31 साल का साथ, फिर शादी पर उठे सवाल, ग्वालियर हाईकोर्ट ने दिलाया पत्नी होने का हक
ग्वालियर हाईकोर्ट ने संपत्ति विवाद में अहम फैसला दिया है। कोर्ट ने 31 साल पुराने रिश्ते को खास महत्व दिया। कोर्ट ने कहा, लंबे साथ को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। ऐसे रिश्ते में शादी होने की बात मजबूत होती है। सिर्फ कई साल बाद शादी पर सवाल उठाना सही नहीं है। पहली पत्नी के बेटों ने संपत्ति पर दावा किया था मामला अशोकनगर जिले की चंदेरी तहसील से जुड़ा है।
यह विवाद ग्राम बरई की खेती की जमीन को लेकर था। बाबू दास बैरागी की मौत के बाद संपत्ति विवाद शुरू हुआ। पहली पत्नी के बेटों ने पूरी जमीन पर अपना दावा किया। उन्होंने रामकली बाई को बाबू दास की पत्नी मानने से इंकार कर दिया। उन्होंने रामकली और बच्चों के हिस्से पर भी सवाल उठाया।
रामकली और चार बच्चों के नाम दर्ज थे
राजस्व रिकॉर्ड में रामकली बाई का नाम दर्ज था। उनके चार बच्चों के नाम भी रिकॉर्ड में शामिल थे। पहली पत्नी के बेटों ने इस फैसले को कोर्ट में चुनौती दी। उनका कहना था कि रामकली बाई उनके पिता की वैध पत्नी नहीं थीं। इसी वजह से संपत्ति में उनका हिस्सा नहीं बनता। मामला पहले चंदेरी की अदालत पहुंचा था।
निचली दोनों अदालतों ने रामकली का साथ दिया
चंदेरी की सिविल कोर्ट ने बेटों का दावा खारिज किया। इसके बाद जिला अदालत में भी यही फैसला रहा। दोनों अदालतों ने रामकली और बच्चों का हक माना। उन्हें संपत्ति में कुल 5/7 हिस्सा दिया गया। इसके बाद मामला मध्य प्रदेश हाईकोर्ट पहुंचा। पहली पत्नी के बेटों ने दूसरी अपील दाखिल की।
हाईकोर्ट ने 31 साल के रिश्ते को अहम माना
ग्वालियर पीठ ने मामले में उपलब्ध सबूतों को देखा। रामकली और बाबू दास करीब 31 साल साथ रहे थे। दोनों के रिश्ते की जानकारी कई रिकॉर्ड में दिखी। मतदाता पहचान पत्र भी मामले में अहम सबूत बना। बैंक पासबुक से भी रिश्ते की जानकारी सामने आई। गवाहों के बयान भी अदालत के सामने रखे गए। इन सबूतों को कोर्ट ने महत्वपूर्ण माना। कोर्ट ने सभी साक्ष्यों काे देखते हुए बेटों की अपील खारिज करते हुए महिला को पत्नी होने का दर्जा प्रदान करते हुए अपील खारिज कर दी।
लंबे समय तक साथ रहना क्यों अहम है
अदालतों ने कई मामलों में ऐसी धारणा मानी है। लंबे समय तक पति-पत्नी की तरह रहना अहम तथ्य है। ऐसे रिश्ते को केवल शक के आधार पर नकारना ठीक नहीं। खासकर तब, जब दूसरे दस्तावेज भी साथ हों। यहां भी लंबे साथ के साथ कई रिकॉर्ड मौजूद थे। इसी वजह से रामकली का दावा मजबूत माना गया।
हाईकोर्ट ने अपील खारिज कर दी
न्यायमूर्ति आशीष श्रोती की एकल पीठ ने सुनवाई की। मामला सेकंड अपील नंबर 85/2020 के रूप में सामने आया। कोर्ट को फैसले में दखल देने का आधार नहीं मिला। कोर्ट ने पहली पत्नी के बेटों की अपील खारिज कर दी। इससे निचली अदालतों के फैसले बरकरार रहे। रामकली और उनके बच्चों का संपत्ति अधिकार बना रहा। कोर्ट ने तथ्य और सबूतों को ज्यादा महत्व दिया। इस मामले में सिर्फ रिश्ते का दावा नहीं था। रिश्ते के समर्थन में कई पुराने दस्तावेज मौजूद थे।
- ग्वालियर हाईकोर्ट का हालिया फैसला किस संपत्ति विवाद से संबंधित है?
ग्वालियर हाईकोर्ट का हालिया फैसला अशोकनगर जिले की चंदेरी तहसील में बाबू दास बैरागी की संपत्ति विवाद से संबंधित है, जिसमें उनकी पहली पत्नी के बेटों ने संपत्ति पर दावा किया था। - हाईकोर्ट ने लंबे साथ को किस तरीके से महत्व दिया?
हाईकोर्ट ने रामकली बाई और बाबू दास के 31 साल के रिश्ते को महत्वपूर्ण माना और कहा कि लंबे समय तक एक साथ रहने को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता, जिससे उनकी शादी के होने की बात मजबूत होती है। - इस मामले में निचली अदालतों का क्या निर्णय था?
निचली अदालतों ने रामकली बाई और उनके बच्चों के हक में फैसला दिया, जिसमें चंदेरी की सिविल कोर्ट और जिला अदालत ने पहले पत्नी के बेटों का दावा खारिज करते हुए रामकली और उनके बच्चों को संपत्ति का 5/7 हिस्सा दिया।