हैंग होती HC वेबसाइट, कोर्ट को लेना पड़ा संज्ञान, तकनीकी खामियों पर मांगी जांच
समझें क्या है पूरा मामला...
- हाईकोर्ट की नई वेबसाइट शुरू होने के बाद कई दिक्कतें सामने आईं।
- ई-सुनवाई के दौरान भी वेबसाइट सही तरीके से काम नहीं कर रही।
- दस्तावेज अपलोड करने और जानकारी लेने में भी परेशानी हुई।
- कोर्ट ने आईटी व्यवस्था की खामियों पर गंभीर नाराजगी जताई।
- अब सात दिन में जांच और 30 दिन में स्वतंत्र ऑडिट होगा।
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की नई वेबसाइट इन दिनों परेशानी का कारण बनी है। नई वेबसाइट तैयार होने के बाद लगातार तकनीकी दिक्कतें आ रही हैं।
कभी वेबसाइट धीमी हो रही है, तो कभी काम ही नहीं करती। इसका असर कोर्ट के कई जरूरी कामों पर पड़ रहा है। ई-सुनवाई से लेकर दस्तावेज अपलोड करने में परेशानी हो रही है।
वकीलों को भी जरूरी जानकारी हासिल करने में दिक्कत आ रही है। बीते कुछ दिनों में यह परेशानी और ज्यादा बढ़ गई। आखिरकार अब हाईकोर्ट को खुद इस मामले में संज्ञान लेना पड़ा।
ई-सुनवाई के दौरान भी वेबसाइट ने नहीं दिया साथ
मामला 8 सितंबर 2026 को कोर्ट की सुनवाई में सामने आया। सुनवाई CRA संख्या 7908/2023 में हो रही थी। यह मामला आदित्य सोनी बनाम मध्य प्रदेश राज्य से जुड़ा है। मामले की सुनवाई जस्टिस विवेक अग्रवाल और जस्टिस अवनींद्र कुमार सिंह ने की।
सुनवाई के दौरान वेबसाइट ई-सुनवाई में सहयोग नहीं कर रही थी। वेबसाइट में कई तकनीकी खामियां सामने आईं। इससे अदालत की कार्यवाही भी प्रभावित हुई। कोर्ट ने इस परेशानी को गंभीरता से लिया।
कोर्ट ने कहा, आईटी खामियों से बर्बाद हुआ न्यायिक समय
वेबसाइट की समस्या पर कोर्ट ने खुलकर नाराजगी जताई। पीठ ने कहा कि आईटी कर्मचारियों की वजह से समय बर्बाद हुआ। कोर्ट ने इस स्थिति को गंभीर मामला माना। मुख्य न्यायाधीश से मांग की गई है कि संबंधित आईटी स्टाफ पर कार्रवाई की जाए। कोर्ट ने कहा कि पूरे मामले की जांच जरूरी है।
इसके लिए रजिस्ट्रार आईटी सीएसए को जवाब देना होगा। कोर्ट ने श्री केएस कुशवाहा से कारण बताने को कहा।।उन्हें बताना होगा कि काम में रुकावट क्यों आई।
आठ दिन में वेबसाइट ठीक होने की बात कही गई थी
कोर्ट ने वेबसाइट अपडेट से जुड़े पुराने संदेश का भी जिक्र किया। यह संदेश 25 या 26 अगस्त 2026 को साझा हुआ था।।इसमें वेबसाइट अपडेट के लिए आठ दिन का समय बताया गया था। लेकिन इसके बाद 15 दिन से ज्यादा समय गुजर गया। इसके बावजूद वेबसाइट की हालत संतोषजनक नहीं हुई।
कोर्ट ने इसी बात पर गंभीर चिंता जताई। पीठ ने माना कि समस्या अभी भी बनी हुई है। इसलिए अब इसकी अलग से जांच कराने का फैसला हुआ।
वकीलों ने कहा, पुरानी वेबसाइट ज्यादा बेहतर थी
सुनवाई के दौरान वकीलों ने भी अपनी परेशानी बताई। वकीलों ने कहा कि नई वेबसाइट सही तरीके से नहीं चल रही। उन्होंने वेबसाइट के लगातार खराब होने पर चिंता जताई।
कुछ वकीलों ने पुरानी वेबसाइट को बेहतर बताया। उनका कहना था कि पुरानी वेबसाइट ज्यादा आसानी से चलती थी। इस शिकायत ने भी कोर्ट की चिंता बढ़ाई। कोर्ट ने वकीलों की बात को गंभीरता से लिया। इसके बाद वेबसाइट की जांच का आदेश दिया गया।
सात दिन में बताना होगा वेबसाइट क्यों खराब हुई
कोर्ट ने मामले की विस्तृत जांच कराने का आदेश दिया है। जांच के बाद पूरी स्थिति कोर्ट के सामने रखनी होगी। केएस कुशवाहा को भी कारण बताने होंगे। उन्हें बताना होगा कि सिस्टम में परेशानी क्यों आई।
जिम्मेदारी तय करने के निर्देश भी दिए गए हैं। अगर कोई दोषी मिला, तो कार्रवाई की जाएगी। जांच रिपोर्ट सात दिन के भीतर देनी होगी। रिपोर्ट इसी पीठ के सामने पेश करनी होगी।
अब बाहरी विशेषज्ञ करेंगे हाईकोर्ट के आईटी सिस्टम की जांच
कोर्ट ने सिर्फ विभागीय जांच का आदेश नहीं दिया है। पूरे आईटी सिस्टम का स्वतंत्र ऑडिट भी कराया जाएगा। इसके लिए बड़ी तकनीकी कंपनियों के विशेषज्ञों की टीम बनेगी। कोर्ट ने टीसीएस का नाम भी आदेश में दिया है।
इंफोसिस और एलएंडटी टेक्नोलॉजी सर्विसेज का भी नाम है। इन कंपनियों के विशेषज्ञ सिस्टम की जांच कर सकते हैं। इस जांच को तीसरे पक्ष से कराया जाएगा। ऑडिट रिपोर्ट 30 दिन के भीतर कोर्ट में देनी होगी।
सीडॉट और नैसकॉम के अधिकारी भी टीम में हो सकते हैं
कोर्ट ने ऑडिट टीम को लेकर और विकल्प भी दिए हैं। टीम में भारत सरकार के सीडॉट अधिकारी शामिल हो सकते हैं। नैसकॉम के अधिकारी भी टीम का हिस्सा बन सकते हैं। इसका मकसद सिस्टम की सही स्थिति सामने लाना है।
विशेषज्ञ वेबसाइट की तकनीकी व्यवस्था की जांच करेंगे। वे यह भी देखेंगे कि परेशानी कहां से आ रही है। ऑडिट के बाद इसकी पूरी रिपोर्ट कोर्ट में आएगी। इसके आधार पर आगे की कार्रवाई तय हो सकती है।
जांच के दौरान भी सिस्टम में बफरिंग और हैंगिंग मिली
कोर्ट के आदेश में एक और अहम बात सामने आई है। बाद में कुशवाहा के सामने सिस्टम की जांच की गई। इस दौरान भी तकनीकी परेशानी सामने आई। सिस्टम में काफी बफरिंग की समस्या दिखाई दी।
कई बार सिस्टम हैंग होने की स्थिति भी बनी। इससे कोर्ट के सामने समस्या की गंभीरता साफ हुई। अब जांच में इन खामियों की वजह तलाशनी होगी। साथ ही जिम्मेदारी भी तय की जा सकती है।
अब वेबसाइट सुधारने की जिम्मेदारी तय होगी
हाईकोर्ट की वेबसाइट अदालत के काम का अहम हिस्सा है। इसके जरिए कई जरूरी सेवाएं उपलब्ध कराई जाती हैं। ऐसे में वेबसाइट खराब होने से काम प्रभावित होता है। अब कोर्ट ने इस समस्या पर सीधा संज्ञान लिया है। सात दिन में पहली जांच रिपोर्ट सामने आएगी।
30 दिन में स्वतंत्र ऑडिट की रिपोर्ट भी आएगी। इसके बाद वेबसाइट की कमियों की पूरी तस्वीर साफ होगी। कोर्ट की इस कार्रवाई से सुधार की उम्मीद बढ़ी है।
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