हाई कोर्ट का बड़ा फैसला: बर्खास्तगी के बाद भी नहीं रोकी जा सकती ग्रेच्युटी, कहा- यह कर्मचारी की मेहनत की कमाई
रतन मिश्रा@ग्वालियर
मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय की ग्वालियर खंडपीठ ने कर्मचारी हित में एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए स्पष्ट किया है कि केवल बर्खास्तगी के आधार पर किसी कर्मचारी की ग्रेच्युटी नहीं रोकी जा सकती। अदालत ने कहा कि ग्रेच्युटी किसी प्रकार की दया या खैरात नहीं, बल्कि कर्मचारी की वर्षों की सेवा के बदले अर्जित कानूनी संपत्ति है।
यह फैसला उन लाखों कर्मचारियों के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है, जो नौकरी से हटाए जाने या सेवा समाप्त होने के बाद अपने सेवा लाभों को लेकर कानूनी लड़ाई लड़ते हैं।
ग्वालियर हाई कोर्ट (Gwalior High Court) ने मध्य प्रदेश पश्चिम क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी लिमिटेड को आदेश दिया है कि मृत कर्मचारी की विधवा को तीन महीने के भीतर ब्याज सहित ग्रेच्युटी राशि का भुगतान किया जाए। कोर्ट ने यह भी चेतावनी दी कि तय समय सीमा में भुगतान नहीं हुआ तो कंपनी पर 1 लाख रुपये का हर्जाना लगाया जा सकता है।
क्या है पूरा मामला?
मृत कर्मचारी की पत्नी पहुंचीं हाई कोर्ट
यह मामला मध्य प्रदेश पश्चिम क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी लिमिटेड से जुड़ा है। याचिकाकर्ता मुबीना खान के पति कंपनी में प्यून पद पर कार्यरत थे। जानकारी के अनुसार उनकी नियुक्ति वर्ष 1995 में आकस्मिक कर्मचारी के रूप में हुई थी। वर्ष 1997 में उन्हें नियमित कर्मचारी बना दिया गया। वर्ष 2009 में स्वास्थ्य खराब होने के कारण वे बिना सूचना ड्यूटी से अनुपस्थित हो गए। इसके बाद विभागीय जांच शुरू की गई। 27 मार्च 2014 को उनकी सेवाएं समाप्त कर दी गईं। दिसंबर 2016 में कर्मचारी की मृत्यु हो गई। इसके बाद उनकी पत्नी मुबीना खान ने फंड और सेवा लाभों की मांग की, लेकिन कंपनी ने ग्रेच्युटी देने से इनकार कर दिया।
कंपनी ने ग्रेच्युटी देने से क्यों किया इनकार?
कंपनी की ओर से कोर्ट में कहा गया कि कर्मचारी विभागीय जांच में दोषी पाए गए थे। उनकी सेवाएं समाप्त की गई थीं। इसलिए वे ग्रेच्युटी पाने के पात्र नहीं हैं। कंपनी ने क्षेत्राधिकार को लेकर भी आपत्ति उठाई, लेकिन अदालत ने उसे खारिज कर दिया।
हाई कोर्ट ने क्या कहा?
न्यायमूर्ति आनंद सिंह बहरावत की एकल पीठ ने अपने फैसले में स्पष्ट कहा कि:
अदालत ने कहा कि केवल नौकरी से बर्खास्त होना ग्रेच्युटी रोकने का आधार नहीं बन सकता।
हर्जाने की चेतावनी भी अहम
अदालत ने कंपनी को तीन महीने के भीतर भुगतान करने के आदेश दिए। यदि ऐसा नहीं हुआ तो 1 लाख रु. तक हर्जाना लगाया जा सकता है। यह आदेश बताता है कि अदालत कर्मचारी हितों के मामलों में सख्त रुख अपना रही है।
पेमेंट ऑफ ग्रेच्युटी एक्ट की धारा 4(6) का हवाला
कोर्ट ने अपने फैसले में पेमेंट ऑफ ग्रेच्युटी एक्ट (Payment of Gratuity Act) की धारा 4(6) का उल्लेख किया। इस धारा के अनुसार यदि कर्मचारी की वजह से नियोक्ता की संपत्ति को आर्थिक नुकसान हुआ हो या गंभीर अनुशासनहीनता से संस्था को हानि पहुंची हो, तभी ग्रेच्युटी रोकी जा सकती है। लेकिन अदालत ने पाया कि इस मामले में कर्मचारी की अनुपस्थिति से कंपनी को कोई प्रत्यक्ष आर्थिक नुकसान नहीं हुआ, इसलिए ग्रेच्युटी रोकना कानून के खिलाफ है।
FAQs
क्या बर्खास्त कर्मचारी को ग्रेच्युटी मिल सकती है?
हां। हाई कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि केवल बर्खास्तगी के आधार पर ग्रेच्युटी नहीं रोकी जा सकती, जब तक संस्था को आर्थिक नुकसान साबित न हो।
पेमेंट ऑफ ग्रेच्युटी एक्ट की धारा 4(6) क्या कहती है?
इस धारा के अनुसार, यदि कर्मचारी की वजह से संस्था को आर्थिक नुकसान हुआ हो या गंभीर अनुशासनहीनता हुई हो, तभी ग्रेच्युटी रोकी जा सकती है।
ग्वालियर हाई कोर्ट ने कंपनी को क्या आदेश दिया?
कोर्ट ने विद्युत कंपनी को मृत कर्मचारी की विधवा को तीन महीने के भीतर ब्याज सहित ग्रेच्युटी भुगतान करने के निर्देश दिए हैं।
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