हिट एंड रन के मामलों में एमपी देश में नंबर एक, हर दिन हो रहे 34 से ज्यादा हादसे
देश की सड़कों पर हिट एंड रन की घटनाएं बहुत तेजी से बढ़ रही हैं। यह हम सभी के लिए एक बड़ी चिंता का विषय बन गया है। आंकड़ों को देखें तो साल 2020 में पूरे देश में हिट एंड रन के 53 हजार 623 मामले दर्ज हुए थे।
सिर्फ चार सालों में यह आंकड़ा बहुत ज्यादा बढ़ गया और साल 2024 में यह संख्या 68 हजार 584 तक पहुंच गई है। इन आंकड़ों से साफ है कि सड़कों पर लापरवाही बढ़ती जा रही है।
वहीं यदि हम साल 2024 के आंकड़ों के हिसाब से राज्यों की बात करें, तो इस लिस्ट में मध्य प्रदेश सबसे ऊपर है। मध्य प्रदेश में हिट एंड रन के 12 हजार 453 मामले सामने आए हैं।
इसके बाद दूसरे नंबर पर उत्तर प्रदेश है जहां 11 हजार 209 हादसे हुए हैं। वहीं महाराष्ट्र में छह हजार 485 और बिहार में पांच हजार 759 हादसे दर्ज किए गए हैं।
मध्य प्रदेश में सबसे खराब हालात
मध्य प्रदेश में हिट एंड रन के मामलों ने सरकार और प्रशासन की नींद उड़ा दी है। राज्य में हर दिन औसतन 34 से ज्यादा हिट एंड रन हादसे हो रहे हैं जो कि बेहद डराने वाली स्थिति है।
पिछले कुछ सालों का रिकॉर्ड देखें तो साल 2023 मध्य प्रदेश के लिए सबसे खराब रहा। इस साल राज्य में सबसे ज्यादा 14 हजार 93 मामले दर्ज किए गए थे। इन बढ़ते हादसों की वजह से अब जमीनी स्तर पर कड़े कदम उठाने की जरूरत महसूस हो रही है।
भारतीय न्याय संहिता में सजा का प्रावधान?
हिट एंड रन के बढ़ते मामलों को रोकने के लिए सरकार ने भारतीय न्याय संहिता के तहत कड़े नियम बनाए हैं। इसमें ड्राइवर की गलती और उसके व्यवहार के आधार पर दो तरह की सजा तय की गई है।
किसी ड्राइवर से अनजाने में या लापरवाही से गाड़ी चलाने के कारण किसी की जान चली जाती है, लेकिन वह हादसे के तुरंत बाद खुद पुलिस या मजिस्ट्रेट को इसकी सूचना दे देता है, तो उसे 5 साल तक की जेल और जुर्माना हो सकता है।
वहीं अगर ड्राइवर किसी को टक्कर मारने के बाद घायल को सड़कों पर ही छोड़कर भाग जाता है। पुलिस या प्रशासन को कोई जानकारी नहीं देता, तो इसे गंभीर अपराध माना जाएगा।
इस स्थिति में दोषी ड्राइवर को 10 साल तक की जेल हो सकती है। साथ ही भारी जुर्माना भी भरना पड़ेगा।
पीड़ितों के लिए मुआवजा योजना
केंद्र सरकार ने अप्रैल 2022 में हिट एंड रन मोटर दुर्घटना पीड़ित प्रतिकर योजना शुरू की थी। इस योजना का मकसद हादसे का शिकार हुए लोगों या उनके परिवारों को तुरंत आर्थिक मदद पहुंचाना है।
योजना के तहत मिलने वाली मदद
- दुर्घटना में मौत होने पर दो लाख रुपए
- गंभीर रूप से घायल होने पर 50 हजार रुपए
मध्य प्रदेश में दावों के निपटारे की स्थिति
सरकार ने नियम तो बना दिए हैं, लेकिन लोकसभा में पेश हुई एक रिपोर्ट के मुताबिक, पीड़ितों को मुआवजा मिलने की रफ्तार बहुत ज्यादा धीमी है। मध्य प्रदेश के ये आंकड़े इस बात का सबूत हैं।
| वित्तीय वर्ष | कुल दर्ज दावे | भुगतान हुए मामले |
| 2024-25 | 231 | 133 |
| 2025-26 | 929 | 425 |
मुआवजा मिलने की पूरी प्रक्रिया?
सरकार ने इस योजना के तहत दावों के निपटारे के लिए एक समय सीमा तय की है।
- जब कोई पीड़ित या उसका परिवार मुआवजे के लिए आवेदन करता है, तो दावा जांच अधिकारी को आवेदन मिलने के एक महीने के भीतर उस पर फैसला करना होता है।
- इसके बाद दावा निपटान अधिकारी को उस आवेदन को मंजूर करना होता है। साथ ही आदेश को जनरल इंश्योरेंस काउंसिल के पास भेजने के लिए 15 दिन का समय मिलता है।
- जनरल इंश्योरेंस काउंसिल को आदेश मिलने के अगले 15 दिन के भीतर सीधे पीड़ित के बैंक खाते में ऑनलाइन पैसा ट्रांसफर करना होता है।
कागजों पर तो यह पूरी प्रक्रिया करीब दो महीने में खत्म हो जानी चाहिए, लेकिन असलियत में इस प्रोसेस में बहुत ज्यादा देरी हो रही है।
व्यवस्था सुधारने के लिए सरकार के प्रयास
मुआवजा देने में हो रही देरी को देखते हुए केंद्र सरकार ने इस योजना में कुछ जरूरी बदलाव किए हैं। सरकार ने जिला सड़क सुरक्षा समितियों और राज्य सड़क सुरक्षा परिषदों को इस काम की निगरानी की एक्स्ट्रा जिम्मेदारी सौंपी है।
इसके साथ ही, बीमा कंपनियों को साफ निर्देश दिए गए हैं कि
- लंबित पड़े मामलों का निपटारा बहुत तेजी से किया जाए।
- जरूरी दस्तावेजों को तुरंत ऑनलाइन पोर्टल पर अपलोड किया जाए।
- जिला स्तर के अधिकारियों के साथ बेहतर तालमेल बनाया जाए ताकि पीड़ितों को परेशान न होना पड़े।
हालांकि, सरकार इन व्यवस्थाओं को बेहतर बनाने के लिए लगातार कोशिशें कर रही है। जमीन पर इसका असर अभी भी काफी कम दिख रहा है।
FAQ
- हिट एंड रन कानून के तहत भागने वाले ड्राइवर को कितनी सजा हो सकती है?
भारतीय न्याय संहिता के मुताबिक, अगर कोई ड्राइवर हादसा करने के बाद पुलिस या मजिस्ट्रेट को सूचना दिए बिना मौके से भाग जाता है, तो उसे अधिकतम 10 साल तक की जेल की सजा हो सकती है और साथ ही उस पर भारी जुर्माना भी लगाया जाएगा। - हिट एंड रन हादसे में घायल होने या मौत होने पर कितना मुआवजा मिलता है?
केंद्र सरकार की योजना के तहत, अगर हिट एंड रन हादसे में किसी व्यक्ति की मौत हो जाती है, तो उसके परिवार को 2 लाख रुपए का मुआवजा मिलता है। वहीं, अगर कोई व्यक्ति गंभीर रूप से घायल होता है, तो उसे 50 हजार रुपए की आर्थिक मदद दी जाती है।
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