खनन माफिया पर कोर्ट का कड़ा रुख: 305 करोड़ की पेनल्टी बाकी, फिर दोबारा लीज क्यों?
ऐसे समझें पूरा मामला
- हाईकोर्ट ने अवैध खनन की पेनल्टी वसूली पर राज्य सरकार से मांगा जवाब।
- याचिका में 305 करोड़ 97 लाख रुपए बकाया होने का किया गया दावा।
- यह राशि अब तक वसूल नहीं हो सकी, इसी पर जनहित याचिका दाखिल हुई।
- डिफॉल्टरों को दोबारा लीज देने और ब्लैकलिस्ट नहीं करने पर अदालत ने उठाए सवाल।
- सरकार को एक सप्ताह का समय, अगली सुनवाई 6 जुलाई को।
प्रदेश में अवैध खनन और पेनल्टी वसूली के मामलों पर हाईकोर्ट की डबल बेंच ने मध्यप्रदेश सरकार से कड़े सवाल पूछे हैं। अदालत ने जानना चाहा कि अवैध खनन करने वालों से पेनल्टी की राशि अब तक क्यों नहीं वसूली गई और बकायेदार होने के बावजूद उन्हें दोबारा खदानों की लीज किस आधार पर दी गई। सरकार को अपना स्पष्ट पक्ष रखने के लिए एक सप्ताह का समय दिया गया है।
305 करोड़ 97 लाख रुपए की पेनल्टी बकाया
अकरम खान द्वारा दायर जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट की डबल बेंच ने प्रदेश में अवैध खनन और पेनल्टी वसूली की स्थिति पर गंभीर चिंता जताई है। याचिका में आरोप लगाया गया है कि अवैध खनन करने वाले माफिया पर 305 करोड़ 97 लाख रुपए की पेनल्टी बकाया है, लेकिन इसके बावजूद न तो उनसे राशि वसूली गई और न ही उनके खिलाफ प्रभावी कार्रवाई की गई।
सरकार को एक सप्ताह का समय दिया
याचिकाकर्ता का कहना है कि जिन खनन कारोबारियों पर भारी बकाया है, उनकी खदानों की लीज का नवीनीकरण किया जा रहा है। इतना ही नहीं, उन्हें ब्लैकलिस्ट भी नहीं किया गया और उनके खनन कार्य पर रोक लगाने जैसी कार्रवाई भी नहीं की गई।
सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से उपस्थित अतिरिक्त महाधिवक्ता ने इस मामले में सरकार का विस्तृत और स्पष्ट पक्ष रखने के लिए अदालत से समय मांगा। इस पर जस्टिस जीएस अहलूवालिया और जस्टिस पुष्पेंद्र यादव की युगलपीठ ने सरकार की प्रार्थना स्वीकार करते हुए एक सप्ताह का समय प्रदान किया।
हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि सरकार को यह बताना होगा कि बकाया पेनल्टी की वसूली के लिए अब तक क्या कदम उठाए गए हैं और डिफॉल्टरों को दोबारा लीज देने का आधार क्या है। मामले की अगली सुनवाई 6 जुलाई को निर्धारित की गई है।
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