रिटायर्ड महिला शिक्षिका के 4.47 लाख रुपए लौटाने के मामले में हाईकोर्ट सख्त, ट्रेजरी कमिश्नर और पूर्व DEO को चेतावनी

Neel Tiwari | Oct 30, 2026, 20:51 IST
रिटायर्ड महिला शिक्षिका के 4.47 लाख रुपए लौटाने के मामले में मध्यप्रदेश हाईकोर्ट सख्त।
Madhya Pradesh High Court Takes Strict Stand on Refund of Rs 4.47 Lakh to Retired Woman Teacher.
मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने रिटायर्ड महिला शिक्षिका की ग्रेच्युटी से कटौती के मामले में सख्ती दिखाई है। अदालत के आदेश के बावजूद शिक्षिका को 4 लाख 47 हजार 2 रुपए नहीं लौटाए गए। इस पर कोर्ट ने दो अधिकारियों को अंतिम मौका दिया है। इनमें ट्रेजरी एंड अकाउंट्स कमिश्नर भास्कर लक्षकार और पूर्व जिला शिक्षा अधिकारी गोपाल सिंह बघेल शामिल हैं।

अदालत ने दोनों को आदेश का पालन करने के लिए दो सप्ताह का समय दिया है। ऐसा नहीं होने पर उन्हें व्यक्तिगत रूप से कोर्ट में पेश होना होगा।



रिटायर्ड सहायक शिक्षिका की ग्रेच्युटी से हुई थी कटौती

यह मामला छिंदवाड़ा जिले की रिटायर्ड सहायक शिक्षिका सुषमा गद्रे से जुड़ा है। वे सौंसर तहसील के शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय पार्ड़सिंगा में पदस्थ थीं। वे 31 दिसंबर 2022 को सेवानिवृत्त हुई थीं। सेवानिवृत्ति के बाद विभाग ने उनकी ग्रेच्युटी से 4 लाख 47 हजार 2 रुपए काट लिए थे। शिक्षिका ने इस कटौती को गलत बताते हुए जबलपुर हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। यह याचिका डब्ल्यूपी क्रमांक 14909/2023 के तहत दर्ज हुई थी।



ट्रेजरी कमिश्नर भोपाल IAS भास्कर लक्षकार

तीन महीने में रकम लौटाने का दिया था आदेश

शिक्षिका की याचिका पर 23 सितंबर 2024 को जस्टिस संजय द्विवेदी ने फैसला सुनाया था। उन्होंने ग्रेच्युटी से काटी गई राशि लौटाने के निर्देश दिए थे। विभाग को तीन महीने के भीतर पूरी रकम वापस करनी थी। हालांकि, निर्धारित अवधि में आदेश का पालन नहीं किया गया। इसके बाद शिक्षिका ने 7 नवंबर 2024 को संबंधित अधिकारियों को लिखित आवेदन दिया। इनमें जिला पेंशन अधिकारी, कोषाधिकारी, जिला शिक्षा अधिकारी और विकासखंड शिक्षा अधिकारी शामिल थे। आवेदन में उन्होंने अपनी ग्रेच्युटी से काटी गई रकम वापस करने की मांग की थी।



हाईकोर्ट पहुंचा मामला

हाईकोर्ट के आदेश और बार-बार आवेदन देने के बावजूद शिक्षिका को रकम नहीं मिली। इसके बाद उन्होंने अदालत में अवमानना याचिका दायर की। इसमें संबंधित अधिकारियों पर न्यायालय के आदेश का पालन नहीं करने का आरोप लगाया गया। अब यह मामला विभागीय अधिकारियों के लिए कानूनी परेशानी बन गया है।



जस्टिस दीपक खोट ने दो सप्ताह का दिया अंतिम मौका

इस मामले की सुनवाई 30 अक्टूबर 2026 को जस्टिस दीपक खोट की अदालत में हुई। सुनवाई के दौरान प्रतिवादी पक्ष के वकीलों ने अतिरिक्त समय मांगा। उन्होंने अदालत के आदेश का पालन करने के लिए समय देने का अनुरोध किया। हाईकोर्ट ने इस अनुरोध पर विचार किया। इसके बाद अनुपालन रिपोर्ट पेश करने के लिए दो सप्ताह का अंतिम समय दिया गया।



दोनों अधिकारियों को खुद होना होगा पेश

हाईकोर्ट ने निर्धारित अवधि में आदेश का पालन नहीं होने पर व्यक्तिगत उपस्थिति के निर्देश दिए हैं। इनमें प्रतिवादी क्रमांक दो ट्रेजरी एंड अकाउंट्स कमिश्नर भास्कर लक्षकार शामिल हैं। वहीं, प्रतिवादी क्रमांक पांच छिंदवाड़ा के पूर्व जिला शिक्षा अधिकारी गोपाल सिंह बघेल हैं। गोपाल सिंह बघेल अब सेवानिवृत्त हो चुके हैं। हालांकि, मामला उनके पद और नाम से दर्ज है। इसलिए सेवानिवृत्ति के बावजूद उन्हें अदालत में उपस्थित होना पड़ सकता है। इसके बाद हाईकोर्ट मामले में उचित आदेश पारित करेगा।



17 नवंबर को फिर होगी मामले की सुनवाई

इस मामले की अगली सुनवाई 17 नवंबर 2026 को निर्धारित की गई है। इस दौरान अधिकारियों की अनुपालन रिपोर्ट और आदेश के पालन की स्थिति महत्वपूर्ण होगी। अब सवाल है कि क्या निर्धारित अवधि में शिक्षिका को उनकी ग्रेच्युटी की राशि मिलेगी? या फिर संबंधित अधिकारियों को व्यक्तिगत रूप से हाईकोर्ट में पेश होना पड़ेगा?

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