हर्षा रिछारिया का संतों को खुला चैलेंज : 'विदेशी फंडिंग साबित करो वरना एक करोड़ दो'

Sanjay Dhiman | Apr 25, 2026, 20:23 IST
Photograph: (the sootr)
उज्जैन की स्वामी हर्षानंद गिरि (पहले हर्षा रिछारिया) ने संतों के आरोपों पर पलटवार करते हुए विदेशी फंडिंग को नकारा और एक करोड़ का मानहानि दावा ठोकने की चेतावनी दी है।

हर्षानंद गिरि (पहले हर्षा रिछारिया) ने हाल ही में एक वीडियो जारी कर संतों द्वारा लगाए गए आरोपों का जवाब दिया। उन्होंने विदेशी फंडिंग के आरोपों को नकारते हुए कहा कि अगर इन आरोपों में एक भी सत्यता निकली, तो वह अपनी पूरी संपत्ति दान कर देंगी। हर्षानंद ने यह भी कहा कि यदि यह आरोप गलत साबित होते हैं, तो वह संबंधित पक्ष से ₹1 करोड़ मानहानि की मांग करेंगी। हर्षानंद गिरि ने अपनी बैंक डिटेल्स सार्वजनिक करने की पेशकश भी की।



संन्यास पर सवाल और सेहत की चिंता

हर्षानंद गिरि ने अपनी सेहत के बारे में हो रही आलोचनाओं पर भी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने बताया कि डॉक्टर की सलाह पर उन्होंने चश्मा पहना है, लेकिन इस पर फैशन का आरोप लगाया जा रहा है। उन्होंने कहा, "क्या मुझे अपनी सेहत का ध्यान रखने का भी अधिकार नहीं है?" उनका कहना था कि उनके आध्यात्मिक जीवन के बारे में बिना किसी सही जानकारी के आरोप लगाए जा रहे हैं।



संन्यास पर महिलाओं को निशाना क्यों?

हर्षानंद ने सवाल उठाया कि क्यों एक महिला का संन्यास लेना विवाद का कारण बनता है? उन्होंने इसे जेंडर भेदभाव बताया और कहा, "अगर पुरुष संन्यास लेते हैं, तो कोई सवाल नहीं उठाता, लेकिन जब एक महिला संन्यास लेती है तो विवाद क्यों होता है?"



संत समाज और विवाद

कुछ दिन पहले, संत समाज के अध्यक्ष अनिलानंद महाराज ने हर्षानंद के संन्यास पर सवाल उठाए थे। उन्होंने कहा था कि बार-बार संन्यास लेने की प्रक्रिया सनातन परंपराओं का मजाक बना रही है। उन्होंने यह भी दावा किया था कि यह सब पब्लिसिटी के लिए किया जा रहा है।



हर्षा के संन्यास पर संतों का विरोध

हर्षा रिछारिया के संन्यास लेने के बाद मध्य प्रदेश संत समिति के अध्यक्ष अनिलानंद महाराज ने कहा कि यह पूरी प्रक्रिया सनातन धर्म के विपरीत है। उन्होंने कहा कि संन्यास एक गहन और दीर्घकालिक प्रक्रिया है, जिसे केवल वे लोग अपना सकते हैं, जिन्होंने लंबे समय तक साधना की हो।



हर्षानंद ने आरोप लगाया कि उन्हें जानबूझकर बदनाम किया जा रहा है और कहा कि यह न केवल उनके लिए, बल्कि महिलाओं के सम्मान के लिए भी अपमानजनक है।



अखाड़ा परिषद से कार्रवाई की मांग

मध्य प्रदेश संत समिति उज्जैन के अध्यक्ष ने अखाड़ा परिषद से इस मामले में हस्तक्षेप करने की मांग की है। उन्होंने कहा कि संन्यास लेने की प्रक्रिया को लेकर किए गए आरोपों की जांच होनी चाहिए।



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