हेमंत खंडेलवाल के सिर पर सजा मध्य प्रदेश भाजपा का ताज, हो गई घोषणा
मध्य प्रदेश में भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के नए अध्यक्ष के नाम का ऐलान कर दिया गया है। हेमंत खंडेलवाल को पार्टी का नया अध्यक्ष चुना गया है। यह घोषणा मध्य प्रदेश के चुनाव प्रभारी और केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने औपचारिक रूप से की।
हेमंत खंडेलवाल को निर्विरोध अध्यक्ष के रूप में चुना गया है। बीजेपी ने इस नियुक्ति के जरिए जातिगत और क्षेत्रीय संतुलन साधते हुए 31 साल बाद वैश्य समाज के किसी नेता को प्रदेश की कमान सौंपी है। इससे पहले वैश्य समाज से आने वाले लखी राम अग्रवाल 1990 से 1994 तक एमपी बीजेपी के अध्यक्ष रहे हैं।
कौन हैं हेमंत खंडेलवाल?
2 सितंबर 1964 को उत्तरप्रदेश के मथुरा में जन्मे हेमंत खंडेलवाल (Hemant Khandelwal) की पार्टी संगठन और RSS में मजबूत पकड़ मानी जाती है। हेमंत खंडेलवाल बैतूल से दूसरी बार विधायक हैं और इससे पहले वे बैतूल से सांसद भी रह चुके हैं। उनके पिता विजय कुमार खंडेलवाल भी तीन बार बैतूल से सांसद रहे हैं, जिससे उनका राजनीतिक कद और भी मजबूत हो गया है। हेमंत खंडेलवाल की छवि एक निष्ठावान और सच्चे पार्टी कार्यकर्ता की है। वे B.Com और LLB डिग्रीधारी हैं और व्यवसायी भी हैं।
अब तक का राजनीतिक सफर
- 2007 से 2008 तक वे लोक सभा के सदस्य रहे।
- 2010 से 2013 तक उन्होंने बैतूल जिले में भाजपा के जिलाध्यक्ष के रूप में कार्य किया।
- 2013 में वे पहली बार चौदहवीं विधान सभा के सदस्य चुने गए और विधान सभा की सदस्य सुविधा समिति के सभापति रहे।
- 2014 से 2018 तक वे भाजपा के प्रदेश कोषाध्यक्ष रहे और माननीय श्री कुशाभाउ ठाकरे ट्रस्ट के अध्यक्ष के पद पर भी कार्य किया।
- 2023 में वे दूसरी बार विधान सभा के सदस्य निर्वाचित हुए।
मोहन यादव बने प्रस्तावक
हेमंत खंडेलवाल को मुख्यमंत्री डॉ.मोहन यादव और शिवराज सिंह चौहान की पसंद माना जा रहा है। लिहाजा, दोनों नेता बीजेपी दफ्तर में पूरे समय मौजूद रहे। सीएम डॉ.यादव स्वयं प्रस्तावक बने। भाजपा के प्रदेश संगठन महामंत्री हितानंद शर्मा ने खंडेलवाल को इशारा किया। इसके बाद सीएम उनका हाथ पकड़कर मंच पर लेकर पहुंचे।
धर्मेंद्र प्रधान, विवेक शेजवलकर और सरोज पांडे के सामने नामांकन दाखिल कराया। यहां भी केंद्रीय मंत्री सावित्री ठाकुर को भी प्रस्तावक बनाया गया, जबकि उनका नाम भी प्रदेश अध्यक्ष के लिए चल रहा था। खंडेलवाल पहली पंक्ति में केंद्रीय मंत्री वीरेंद्र खटीक और गोपाल भार्गव के बीच में बैठे थे। सीएम मोहन यादव ने इशारा किया। फिर पीठ पर हाथ रखकर मंच की ओर बढ़े। फिर बाकी औपचारिकताएं पूरी कराई गईं।
मध्य क्षेत्र से शिवराज के बाद हेमंत दूसरे नेता
शिवराज ने भर दिया था पर्चा
अब थोड़े पीछे चलते हैं। याद कीजिए पांच साल पहले का वो दिन, जब बीजेपी ने तब के प्रदेश अध्यक्ष राकेश सिंह को हटाकर वीडी शर्मा को कमान सौंपी थी। वीडी की भी नियुक्ति हुई थी। उनके मामले में निर्वाचन प्रक्रिया नहीं हुई थी। इतिहास पर गौर करें तो बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष के लिए आखिरी बार वोटिंग की नौबत वर्ष 2000 में आई थी।
तब पार्टी हाईकमान ने विक्रम वर्मा को उम्मीदवार बनाया था, लेकिन शिवराज सिंह चौहान ने उनके खिलाफ नामांकन दाखिल कर दिया था। तब मतदान हुआ और वर्मा को जीत मिली थी। हालांकि इसके बाद पार्टी के कुछ वरिष्ठ नेता शिवराज से नाराज हो गए थे। इसके बाद के बरसों की बाद करें तो 2002 से अब तक सभी प्रदेशाध्यक्ष केंद्रीय नेतृत्व की पसंद से निर्विरोध चुने गए।
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