तक्षेप करने की अपील की है। उन्होंने कहा कि जो लोग सनातन धर्म को निशाना बनाने की कोशिश करते हैं, उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए।



उन्होंने हर्षा रिछारिया को संन्यास दिलाने वाले महामंडलेश्वर सुमनानंदजी महाराज की भूमिका पर भी सवाल उठाए हैं। उन्होंने दीक्षा दिलाने की जांच करने की मांग की है।



साथ ही कहा कि संन्यास एक गहरी और लंबी प्रक्रिया है। इसे बचपन से साधना और अनुशासन के साथ अपनाना पड़ता है। संन्यास लेने वाले को वर्षों तक कठोर नियमों का पालन करना पड़ता है।



राज्य सरकार का हवाला दिया

महामंडलेश्वर अनिलानंद महाराज ने चेतावनी देते हुए कहा कि, उज्जैन में होने वाले आगामी धार्मिक आयोजनों के चलते इस तरह के मामलों को गंभीरता से लिया जाना चाहिए। उन्होंने राज्य सरकार का हवाला देते हुए कहा कि अगर सनातन परंपरा से कोई छेड़छाड़ की गई तो कड़ी कार्रवाई की जा सकती है।



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