हाईकोर्ट ने दी NHAI अधिकारियों को चेतावनी, ब्याज रोका तो होगी विजिलेंस जांच

Neel Tiwari | Aug 06, 2026, 20:24 IST
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मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने NHAI को साफ चेतावनी दी है कि जमीन अधिग्रहण के मामलों में मुआवजे का वैधानिक ब्याज रोकना बर्दाश्त नहीं होगा। रीवा की एक याचिका में कोर्ट ने कहा कि दो सप्ताह में ब्याज नहीं मिला तो मामला फिर खुलेगा।

5 प्वाइंट में समझें क्या है पूरा मामला

  • रीवा की एक महिला की जमीन राष्ट्रीय राजमार्ग के लिए अधिग्रहित हुई थी।
  • साल 2013 में अवार्ड पास हुआ, लेकिन पूरी राशि समय पर नहीं मिली।
  • NHAI ने मुआवजे का बड़ा हिस्सा 18 जुलाई 2026 को दिया।
  • हाई कोर्ट ने कहा कि बाकी राशि का वैधानिक ब्याज भी देना होगा।
  • कोर्ट ने चेताया कि आगे ऐसी गलती हुई तो NHAI अधिकारियों पर विजिलेंस जांच बैठ सकती है।

जमीन अधिग्रहण के मामलों में मुआवजा रोकना अब NHAI को भारी पड़ सकता है। मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने साफ कहा कि वैधानिक ब्याज रोकने का कोई अधिकार नहीं है। यदि ऐसी लापरवाही दोबारा सामने आई, तो कोर्ट अधिकारियों के खिलाफ विजिलेंस जांच का आदेश देने से पीछे नहीं हटेगा। यह टिप्पणी जस्टिस विवेक अग्रवाल और जस्टिस विनेय सराफ की डिवीजन बेंच ने रीवा के एक मामले की सुनवाई के दौरान की।



रीवा की महिला मुआवजा नहीं मिलने पर पहुंची हाई कोर्ट

यह मामला रीवा निवासी आभा सिंह की याचिका से जुड़ा है। उनकी सर्वे नंबर 519/1/क/5 की 0.088 हेक्टेयर जमीन राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजना के लिए अधिग्रहित की गई थी। भूमि अधिग्रहण प्राधिकारी और एसडीओ राजस्व ने 30 जुलाई 2013 को अवार्ड पारित किया था। इस अवार्ड में कुल 56 लाख 37 हजार 630 रुपये मुआवजा तय किया गया था।



13 साल बाद मिली राशि, फिर भी पूरा भुगतान नहीं हुआ

कोर्ट के सामने बताया गया कि तय मुआवजे में से 37 लाख 18 हजार 680 रुपये का भुगतान 18 जुलाई 2026 को किया गया। यानी अवार्ड पारित होने के करीब 13 साल बाद राशि दी गई। इसके बाद भी वैधानिक ब्याज का भुगतान बाकी था। इसी कारण याचिकाकर्ता ने हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया।



NHAI ने क्या दलील दी?

NHAI की ओर से अधिवक्ता मोहन सौसरकर ने कहा कि याचिकाकर्ता ने अवार्ड में बढ़ोतरी के लिए कलेक्टर के सामने आवेदन दिया था। इसी कारण भुगतान नहीं हो सका। लेकिन सुनवाई के दौरान उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि NHAI ने खुद अवार्ड को चुनौती नहीं दी थी। इसलिए तय मुआवजा समय पर देना जरूरी था।



हाई कोर्ट ने कहा, ब्याज रोकने का कोई अधिकार नहीं

डिवीजन बेंच ने साफ कहा कि यदि NHAI ने अवार्ड को चुनौती नहीं दी थी और किसी सक्षम अदालत से स्टे भी नहीं लिया था, तो मुआवजा और उसका वैधानिक ब्याज रोकने का कोई आधार नहीं था। कोर्ट ने माना कि याचिकाकर्ता पूरे वैधानिक ब्याज की हकदार हैं।



दो सप्ताह में ब्याज देने का दिया भरोसा

सुनवाई के दौरान NHAI के वकील ने कोर्ट को भरोसा दिया कि दो सप्ताह के भीतर पूरा वैधानिक ब्याज दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि पहले वर्ष के लिए 9 प्रतिशत सालाना और उसके बाद वास्तविक भुगतान तक 15 प्रतिशत सालाना की दर से ब्याज का भुगतान किया जाएगा। इसी आश्वासन के आधार पर कोर्ट ने याचिका का निपटारा किया।



समय पर भुगतान नहीं हुआ तो फिर खुलेगा मामला

हाई कोर्ट ने अपने आदेश में साफ कहा कि यदि तय दो सप्ताह में ब्याज का भुगतान नहीं किया गया, तो याचिकाकर्ता दोबारा आवेदन देकर यही याचिका फिर शुरू करा सकती हैं। यानी NHAI को तय समय सीमा का पालन करना ही होगा।



विजिलेंस जांच पर हाई कोर्ट की सख्त टिप्पणी

इस मामले की सबसे अहम बात कोर्ट की सख्त चेतावनी रही। कोर्ट ने कहा कि फिलहाल वकील के भरोसे के कारण विजिलेंस जांच का आदेश नहीं दिया जा रहा है। लेकिन भविष्य में यदि NHAI अधिकारी इसी तरह वैधानिक ब्याज रोकते रहे, तो किसी उपयुक्त मामले में उनके खिलाफ विजिलेंस जांच का आदेश दिया जाएगा।



जमीन अधिग्रहण के मामलों के लिए अहम है यह फैसला

यह आदेश सिर्फ एक याचिकाकर्ता तक सीमित नहीं माना जा रहा। इससे उन सभी लोगों को राहत मिल सकती है, जिनकी जमीन अधिग्रहित होने के बाद मुआवजा या उसका वैधानिक ब्याज लंबे समय तक रोका गया। हाई कोर्ट ने स्पष्ट संदेश दिया है कि सरकारी एजेंसियां कानून से ऊपर नहीं हैं। तय प्रक्रिया का पालन करना उनकी जिम्मेदारी है।



जिम्मेदार अधिकारियों को हाईकोर्ट की चेतावनी

हाई कोर्ट ने अपने आदेश से साफ कर दिया कि किसी भी नागरिक का वैधानिक पैसा बिना कानूनी आधार के नहीं रोका जा सकता। यदि कोई विभाग ऐसा करता है, तो अदालत न केवल भुगतान कराएगी बल्कि जरूरत पड़ने पर जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही भी तय करेगी। NHAI को दी गई यह चेतावनी आने वाले कई मामलों में महत्वपूर्ण मिसाल बन सकती है।



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