170 देशों में दवा बनाने वाली हेलियन का पहला भारतीय प्लांट पीथमपुर में लगेगा

The Sootr | Jun 08, 2026, 20:59 IST
वीसी से प्लांट का भूमिपूजन करते हुए मुख्यमंत्री डॉ.मोहन यादव।
मध्यप्रदेश ने एक बार फिर वैश्विक निवेशकों का भरोसा जीता है। दुनिया की अग्रणी कंज्यूमर हेल्थकेयर कंपनी हेलियन ने भारत में अपनी पहली मैन्युफैक्चरिंग यूनिट के लिए पीथमपुर को चुना है। यह परियोजना 2 हजार करोड़ रुपए के निवेश से विकसित होगी।

मध्यप्रदेश ने एक बार फिर वैश्विक निवेशकों का भरोसा जीता है। दुनिया की अग्रणी कंज्यूमर हेल्थकेयर कंपनियों में शुमार हेलियन ने भारत में अपनी पहली मैन्युफैक्चरिंग यूनिट स्थापित करने के लिए मध्यप्रदेश के पीथमपुर को चुना है। 170 से ज्यादा देशों में कारोबार करने वाली कंपनी की यह यूनिट 2 हजार करोड़ रुपए के निवेश से लगेगी, जिससे करीब 1000 लोगों को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर मिलेंगे।



सीएम मोहन यादव ने सोमवार, 8 जून को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से यूनिट का भूमिपूजन किया। उन्होंने रिमोट का बटन दबाकर कंपनी की नई यूनिट का सांकेतिक भूमिपूजन किया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश की भूमि सफलता की धरती है और आज मध्यप्रदेश सरकार तथा हेलियन कंपनी के बीच परस्पर विश्वास और असीम संभावनाओं की नई शुरुआत हो रही है।



मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कहा कि यह नए दौर का मध्यप्रदेश है, जो तेजी से आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ रहा है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि राज्य में निवेश करने वाले हर उद्योग समूह को स्थापना से लेकर उत्पादन शुरू होने तक सरकार का पूरा सहयोग मिलेगा। उन्होंने कहा कि हेलियन की इस यूनिट के माध्यम से लगभग 1000 लोगों को रोजगार मिलेगा, जिससे क्षेत्रीय विकास को नई गति मिलेगी।



30 प्रतिशत महिलाओं को रोजगार देने का लक्ष्य

मुख्यमंत्री ने कंपनी द्वारा अपने प्लांट में 30 प्रतिशत तक महिलाओं को रोजगार देने का लक्ष्य निर्धारित करने की सराहना करते हुए कहा कि इससे राज्य सरकार के महिला सशक्तिकरण के प्रयासों को और मजबूती मिलेगी। उन्होंने कहा कि कंपनी ने फिलहाल 2 हजार करोड़ रुपए का निवेश किया है, लेकिन सरकार और उद्योग जगत मिलकर इस निवेश को भविष्य में 2 हजार करोड़ से 2 लाख करोड़ रुपए तक पहुंचाने का प्रयास करेंगे।



मध्यप्रदेश में 30 बड़ी फार्मा कंपनियां मौजूद

मुख्यमंत्री ने कहा कि भारत आज मात्रा के आधार पर दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा फार्मा उत्पादक देश है। देश में 3 हजार से अधिक फार्मा कंपनियां और 10 हजार 500 से अधिक विनिर्माण इकाइयां दवाओं का उत्पादन कर रही हैं। मध्यप्रदेश में 300 से अधिक फार्मा कंपनियां तथा 30 से अधिक एपीआई और बल्क ड्रग्स निर्माता सक्रिय हैं।



यहां निर्मित दवाएं अमेरिका, यूरोप, अफ्रीका, एशिया और लैटिन अमेरिका के कई देशों में निर्यात की जा रही हैं। उन्होंने बताया कि प्रदेश में 75 से अधिक मेडिकल डिवाइस यूनिट्स कार्यरत हैं और राज्य के कुल निर्यात में फार्मा सेक्टर की हिस्सेदारी लगभग 20 प्रतिशत है।



मध्यप्रदेश अब केवल उत्पादन का केंद्र नहीं, बल्कि एक स्थापित वैश्विक निर्यात हब बन चुका है। इंदौर, पीथमपुर, मंडीदीप, भोपाल, देवास और उज्जैन जैसे औद्योगिक क्षेत्र तेजी से फार्मा मैन्युफैक्चरिंग क्लस्टर के रूप में विकसित हो रहे हैं।



मध्यप्रदेश उभरते हुए राज्यों में शुमार: हेलियन

हेलियन के मुख्य कार्यकारी अधिकारी ब्रायन मैकनामारा ने कहा कि यह भारत में कंपनी की पहली यूनिट है और मध्यप्रदेश में निवेश कर कंपनी बेहद उत्साहित है। उन्होंने कहा कि भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं में से एक है और मध्यप्रदेश देश के सबसे तेजी से उभरते राज्यों में शामिल है। यह परियोजना कंपनी के इंडिया विजन को जमीन पर उतारने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने बताया कि कंपनी ने फिलहाल मध्यप्रदेश में 175 मिलियन पाउंड का निवेश किया है और भविष्य में पीथमपुर स्थित इस यूनिट का और विस्तार किया जाएगा।



कंपनी के भारतीय उपमहाद्वीप के अध्यक्ष केदार लेले ने कहा कि दक्षिण एशिया का सबसे बड़ा प्लांट मध्यप्रदेश में स्थापित किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि पीथमपुर में यह निवेश किसी संयोग का परिणाम नहीं, बल्कि पिछले 18 महीनों से मध्यप्रदेश सरकार के साथ लगातार संवाद और उत्कृष्ट समन्वय का नतीजा है। करीब 40 एकड़ क्षेत्र में विकसित होने वाली यह यूनिट कंपनी की वैश्विक सप्लाई चेन की सबसे बड़ी इकाई होगी।



हेलियन और पीथमपुर परियोजना की खास बातें

हेलियन दुनिया की प्रमुख कंज्यूमर हेल्थकेयर कंपनियों में से एक है, जिसकी मौजूदगी 170 से अधिक देशों में है। कंपनी ओरल हेल्थ, डाइजेस्टिव हेल्थ, पेन रिलीफ एंड रेस्पिरेटरी तथा विटामिन्स, मिनरल्स एंड सप्लीमेंट्स जैसे उत्पादों का निर्माण करती है।



पीथमपुर के स्मार्ट इंडस्ट्रियल पार्क में 40 एकड़ से अधिक क्षेत्र में विकसित होने वाली यह अत्याधुनिक उत्पादन इकाई मुख्य रूप से ओरल हेल्थ उत्पादों के निर्माण पर केंद्रित होगी। यहां तैयार होने वाले उत्पाद भारत की जरूरतों को पूरा करने के साथ-साथ एशिया-प्रशांत, मध्य-पूर्व और अफ्रीका के कई देशों में निर्यात किए जाएंगे।



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