बीजेपी के लिए भीड़ नहीं जुटाएंगे कलेक्टर... आईएएस जीवी रश्मि के मैसेज से मचा हड़कंप
वैसे तो ये सभी जानते हैं कि सरकारों के पार्टी लाइन कार्यक्रमों में भीड़ और बसों का इंतजाम भी जिले के कलेक्टरों के हवाले होता है। मानता कोई नहीं। इधर इसी मामले को लेकर एक महिला अफसर के एक वाट्सएप मैसेज की पूरे प्रदेश में चर्चा है।
मामला महिला शक्ति वंदन बिल से जुड़ा है। चलिए जानते हैं पूरी कहानी…
आज यानी सोमवार को महिला शक्ति वंदन बिल पर लोकसभा में सहमति न बन पाने के विरोध में बीजेपी ने नारी सम्मेलन का आयोजन किया है। भोपाल में होने वाले इस कार्यक्रम के लिए प्रदेश से करीब 20 हजार महिलाओं को जुटाने की तैयारी है। इधर महिला एवं बाल विकास विभाग की सचिव जीवी रश्मि ने एक वाट्सएप मैसेज कर सभी को हैरत में डाल दिया है।
दरअसल Jansampark fr senior officers नाम का एक वाट्सएप ग्रुप है। इसमें प्रदेश के सभी अफसर और कलेक्टर शामिल हैं। पहली बार ऐसा हुआ है कि किसी अफसर ने साफ संदेश दिया है कि- पार्टी का काम पार्टी करे… कलेक्टर अपना काम करें।
आईएएस जीवी रश्मि ने क्या लिखा पहले उसे पढ़िए…
अब इसे हिंदी में समझिए…
हालांकि आईएएस जीवी रश्मि ने यह मैसेज खुद नहीं लिखा, बल्कि फॉरवर्ड किया है। ऐसे में सवाल ये भी खड़े हो रहे हैं कि क्या ये मैसेज किसी और ने भेजकर फॉरवर्ड करने को कहा है? या फिर बात कुछ और है?
Thesootr ने आईएएस जीवी रश्मि से उनका पक्ष जानने के लिए संपर्क भी किया गया, लेकिन बात नहीं हो सकी। जैसे ही वे अपना वर्जन देंगी, उसे भी इस खबर में शामिल किया जाएगा।
मैसेज की हो रही प्रशंसा
जाहिर है सरकार की एक अफसर ने पहली बार सार्वजनिक तौर पर साफ किया है कि पार्टी कार्यक्रमों के लिए कलेक्टरों को जुटने की जरूरत नहीं है। Sootr बताते हैं कि कई अफसर इस हिम्मत की तारीफ कर रहे हैं।
नारी शक्ति वंदन अधिनियम क्या है?
नारी शक्ति वंदन अधिनियम 2023 में पास हुआ था, लेकिन अब तक इसे लागू नहीं किया गया है। इस कानून के तहत लोकसभा, राज्यसभा और दिल्ली विधानसभा में महिलाओं के लिए 33% सीटें आरक्षित करने का प्रावधान है। इसका मकसद यह है कि महिलाएं राजनीति में पुरुषों के बराबर हिस्सेदारी पाएं। अब तक लोकसभा में सिर्फ 14% महिलाएं हैं।
नारी शक्ति वंदन अधिनियम का उद्देश्य
इस अधिनियम का उद्देश्य यह है कि महिलाओं की राजनीति में बढ़ती भागीदारी से वे केवल वोट डालने तक ही सीमित न रहें, बल्कि नीति बनाने में भी उनकी अहम भूमिका हो। सरकार का कहना है कि इस कानून से महिलाएं अब सिर्फ लाभार्थी नहीं, बल्कि निर्णायक भूमिका में आएंगी।
क्यों हो रहा हंगामा?
केंद्र सरकार का कहना है कि साल 2029 के लोकसभा चुनाव से पहले इस संशोधन को पारित कर दिया जाना चाहिए, ताकि अगले चुनाव में इसे लागू किया जा सके। महिलाओं की सीटें बढ़ाने के लिए सरकार पुरुषों की सीटों को कम नहीं करना चाहती है, इसलिए लोकसभा की सीटें 543 से बढ़ाकर 816 करने का प्रस्ताव रखा गया है।
लेकिन विपक्ष के कई नेताओं का कहना है कि इसमें ओबीसी महिलाओं के लिए कोटा नहीं दिया गया है। साथ ही, बिना नई जाति जनगणना के यह अधूरा माना जा रहा है। इस संशोधन में नई जनगणना की बजाय साल 2011 की जनगणना के आधार पर परिसीमन करने का प्रस्ताव है, जिससे कई सवाल उठ रहे हैं।